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झूठी देशभक्ति की भेंट न चढ़े आजादी का जश्न

सीपीसी अपनी गलतियों की पहचान न कर उनकी पुनरावृत्ति होने देती है, जबकि अमरीकी गलतियां स्वीकार कर सबक ले सकते हैं।

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झूठी देशभक्ति की भेंट न चढ़े आजादी का जश्न

झूठी देशभक्ति की भेंट न चढ़े आजादी का जश्न

मैक्स बूट, स्तम्भकार

दो शक्तिशाली देश, दो प्रमुख वर्षगांठ। हाल ही 1 जुलाई को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) ने अपना 100वां स्थापना दिवस मनाया। वहीं 4 जुलाई को अमरीका ने अपनी 'स्वतंत्रता की घोषणा' के 245 वर्ष पूरे किए। राजनीतिक दृष्टि से दोनों मील के पत्थर हैं, लेकिन दोनों में काफी फर्क है। अमरीकी 'स्वतंत्रता की घोषणा' का आधार उदारवादी मान्यता में निहित है कि 'सभी व्यक्ति समान हैं' और उन सभी के अधिकार अहस्तांतरणीय हैं, जैसे जीवन, स्वतंत्रता व प्रसन्नता का अधिकार। इसके ठीक विपरीत चीनी राष्ट्रपति के स्थापना दिवस संबोधन में लोगों के निजी अधिकारों का कोई जिक्र नहीं था। सब कुछ सामूहिक था - चीनी राष्ट्र, चीनी लोग, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी। शी ने लोगों से कहा, वे 'पार्टी (सीपीसी) के सुदृढ़ नेतृत्व को बनाए रखें' क्योंकि 'चीन की सफलता इसी पर टिकी है।'

सवाल उठता है कि कम्युनिस्ट पार्टी को चीन पर राज करने का अधिकार कैसे मिलता है? जनता की इच्छा से तो नहीं, जैसा कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों में होता है। न ही पार्टी माक्र्सवादी सिद्धांतों का अब और पालन करती नजर आती है। इसका आर्थिक तंत्र तो अब 'चीनी विशेषताओं वाला समाजवाद' है। शी ने कहा, 'बीते सौ सालों में पार्टी ने एकजुटता के साथ चीनी जनता का नेतृत्व किया और चीन के इतिहास का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अध्याय लिखा।'

'चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए इतिहास उसे वैधता प्रदान करता है।' पत्रकार इयान जॉनसन लिखते हैं कि इतिहास को अपने पक्ष में रखना सुनिश्चित करने के लिए सीपीसी इतिहास लिखने और इसके पुनर्लेखन के लिए अतिरिक्त समय खर्च करती है और किसी अन्य को इसमें दखल नहीं देने देती। जाहिर है कम्युनिस्ट पार्टी 'इतिहास शून्यवाद' के उदाहरणों के खिलाफ निरंतर रक्षक बन खड़ी है, जैसे 'पार्टी के इतिहास के साथ छेड़छाड़ या इसके नेतृत्व पर हमला।' दरअसल, पार्टी का वास्तविक मकसद इतिहास के साथ छेड़छाड़ रोकना नहीं, बल्कि इसके सटीक चित्रण को रोकना है। राष्ट्रपति शी के भाषण में कहीं भी 'ग्रेट लीप फॉरवर्ड' (सीपीसी द्वारा 1958 से १९62 तक चले आर्थिक-सामाजिक आंदोलन), सांस्कृतिक क्रांति या थियानमेन चौक पर हुए नरसंहार के दौरान अंजाम दिए गए भयावह अपराधों का जिक्र नहीं था, जिनका पैमाना हांगकांग और झिनझियांग में जारी मानवाधिकार हनन से बहुत कम है। आधिकारिक दस्तावेज में यही स्वीकार्य है कि पार्टी के इतिहास में एक के बाद एक शानदार जीत ही दर्ज हुई है। शी ने गर्व से कई बार दोहराया कि 'पार्टी ने राष्ट्र के रूप में चीन को पुनर्जीवन दिया है।'

इस आधिकारिक रुख के खिलाफ चीन में यदि कोई आवाज उठाता है तो इसे अपराध माना जाता है, उसे जेल भी भेजा जा सकता है। लेकिन अमरीका अलग है। अमरीका स्वतंत्र है, जहां कोई चीज हद से बाहर नहीं है। हम अच्छे व बुरे की बात कर सकते हैं। सही के लिए उठने वाले किसी विचार पर सहमत या असहमत हो सकते हैं। जैसे कि मैं इससे सहमत हूं कि नस्लववाद अमरीकी समाज का हिस्सा है। लेकिन इससे नहीं कि शुरुआती अफ्रीकी गुलामों का यहां पहुंचना ही देश की 'सच्ची नींव' है, जिस दावे को '1619 प्रोजेक्ट' में आईना दिखाया गया। सरकार को स्कूलों को निर्देश नहीं देने चाहिए कि कक्षा में क्या नहीं पढ़ाया जाए। चीन और अन्य राजतंत्रों में यही हो रहा है। अमरीका का मूल तत्त्व लोगों को बोलने की आजादी है और इसलिए अमरीकियों को अपने देश को समालोचक की तरह देखने का अधिकार है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी अपनी पुरानी गलतियों की पहचान न कर उनकी पुनरावृत्ति होने देती है जबकि अमरीकी अपनी गलतियां स्वीकार कर सबक ले सकते हैं। देश को इस आजादी का जश्न मनाना चाहिए न कि झूठी 'देशभक्ति' के नाम पर इस आजादी के महत्त्व को कमतर करना चाहिए।