
उपनिवेशन की बेशकीमती जमीन की सुध ले सरकार
उपनिवेशन के अधीन हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि खाली पड़ी है। इस भूसम्पदा का सालों से कोई उपयोग नहीं हो रहा है। भूमाफिया इसे खुर्द-बुर्द करने में जुटे हैं। उपनिवेशन की भूमि पर खेती सिर्फ इसलिए नहीं हो पा रही है कि इसे किसी को आवंटित नहीं किया गया है। भूमिहीन श्रेणी में बीकानेर और जैसलमेर जिले में भूमि आवंटन के लिए साल 2004 में अंतिम बार आवेदन लिए गए थे। कुल 60,394 आवेदन जमा हुए, जो 18 साल बाद आज भी बस्तों में बंद हैं। इसी तरह उपनिवेशन की रकबा राज भूमि को विशेष श्रेणी में आवंटन के लिए साल 2012 में आवेदन लिए गए। ये 34,857 आवेदन भी उपनिवेशन कार्यालयों में पड़े धूल फांक रहे हैं। नवसृजित गजनेर उपनिवेशन तहसील में हजारों हेक्टेयर भूमि को आवंटन के लिए श्रेणीवार निर्धारण किया जाना है।
देखा जाए तो इस अनुपयोगी भूमि का आवंटन रोजगार सृजन के लिए किया जाना है। कोरोना महामारी के दौर में बेरोजगारी की समस्या और विकराल हो गई है। ऐसे में भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को भूमि आवंटन से जहां रोजगार मिलेगा, वहीं अतिक्रमण कर खेती करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा। कहने को तो उपनिवेशन विभाग अपनी भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में हर साल दर्जनों नोटिस जारी करता है, परन्तु जहां फसलों की बुवाई हो रही है वहां चंद रुपए का लगान लगाकर नोटिसों को फाइल कर दिया जाता है। सालों से दबंग इस भूमि पर खेती कर रहे हैं, जबकि गरीब और खेतिहर जरूरतमंद किसान सरकार की तरफ ताक रहा है।
खुली बोली श्रेणी की भूमि को विक्रय कर सरकारी खजाने में बड़ी राशि आ सकती है। साथ ही अनुपयोगी पड़ी भूमि पर खेती होने से कृषि उत्पादन बढ़ेगा। इससे प्रदेश की आय बढ़ेगी। सरकार ने उपनिवेशन विभाग में लम्बा चौड़ा सरकारी लवाजमा लगा रखा है, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकारियों और कर्मचारियों के पास करीब एक दशक से कोई काम नहीं है। लंबे समय से भू-आवंटन का काम अटका पड़ा है। अतिक्रमण हटने की बात तो दूर बची भूमि को संभालने का काम भी ठीक से हो जाए, तो बहुत है। यदि भूमि आवंटन किया जाता है, तो इन कार्मिकों को भी काम मिलेगा। सरकार को इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में रकबा राज भूमि का उपयोग करने के लिए आवंटन के कार्य पर खास ध्यान देना चाहिए। (ह.सिं.ब.)
Published on:
04 May 2022 07:28 pm
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