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मतदाता सूचियों को लेकर जिस तरह से शिकायतें आ रही थीं, उसमें यह आवश्यक और न्यायसंगत हो गया था कि इन सूचियों की जांच की जाए। जहां एक ओर, चुनाव आयोग का यह फैसला राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में उन प्रत्याशियों के लिए राहत की बात है, जिन्हें फर्जी मतदाताओं का डर सता रहा है, वहीं दूसरी ओर, किसी भी चुनाव से पहले यह लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है कि मतदाता सूचियां किसी भी प्रकार के संदेह से परे हों।
यह बेहद शर्मनाक और दुखद तथ्य है कि राजस्थान में ४२ लाख फर्जी मतदाता बना देने का आरोप है, तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस जून से ही फर्जी मतदाताओं को लेकर शिकायत कर रही है। छत्तीसगढ़ में करीब चार लाख पैंतीस हजार मतदाताओं पर आपत्ति है। शुरुआत में शिकायतों को चुनाव आयोग नकारता आ रहा था, किन्तु विपक्षी दलों ने जब आलोचना का क्रम जारी रखा, तब आयोग ने मतदाता सूची को ऑडिट करने का यथोचित आदेश दिया है।
अब यह भी जरूरी है कि चार राज्यों में जाने वाले चुनाव आयोग के ऑडिट दल पूरी चौकसी के साथ मतदाता सूची पर निगाह डालें। हालांकि यह काम आसान नहीं होगा। पहला कारण यह है कि इसी टीम को मतदान केन्द्रों और मतदान मशीनों का प्रबंधन देखने का भी काम दिया गया है। दूसरा, अब चुनाव बिल्कुल दहलीज पर हैं, और समय नहीं है कि एक-एक मतदाता की जांच की जा सके। फिर भी चुनाव आयोग को प्रयास करना चाहिए कि अंतिम मतदाता सूचियां किसी भी तरह के संदेह से परे हों।
फर्जी मतदाताओं को मतदान का मौका देने का आयोग पर भी आरोप नहीं लगे। शिकायतों और उनके निवारण में ईमानदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। जहां प्रत्याशी एक वोट से भी चुनाव हार चुके हों, जहां १०० या १००० वोटों से हार-जीत बहुत आम बात हो, वहां लाखों फर्जी मतदाताओं के होने की आशंका भी लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। सूची में अगर फर्जी मतदाता हैं, तो चुनाव आयोग को ऐसे इंतजाम करने चाहिए कि कोई भी फर्जी वोट ना डालने पाए। यदि कोई फर्जी मतदान करने की साजिश में पकड़ा जाए, तो उसके लिए कड़े दंड का प्रावधान भी होना चाहिए। साथ ही, यह भी देखना चाहिए कि फर्जी मतदान से किस प्रत्याशी को फायदा पहुंच रहा है।
राजनीतिक पार्टियों के एजेंटों को भी तैयारी और निगरानी रखनी चाहिए कि कोई फर्जी मतदान न करने पाए। ऑडिट टीम अपना काम करेगी, साथ ही मतदान केन्द्रों पर भी फर्जी मतदान रोकने के हर संभव प्रावधान करने चाहिए। यह काम ज्यादा कठिन नहीं है। इसके अलावा मतदाता कार्ड में गलतियों और मतदाता सूचियों के प्रति आम जन को भी जागरूक रहना चाहिए। तभी मतदाता सूचियां सरकारों और राजनीतिक पार्टियों के हाथ का खिलौना होने से बचेंगी। निष्पक्ष और सर्वमान्य चुनाव भारत में लोकतंत्र की खूबसूरती का सबसे बड़ा पहलू है। यह खूबसूरती हर स्तर पर अंदर-बाहर से बेदाग होनी चाहिए। किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच हो और देशवासियों के संदेह को बार-बार दूर किया जाए।

