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आपकी बात, खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?

पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं मिलीं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

जयपुरJul 03, 2024 / 05:52 pm

Gyan Chand Patni

मुनाफे के लालच में जिंदगी से खिलवाड़
खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं क्योंकि इससे मुनाफा अधिक होता है। व्यापारी सस्ते पदार्थों को मिलाकर उत्पाद की लागत घटा देते हैं और उसे ऊंचे दामों पर बेचते हैं। इसके अलावा, सरकारी निगरानी में कमी और सख्त कानूनों का अभाव भी इसके लिए जिम्मेदार है। उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी और मिलावट के प्रभावों के बारे में जानकारी का अभाव भी महत्वपूर्ण कारण है। भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही भी इस समस्या को बढ़ावा देते हैं।
 —स्वाति अग्रवाल, सूरत, गुजरात
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निगरानी तंत्र फेल
खाद्य पदार्थों में मिलावट का खेल वर्षों से चल रहा है। सेहत के साथ होने वाले खिलवाड़ को रोकने के लिए कानून भी बनाए गए हैं। फिर भी खाद्य पदार्थों में मिलावट नहीं रुक रही है। मिलावटी खाद्य पदार्थ बाजार में आ जाते हैं। खुफिया निगरानी तंत्र कमजोर होने कारण इनके निर्माण की जानकारी ही नहीं मिल पाती।
—पी.सी. खंडेलवाल, सांभर लेक, जयपुर
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जरूरी है कड़ी सजा
मुनाफा कमाने की सोच और रातोंरात अमीर बनने की चाहत में कुछ व्यक्ति मिलावट के धंधें में शामिल हो जाते हैं। मिलावट करने वालों को कड़ी सजा तुरंत सुनाई जानी चाहिए जिससे मिलावटखोरों में खौफ पैदा हो।
—श्यामलाल शर्मा, कांकरोली, राजसमंद
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जनता भी रहे जागरूक
अधिक धन कमाने की लालसा के कारण मिलावटखोरी की समस्या बढ़ रही है। व्यापारी मिलावट अधिक मुनाफे के लिए करते हैं। मिलावटखोर लोगों के स्वास्थ के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए जिससे लोगों का जीवन सुरक्षित रहे। जनता को भी जागरूक रहना होगा।
—दिलीप शर्मा, भोपाल, मध्यप्रदेश
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त्वरित जांच जरूरी
विक्रेता अधिक लाभ अर्जित करने के चक्कर में खाद्य पदार्थों में मिलावट करते हैं। सरकारी मशीनरी भी इसके लिए जिम्मेदार है। खाद्य निरीक्षक दल द्वारा औचक निरीक्षण कर त्वरित जांच करनी चाहिए।  
भगवती प्रसाद गेहलोत मंदसौर
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प्रयोगशालाओं की कमी
देश में खाद्य पदार्थों की मिलावट की जांच के लिए प्रयोगशालाओं की कमी है। इस कारण खाद्य पदार्थों में मिलावट पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थानीय उत्पाद बिना किसी जांच और अनुमति के बनते और धड़ल्ले से बिकते हैं।
—संजय डागा, हातोद, मध्यप्रदेश
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खाद्य निरीक्षकों की लापरवाही
देखा गया है कि खाद्य निरीक्षक केवल त्योहार पर ही  सक्रिय रहते हैं। सामान्य दिनों में खाद्य निरीक्षक बाजार में नजर नहीं आते। अगर खाद्य निरीक्षक नियमित अंतराल पर  कार्रवाई करते रहें तो मिलावट करने वालों को डर रहेगा। खाद्य वस्तुओं की मिलावट में कमी आएगी।  
लता अग्रवाल चित्तौड़गढ़
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प्रशासन का ढीला रवैया
खाद्य पदार्थों में मिलावट का मुख्य कारण प्रथम तो व्यापारियों का ज्यादा मुनाफा कमाने का लालच और दूसरा प्रशासन का ढीला रवैया है। भ्रष्टाचार की सुनियोजित कड़ी बनी होती है जिससे मिलावटखोर बेखौफ हैं।
महेश एस.श्रीमाली,समदड़ी
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कार्रवाई के मामले में महज खानापूर्ति
खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। समय रहते खाद्य पदार्थों की जांच नहीं हो पाती है। इससे बड़ी घटना होती है।
—आनंद सिंह राजावत, देवली कला, पाली
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भ्रष्टाचार भी है कारण
वर्तमान समय में निर्माताओं और विक्रेताओं को उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से कोई सरोकार नहीं है।। वे सभी अधिक से अधिक लाभ अर्जित करना चाहते हैं। प्रशासनिक अमले में व्याप्त भ्रष्टाचार और नियमित निरीक्षण न होने से खाद्य पदार्थों में मिलावट बढ़ रही है।
विनायक गोयल, रतलाम, मध्यप्रदेश
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