
गांधी दर्शन क्या आज ज्यादा प्रासंगिक हो गया है?
गांधी दर्शन आज ज्यादा प्रासंगिक
महात्मा गांधी कहा करते थे कि यदि किसी का ध्येय पवित्र है, तो उसको प्राप्त करने का उसका तरीका भी पवित्र होना चाहिए। इसी सिद्धांत पर चलते हुए गांधीजी अंग्रेजों को अहिंसक मार्ग से भगाना चाहते थे। 1942 के गांधीजी के असहयोग आन्दोलन से तो अंग्रेजों की कमर ही टूट गई। उनको भारत को आजाद करने का फैसला करना पड़ा। आज न केवल भारत, बल्कि सम्पूर्ण विश्व में घरेलू समस्याओं को लेकर भी लोग हिंसा पर उतर जाते हैं। ऐसे में गांधी दर्शन स्वत: ही प्रासंगिक हो जाता है।
-डॉ.गोवर्धन लाल गर्ग, जयपुर
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बढ़ रही है हिंसा
गांधी दर्शन की प्रासंगिकता सार्वभौमिक है, परन्तु वर्तमान में सबसे ज्यादा प्रासंगिकता अहिंसा दर्शन है। पूरे विश्व में आतंकवाद का खतरा बढ़ता जा रहा है। परिवार व समाज का वातावरण हिंसात्मक हो गया है। परिवारिक झगड़े बढ़ रहे हैं। समाज में सरे बाजार बंदूक चलाना,चाकू-छुरा मारना आम बात हो गई हे। अगर प्रत्येक देशवासी गांधी जी के अहिंसा दर्शन को आत्मसात कर ले, तो देश, समाज व परिवार का वातावरण सौहार्दपूर्ण होगा।
-लता अग्रवाल, चित्तौडग़ढ़
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दिखाया रास्ता
महात्मा गांधी ने कहा था कि मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित हैं, सत्य मेरा ईश्वर है और अहिंसा उसे पाने का साधन। यह वाक्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना पहले था। गांधी दर्शन भटके लोगों को रास्ता दिखाने का काम आज भी कर रहा है।
-लोकेंद्र सिंह चंपावत, जालोर
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हमेशा उपयोगी
वर्तमान हालात में गांधीवादी मूल्य एक प्रभावी विकल्प के रूप में दिखाई देते हैं। गांधी के सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह और नैतिकता के सिद्धांत तो हमेशा ही उपयोगी रहेंगे।
-मनोहर सिंह बीका, जोधपुर
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अमन-चैन संभव
महात्मा गांधी एक विराट व्यक्तित्व तो थे ही, साथ मे उनकी एक आदर्श जीवन शैली भी थी । बापू ने सत्य के प्रयोग किए। अपने जीवन में सत्य को आत्मसात भी किया। वे कहा करते थे कि- मैंने जीवन भर सत्य का दामन थामा और इसके प्रयोग से अपने जीवन को परिष्कृत किया। भावी पीढ़ी को गांधी के विचारों को पढ़ना चाहिए। उनके सत्य के प्रयोग को समझना चाहिए। यदि गांधी के विचारों को आत्मसात कर लिया जाए, तो विश्व में अमन चैन का वातावरण बन सकता है।
-सतीश उपाध्याय, मनेंद्रगढ़ कोरिया, छत्तीसगढ़
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मानवतावादी दृष्टिकोण
वर्तमान में विश्व के अनेक देशों में आतंकवाद, अस्थिरता और अराजकता फैली हुई है। मनुष्य में सहनशीलता तथा धैर्य की कमी हो गई है। ऐसे में गांधी जी का मानवतावादी दृष्टिकोण बहुत मददगार है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के लिए कुटीर उद्योगों के विकास पर जोर दिया। दलित व स्त्री उद्धार की बात कही।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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उपयोगी है गांधी दर्शन
दुनिया में आतंक और हिंसा की घटनाओं में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। ऐसे में महात्मा गांधी के दर्शन से विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है।
-रमेश रबारी जालोर
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सत्ता का आकर्षण नहीं
महात्मा गांधी शासन के क्षेत्र में लोकतंत्र, आर्थिक क्षेत्र में समाजवाद और सामाजिक क्षेत्र में समानता के प्रबल पक्षधर थे। महात्मा गांधी ने कभी झूठ से संधि नहीं की। उनमें सत्ता के प्रति भी आकर्षण नहीं था। वे हर वर्ग का कल्याण चाहते थे।
-चेतन चौहान, जोधपुर
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शांति में मददगार
वैश्विक जगत में बढ़ती हिंसा, आर्थिक विषमता, बेरोजगारी, द्वेष और कटुता चिंताजनक है। ऐसे में सत्य, अहिंसा, समानता, शांति व मानवीय मूल्यों को महत्व देने वाला महात्मा गांधी का दर्शन ज्यादा प्रासंगिक है। गांधी दर्शन दुनिया को शांति-सौहार्द की राह पर ले जाने में मददगार बन सकेगा।
-शिवजी लाल मीना, जयपुर
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Published on:
01 Oct 2021 04:58 pm
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