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आपकी बात, गैर भाजपा शासित राज्यों की सरकारों और राज्यपालों के बीच विवाद क्यों होते रहते हैं?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Patrika Desk

May 24, 2023

आपकी बात, गैर भाजपा शासित राज्यों की सरकारों और राज्यपालों के बीच विवाद क्यों होते रहते हैं?

आपकी बात, गैर भाजपा शासित राज्यों की सरकारों और राज्यपालों के बीच विवाद क्यों होते रहते हैं?

अधिकारों का स्पष्ट विभाजन नहीं
राज्यपालों और गैर भाजपा सरकारों के मुख्यमंत्रियों के बीच वैचारिक मतभेद रहना स्वाभाविक है। दोनों स्वयं को सर्वोच्च निर्णायक शक्तियां मानते हैं। अत: वादविवाद स्वाभाविक है। दोनों के अधिकारों का विभाजन स्पष्ट और पारदर्शी हो, तो विवाद की स्थितियां उत्पन्न नहीं होंगी।
मुकेश भटनागर, वैशालीनगर, भिलाई
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पूर्वाग्रह से बचना जरूरी
राज्यपालों की टिप्पणी या किसी विषय पर आदेश पारित करना, गैर भाजपा शासित राज्य सरकारों को राजनीति से प्रेरित लगता है। कई बार ऐसा नहीं होता। राज्य सरकारों को इन पूर्वाग्रहों से बचना ही हितकर है। दोनों के बीच सामंजस्य ही राज्यों की प्रगति में सहायक है।
-राकेश कुमार मिश्रा, कोटा
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राजनीति का नतीजा
गैर भाजपा शासित राज्यों की सरकारों और राज्यपालों के बीच विवाद राजनीतिक दलों के लाभ से जुड़े होने के कारण हैं। पहले राज्यपाल पद पर नियुक्ति गुण के आधार पर होती थी। अब सत्तारूढ़ दल के प्रति श्रद्धा के आधार पर राज्यपाल नियुक्त किए जा रहे हैं। जाहिर है राज्यपाल उसी दल का पक्ष लेंगे, जिसने उसका चयन किया है।
निर्मला देवी वशिष्ठ, राजगढ़, अलवर
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राज्यपाल केन्द्र की कठपुतली
राज्यपाल की नियुक्ति केन्द्र सरकार की सिफारिश पर की जाती है। राज्यपाल केन्द्र सरकार की कठपुतली की तरह कार्य करता है। केन्द्र और राज्य में अलग-अलग राजनीतिक दल की सरकार होने से टकराव होता है। राजनीतिक दलों द्वारा अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए ऐसे पदों का दुरुपयोग न किया जाना ही लोकतंत्र की सच्ची सेवा और संविधान के प्रति सम्मान होगा।
प्रकाश भगत, कुचामन सिटी, नागौर
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राजनीतिक विचारधारा नहीं छोड़ पाते राज्यपाल
गैर भाजपा शासित राज्यों की सरकार व राज्यपालों के बीच प्राय: विवाद होते रहते हैं। जहां राज्यपाल अलग पार्टी से चुने गए हों और सरकार अलग हो, वहां विवाद स्वाभाविक हैं। वैसे तो राज्यपाल चुने जाने के बाद किसी पार्टी विशेष का नहीं होता, किंतु राज्यपाल अपनी पार्टी की विचारधारा को प्राय: छोड़ नहीं पाते हैं। यही भावना गैर भाजपा शासित सरकार व राज्यपालों के बीच विवाद का कारण बन जाती है। जनहित में राज्यपालों को स्वतंत्र व स्वविवेक से पारदर्शिता पूर्ण काम करने चाहिए और जो भी सरकार हो उसे भी राज्यपाल का न्यायोचित साथ देना चाहिए। यही लोकतंत्र के हित में है।
-आजाद पूरण सिंह राजावत, जयपुर
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बार-बार विवाद ठीक नहीं
अक्सर केंद्र में जिस पार्टी की सरकार होती है, उस पार्टी की विचारधारा से प्रभावित व्यक्ति को ही राज्यपाल बनाया जाता है। जब राज्य में विपक्षी दल की सरकार होती है, तो मुख्यमंत्री और राज्यपाल के मध्य कुछ फैसलों को लेकर टकराव पैदा हो जाता है। टकराव या विवादों की मुख्य वजह होती है राजनीति से प्रेरित होकर फैसले लेना, लेकिन बार-बार ऐसे विवाद होना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
-सुनील चारण मेड़वा, जैसलमेर
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होता रहता है टकराव
गैर-भाजपा शासित राज्यों में सरकारों और राज्यपालों के बीच टकराव की स्थिति होती रहती है। तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में गैर-भाजपा सरकारें हंै। सरकारों और राज्यपालों के बीच बयानबाजी के बीच राज्यपाल पर कामकाज में रोड़े अटकाने का आरोप भी लगाया जाता है। राज्य सरकारें अपने हिसाब से कार्य करना चाहती है, जब की राज्यपाल केंद्र के इशारे पर काम करता है।
- देवेन्द्र जारवाल, जयपुर