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पंगा मत लेना

आदमी जीवन भर गधे की तरह काम करके बचत करता है और सोचता है कि इससे वह अपने लिए एक घर खरीदेगा

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Shankar Sharma

Mar 04, 2016

Opinion news

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सरकार का बस नहीं चलता वरना वह आम आदमी के सांस लेने पर भी टैक्स लगा दे। अपने काबिल वित्त मंत्रीजी कर्मचारी भविष्यनिधि पर टैक्स प्रस्ताव रख दिए हैं। और इसके पीछे उन्हीं के एक साथी मंत्री का तर्क था कि यह टैक्स इसलिए लगाया गया है ताकि आदमी रिटायर होने पर अपने खाते से सारी राशि न निकालें। यानी सरकार अब खुद से ज्यादा आपकी बचत की गई राशि पर नजर जमाए है। क्या इस देश का रिटायर आदमी इतना लापरवाह होता है कि वह अपनी जिन्दगी भर की कमाई को एकाध महीने में ही उड़ाने की सोचता है।

शायद राजनीति में रह कर और इधर-उधर से मुंह मार कर हमारे नेता इतना कमा लेते हैं, इतनी जमीन-जायदाद बना लेते हैं कि उन्हें अपने बुढ़ापे की चिन्ता नहीं होती। अब आप चाहे तो हम एक दो नहीं सैकड़ों नेताओं के नाम गिनवा सकते हैं कि जब वे राजनीति में घुसे थे तो घर में भुनाने को दाने नहीं थे लेकिन कुछ ही बरसों में वे करोड़पति बन गए। कैसे? क्या उन्होंने अपने घर में नोट छापने की मशीन लगा ली? अब आपको इस सवाल का उत्तर ढूंढ़ते ज्यादा देर नहीं लगेगी। आज नहीं पुराने जमाने से ही सत्ता की नजर हमेशा जनता पर रहा करती थी।

एक जमाने में आम नागरिकों को घासमारी, चाकरी, लगान, नजराना न जाने कौन-कौन से टैक्स देने पड़ते थे। जनता से 'मतालबा' वसूला जाता था। यानी अगर राजा अपने राज्य से बाहर युद्ध करने जाता तो वह जागीरदारों से 'मतालबा' वसूलता और जागीरदार उसे जनता के सिर डाल देता। इसे यूं समझो जैसे सरकार एक होटल मालिक से सर्विस टैक्स वसूलती है और वह सर्विस टैक्स क्या होटल वाला अपनी जेब से देता है? नहीं, वह उस सर्विस टैक्स को आपसे-हमसे वसूलता है। अब तो एक कसर रह गई। जैसे पुराने राजाओं ने 'धुंआ' पर टैक्स लगाया था यानी एक घर में जितने चूल्हे जलते थे उन्हें उतना ही कर देना पड़ता था। इसे उस जमाने में 'धुंए पर वसूली' कहते थे सो जेटलीजी को यह आदेश निकाल देने चाहिए कि जिस घर में जितने बर्नर वाला गैस का चूल्हा होगा उन्हें उतना ही टैक्स देना पड़ेगा। एक पेंशनयाफ्ता अपना जीवन कैसे चलाता है यह उसी से पूछिए। आदमी जीवन भर गधे की तरह काम करके बचत करता है और सोचता है कि इससे वह अपने लिए एक घर खरीदेगा। लेकिन यहां तो जेटलीजी ने पहले ही डंडी मार दी।

कुछ ज्ञानियों ने अनुमान लगा कर बताया है कि अगर आप आज पच्चीस साल के हैं तो रिटायर होने पर आपको अट्ठारह प्रतिशत टैक्स देना पड़ेगा। जेटलीजी एक जाने-पहचाने वकील हैं चूंकि नेता हैं इसलिए 'अर्थशास्त्री' भी बन गए हैं। हमारे देश में यही होता है जिसे धूल खाने का भी ज्ञान नहीं होता वह देश चलाने लगता है। जेटलीजी को बचत करने की जरूरत ही नहीं है इसलिए वे मजे से सामान्य जनों की जेब पर 'कानूनी डाका' डालने की जुगत बैठा रहे हैं। लेकिन यह मत भूलना जेटली जी इसी मध्यवर्ग की वजह से आप कुर्सी पर हैं और यह नाराज हो गए तो जिसे आप 'नासमझ पप्पू' बता रहे हैं जनता उसे भी सिर पर बिठा सकती है। जरा सोच कर ही आम आदमी से पंगा लेना।
राही