तमिलनाडु के मुख्य सचिव राम मोहन राव के खिलाफ आयकर कार्रवाई को कोई अन्नाद्रमुक के अंदरूनी मामलों और शशिकला के मनोनयन से जोड़कर देखना चाहें तो यह केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को साफ संकेत है कि अन्नाद्रमुक अब भी उतनी ही संगठित है, जितनी कि वह 'अम्मा' के जमाने में थी।
अन्नाद्रमुक द्वारा पहले वी. के. शशिकला को सर्वसम्मति से पार्टी की कमान सौंपना और अब उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि पार्टी धीरे-धीरे ही सही अपनी पूर्व प्रमुख जयललिता की छाया से बाहर निकल रही है। माना जा रहा है, पार्टी ने ऐसा करके भाजपा को जता दिया है कि वह तमिलनाडु के मुख्य सचिव रहे पी. राम मोहन राव के खिलाफ बीते दिनों की गई आयकर विभाग की छापे की कार्रवाई को भूली नहीं है।
इसके जरिए पार्टी भाजपा को भी संदेश दे रही है। जब से जयललिता की मौत हुई और शशिकला का नाम पार्टी महासचिव पद के लिए सुर्खियों में आया तब से ही प्रदेश भाजपा के कई नेता नाखुश दिखाई दिए। केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा, अन्नाद्रमुक ने ऐसा करके संकेत दिए हैं कि यह एक अलग तरह की राजनीतिक पार्टी है और सिर्फ वही फैसले लेती है जो पार्टी के हित में और सही हों।
यह प्रस्ताव पार्टी महापरिषद में पेश करने, मीडिया में सूचना देने और वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर उसे जयललिता के घर पॉज गार्डन जा कर शशिकला को सौंपने की जिम्मेदारी जया के उत्तराधिकारी मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम को दी गई।
बहरहाल, जिस वक्त पार्टी की महापरिषद मेें शशिकला को महासचिव बनाने का प्रस्ताव पास किया जा रहा था, उसी वक्त मद्रास उच्च न्यायालय ने जयललिता की मौत का सच उजागर करने की मांग वाली याचिका पर पीएमओ, गृह मंत्रालय, सीबीआई और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किए।
वैसे तो कोर्ट के आदेश का पार्टी के फैसले से कोई लेना-देना नहीं है पर न्यायाधीश एस. वैद्यनाथन ने सरकार के इस जवाब को खारिज कर दिया कि मुख्य न्यायाधीश संजय किशन कौल ने जयललिता के निधन से पहले ऐसी ही दूसरी याचिकाओं को खारिज कर दिया। हालांकि यह स्पष्ट कर दिया कि इस केस का संबंध इस बात से नहीं है कि अम्मा का इलाज किस प्रकार किया गया। अगली सुनवाई की तारीख 9 जनवरी तय की है।
शशिकला और अन्नाद्रमुक के सामने एक और मुसीबत खड़ी हो सकती है; वह यह कि 23 दिसंबर को हाईकोर्ट के न्यायाधीश के. कल्याण सुंदरम ने शशिकला को पार्टी प्रमुख बनाए जाने की संभावनाओं को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह याचिका एआईएडीएमके से निष्कासित राज्यसभा सांसद शशिकला पुष्पा (जिन्हें कथित तौर पर द्रमुक सांसद त्रिचि शिवा को दिल्ली एयरपोर्ट पर थप्पड़ मारने के कारण पार्टी से निकाल दिया गया था) ने दायर की है।
पुष्पा ने याचिका में कहा है कि पार्टी संविधान के अनुसार, पार्टी में कोई भी प्राथमिक सदस्य तभी पार्टी पद के लिए चुनाव लड़ सकता है, जब वह लगातार पांच साल तक पार्टी का सदस्य रहा हो। वी. के. शशिकला को 2011 में पार्टी से निकाल दिया गया था पर जयललिता ने 2012 में उन्हें फिर से पार्टी में शामिल कर लिया। इसका आशय यह है कि शशिकला लगातार अन्नाद्रमुक की सदस्य नहीं रह सकी थीं पर मौजूदा पार्टी 'नेतृत्व' का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। वी. के. शशिकला के सामने एक ही बड़ी समस्या यह है कि वे आयकर छापों के मामले में कानूनी लड़ाई हार सकती हैं।
खबरों की मानें तो आयकर विभाग अब पॉज गार्डन (जया के निधन के बाद अब शशिकला यहां रहती है) में छापा मार सकता है। साथ ही पन्नीरसेल्वम सहित कुछ वरिष्ठ मंत्रियों पर भी आयकर विभाग की कार्रवाई हो सकती है। अगर राम मोहन राव के खिलाफ आयकर कार्रवाई को कोई अन्नाद्रमुक के अंदरूनी मामलों और शशिकला के मनोनयन से जोड़कर देखना चाहें तो यह केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को साफ संकेत है कि अन्नाद्रमुक अब भी उतनी ही संगठित है, जितनी कि वह 'अम्मा' के जमाने में थी।
उधर, शशिकला को पन्नीरसेल्वम की जगह मुख्यमंत्री बनाने के लिए तब तक इंतजार किया जा सकता है जब तक उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला न आ जाए। इस मामले में अम्मा मुख्य अभियुक्त थीं। कुछ भाजपाई जोर दे रहे हैं कि पन्नीरसेल्वम को मुख्यमंत्री के तौर पर अपने भविष्य के बारे में फैसला करना ही होगा। पन्नीरसेल्वम ने भी केंद्र की ओर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
केंद्र के जीएसटी, एनरॉन-बंदरगाह राष्ट्रीय राजमार्ग एवं कुछ अन्य प्रोजेक्ट पूरे होने के बाद पन्नीरसेल्वम सरकार भू-अधिग्रहण को लेकर केंद्र के खिलाफ हैं। अन्नाद्रमुक ने हाल ही के फैसलों सेे भाजपा को यह संदेश तो दे दिया है कि केंद्र चाहे आयकर कार्रवाई कराए या कोर्ट कोई भी फैसला सुनाए उसे अपनी पसंद का पार्टी प्रमुख चुनने से कोई नहीं रोक सकता। कांग्रेस केंद्र की सत्ता में रहते तमिलनाडु की 'द्रविड़' राजनीति में दखलंदाजी करने का खामियाजा भुगत चुकी है।
शशिकला और उसके परिजन इस दौर से गुजरे हैं और वे इन बातों से कोई खास विचलित होने वाले नहीं। अम्मा की संगति में ये सब असीम धैर्य की कला सीख चुके हैं। राजनीति हो या कानूनी मामले इन्हें पता है कि कैसे धैर्य व संयम बरतना है। साथ ही उन्हें इस बात का भलीभांति अंदाजा है कि इससे जया को कई बार फायदा हुआ था।