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किसान आइडी ‘एग्रीस्टैक’ से कृषि में दिखेगा व्यापक बदलाव

एग्रीस्टैक किसानों को डिजिटल पहचान और बेहतर सुविधाएं देने की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन इसकी सफलता किसानों के डेटा अधिकारों की सुरक्षा पर निर्भर करेगी।
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जयपुर

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Opinion Desk

Aug 22, 2026

agristack

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वित्त वर्ष 2023-24 के केंद्रीय बजट में प्रस्तावित एग्रीस्टैक को कृषि क्षेत्र के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में पेश किया गया था। इसकी परिकल्पना आधार, यूपीआइ और डिजिलॉकर जैसी व्यवस्थाओं की तर्ज पर की गई थी। इस वर्ष जून के आखिर तक, तकरीबन सवा नौ करोड़ से अधिक किसान परिवारों को एग्रीस्टैक (किसान आइडी) से जोड़ लिया गया है। दरअसल एग्रीस्टैक ऐसी साझा डिजिटल व्यवस्था है, जिसमें किसान रजिस्टर, जियो-टैग गांव के नक्शे और फसल रजिस्टर जैसे प्रमुख रेकॉर्ड शामिल हैं। इसके जरिये किसानों, जमीन और फसलों से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप में एकत्र की जाएगी। इसके अलावा बीज, कीटनाशक और कृषि संसाधनों के भी डिजिटल रेकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं। ताकि पूरे कृषि क्षेत्र में आंकड़ों का एक समान स्वरूप तैयार किया जा सके। भविष्य में पीएम-किसान का लाभ लेने के लिए किसान रजिस्टर में नाम और विशिष्ट किसान आइडी होना अनिवार्य होगा। यानी सभी राज्यों को तय समय सीमा के भीतर यह व्यवस्था लागू करनी होगी। अधिनियम के तहत सैद्धांतिक रूप से किसानों के पास एग्रीस्टैक की कंसेंट (सहमति) सिस्टम का पूरा अधिकार रहेगा। लेकिन व्यवहार में यह इस बात पर निर्भर करेगा कि किसान खासकर छोटे और सीमांत किसान, महिलाएं और भूमिहीन किसान डिजिटल तकनीक और अपने अधिकारों को कितनी अच्छी तरह समझते हैं। अहम सवाल यह है कि किसानों की जानकारी आसानी से उपलब्ध होने का सबसे बड़ा लाभ आखिर किसे मिलेगा। सरकार अपनी नीति में जिन संस्थाओं को 'डेटा उपयोगकर्ता' कहती है, उनमें कृषि निवेश कंपनियां, ऋण देने वाले संस्थान शामिल हैं। ऐसे में आवश्यक है कि एग्रीस्टैक के क्रियान्वयन में कुछ बुनियादी सिद्धांतों को प्राथमिकता दी जाए।

सबसे पहले, सहमति सिस्टम को वास्तव में समझने योग्य बनाया जाए, ताकि किसान अपने डेटा के उपयोग को लेकर स्वत: ही सचेत निर्णय ले सकें। दूसरा, बटाईदार और भूमिहीन किसानों, महिला किसानों के लिए वैकल्पिक पहचान और पंजीकरण व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे वे डिजिटल ढांचे से बाहर ना हो पाएं। तीसरा, राज्यों को इस जटिल प्रक्रिया के लिए दलगत राजनीति के ऊपर उठकर पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए। यदि एग्रीस्टैक इन सुझावों को शामिल कर किसानों के अधिकार क्षेत्र को विस्तार देती है तो वाकई यह कृषि क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है।