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Patrika Opinion: आतंक के खिलाफ कूटनीतिक जीत

यह माना जा सकता है कि चीन भी खुद विश्व पटल पर आतंकियों का सहयोगी नहीं दिखना चाहता है। आतंक के मुद्दे पर वह अपनी छवि को सुधारना चाहता है, क्योंकि यह तय बात है कि आतंक पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन कर सामने आ रहा है।

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Patrika Desk

Jan 18, 2023

Patrika Opinion: आतंक के खिलाफ कूटनीतिक जीत

Patrika Opinion: आतंक के खिलाफ कूटनीतिक जीत

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 1267 आइएसआइएस (दाएश) अल-कायदा प्रतिबंध कमेटी ने आखिरकार जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ अब्दुल रहमान मक्की को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया। इस दिशा में भारत और अमरीका के संयुक्त प्रयासों को सात महीने पहले ही कामयाबी मिल गई होती यदि चीन ने 16 जून 2022 को आपत्ति न लगाई होती। अब जबकि चीन ने अपनी आपत्ति वापस ले ली है, मक्की की संपत्तियां फ्रीज की जा सकेंगी और उसकी यात्राओं और हथियारों की खरीद पर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा।

संयुक्त राष्ट्र की कमेटी ने भी कहा है कि मक्की सहित लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा के चरमपंथी भारत, खासकर जम्मू और कश्मीर में फंडिंग करते हैं, युवाओं को बहला-फुसला कर चरमपंथी बनाते हैं और आतंकी हमलों की योजनाओं में उन्हें शामिल करते हैं। भारत और अमरीका ने पहले ही मक्की को आतंकी घोषित कर रखा है। मक्की को आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव का चीन द्वारा विरोध नहीं करना भारतीय कूटनीति की जीत कही जा सकती है। अभी तक पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में चीन हमेशा उसका समर्थक बनकर उसे रुकवा देता था। इस कार्रवाई को आतंकवाद के विरुद्ध एकजुटता के तौर पर भी देखा जा रहा है। यह माना जा सकता है कि चीन भी खुद विश्व पटल पर आतंकियों का सहयोगी नहीं दिखना चाहता है। आतंक के मुद्दे पर वह अपनी छवि को सुधारना चाहता है, क्योंकि यह तय बात है कि आतंक पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन कर सामने आ रहा है। इसीलिए इस बार चीन ने अपना रुख बदलते हुए यूएन में पाकिस्तान का साथ नहीं दिया, बल्कि मक्की के सहारे भारत और अमरीका को साधने की कोशिश की है।

चीन को यह समझना ही होगा कि आतंक और आतंकियों का समर्थन करके किसी का भी भला नहीं हो सकता है। चीन आंतरिक स्तर पर कई तरह के वित्तीय और राजनीतिक दबाव भी झेल रहा है। ऐसी हालत में भारत के साथ अपने कारोबारी रिश्तों को दांव पर लगाकर वह पाकिस्तान की मदद करने की गलती नहीं करना चाहेगा। हालांकि 15 में से 14 देश पहले से ही भारत के इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे थे, पर इस मसले पर चीन का रुख अब बदला और उसने मक्की को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने संबंधी प्रस्ताव पर वीटो नहीं किया। आशा की जानी चाहिए कि आतंक से जुड़े मामलों में आगे भी चीन अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ ही नजर आएगा।