
हर बार यह देखने में आता है कि देश-प्रदेश में कोई घटना-दुर्घटना घटती है, तो तुरंत शासन-प्रशासन उससे संबंधित दिशा-निर्देश जारी कर देता है। सड़क हादसा होता है तो रफ्तार पर नियंत्रण रखने, हेलमेट पहनने और सीट बेल्ट लगाने का दिशा-निर्देश। हाल ही में लिफ्ट में फंसने की घटनाएं हुईं तो लिफ्ट के पंजीयन कराने व निरीक्षण कराने का दिशा-निर्देश। कहीं आगजनी हो तो उसके दिशा-निर्देश। मानो दिशा-निर्देश जारी करते ही उसने अपनी ड्यूटी पूरी कर ली, अब उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं।
दिल्ली के होटल की तरह ही रायपुर में भी करीबन नौ साल पहले ऐसा ही हादसा हुआ था, जिसमें वहां ठहरे 5 कारोबारी जिंदा जल गए थे। उसके बाद सरकार ने फायर ऑडिट सहित विभिन्न दिशा-निर्देश-आदेश जारी किए थे। उसके बाद हुआ क्या? वही ढाक के तीन पात..!
होटल एसोसिएशन की मानें तो रायपुर में ही 500 होटल, 600 से ज्यादा रेस्टोरेंट-कैफे और 350 से ज्यादा लॉज-गेस्ट हाउस संचालित हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के होटल-रेस्टोरेंट-ढाबे-मॉल-कमर्शियल कॉम्पलेक्स सहित मल्टीस्टोरी रेसिडेंशियल इमारतों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं के बराबर किया गया है। अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सिर्फ फायर ब्रिगेड की नहीं, बल्कि नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, ग्राम एवं नगर निवेश, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन आदि विभागों पर है। क्या ये विभाग अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं? अगर ये सभी अपना कार्य कर रहे हैं तो मात्र 91 होटल-रेस्टोरेंट का ही फायर ऑडिट क्यों हुआ? और बाकी पर क्या कार्रवाई की गई? होता यह है कि हर विभाग में कोई-न-कोई अधिकारी-कर्मचारी कुछ ऊपरी कमाई की लालच में बिना जांच किए एनओसी दे देते हैं। जब कोई हादसा होता है तो जिम्मेदारी एक-दूसरे पर थोप देते हैं।
सरकार को चाहिए कि वह लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए ऐसे दोषी विभागीय अधिकारियों पर भी कार्रवाई करे। साथ ही दिल्ली जैसी परिस्थिति पैदा न हो, इसके लिए सभी विभाग समन्वित रूप से ईमानदारी से फायर सुरक्षा ऑडिट करें।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com
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Updated on:
5 Jun 2026, 2:43 AM IST
Published on:
5 Jun 2026, 2:43 AM IST
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