
आपकी बात, क्या सादा जीवन और उच्च विचार का जीवन दर्शन अब अप्रासंगिक हो गया हैै?
शांति का रास्ता
सदा जीवन और उच्च विचार का जीवन दर्शन कभी अप्रासंगिक नहीं हो सकता। वर्तमान समय में इसकी अत्यंत आवश्यकता है। नई पीढ़ी भौतिक सुख संसाधनों की अंधी दौड़ में लगी हुई है। वह तनावपूर्ण जिन्दगी जीने को मजबूर है। ऐसी परिस्थिति में अगर व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं को सीमित कर ले और सादा जीवन, उच्च विचार का दर्शन अपना ले तो उसे शांति मिल सकती है।
-विशनलाल दुपगा, श्री गंगानगर
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सादा जीवन, उच्च विचार अब कहां
आज की पीढ़ी हाई प्रोफाइल जीवन जीने में विश्वास करती है, जिसके लिए सादा जीवन उच्च विचार बेकार की चीज है। आज की पीढ़ी कर्जा लेकर शौक साधने और दिखावट में विश्वास करती है, मदद भी कैमरे के सामने करती है ताकि ज्यादा से ज्यादा लाइक मिल सकें। हालत यह है कि मशहूर होने के लिए भी अश्लीलता का सहारा लिया जा रहा है। समाज में बढ़ते अपराध और टूटते परिवार इसी का परिणाम है
शुभम वैष्णव, सवाई माधोपुर
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भौतिकवाद का असर
आधुनिक जीवन शैली और आर्थिक युग में खुद को स्थापित करने के लिए इंसान भागदौड़ कर रहा है। भौतिकवाद के चक्कर में सादा जीवन और उच्च विचार के दर्शन से वह तेजी से दूर होता जा रहा है
-मदनलाल लंबोरिया, भिरानी
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सादा जीवन सुख का आधार
सदा जीवन उच्च विचार का जीवन दर्शन आज भी प्रासंगिक हैं। इस भौतिकवादी युग में मनुष्य के आचार-विचार, रहन-सहन, जीवन.शैली आदि में परिवर्तन हुए हैं। जीवन-मूल्यों में गिरावट आई है। वर्तमान में उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण लोगों में स्वार्थी प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। उनके जीवन की सरलता और सहजता विलुप्त होती जा रही है। सादा जीवन ही सुख का आधार है। इसे अपनाकर ही जीवन में सुख.शांति पाई जा सकती है।
-अजिता शर्मा, उदयपुर
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कभी अप्रासंगिक नहीं
सादा जीवन उच्च विचार, एक सार्वभौमिक दर्शन है। यह कभी अप्रासंगिक नहीं हो सकता है, पर वर्तमान समय मे भौतिकवाद की अंधी दौड़ के चलते इसे किनारे कर दिया गया है । आदमी इस दर्शन को अपनाकर अपने जीवन को शांति से जी सकता है, पर आपाधापी के इस युग मे कोई इसे अपनाना नहीँ चाहता हे।
-लता अग्रवाल, चित्तौडग़ढ़
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पैसा कमाना ही लक्ष्य
सादा जीवन और उच्च विचार जीवन दर्शन अब अप्रासंगिक हो गया है, क्योंकि लोग अब सादा जीवन नहीं जीना चाहते। सब खूब पैसा कमाना चाहते हैं और खूब खर्च करना चाहते हैं। विचार पर तो अब बात ही नहीं होती, सिर्फ और सिर्फ पैसे कमाने की लालसा है।
-गर्वित जॉगिड़, अजमेर
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किताबों तक सीमित
एक वर्ग के लिए जैसे सादा जीवन उच्च विचार का दर्शन सिर्फ बातों और किताबों तक ही सिमट गया है। सादा जीवन उच्च विचार पर भाषण करने वाले भी जब प्रवचन देते हैं तो सुंदर सुसज्जित आभूषणों से अलंकृत हो पंडाल या मंच को इस प्रकार सजाते हैं जैसे इंद्र की सभा आयोजित होने वाली हो। प्रचार प्रसार पर पैसा खर्च करते हैं। इसके बावजूद अब भी समाज में कुछ ऐसे आदर्श लोग भी बचे हैं, जिनका जीवन दर्शन सादा भी है और विचार भी उच्च हैं। समाज की भलाई के लिएं नीव की ईट बन जाते हैं। मानने वालों के लिए सादा जीवन का दर्शन अभी भी प्रासंगिक बना हुआ है।
एकता शर्मा, जयपुर
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सादा जीवन और उच्च विचार प्रांसगिक
आज भी सादा जीवन और उच्च विचार दर्शन उतना ही प्रांसगिक है जितना पूर्व में था परन्तु आज के भौतिकवादी और शानोशौकत के युग में इसका पालन कोई नहीं करना चाहता है जिससे ही व्यक्ति आज असंतुष्टि के कारण शारिरीक और मानसिक रुप से अस्वस्थ रहने लग गया है।
-कैलाश चन्द्र मोदी, सादुलपुर, चूरू
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दिखावे की जीवन शैली
आज के आधुनिक कहे जाने वाले इस युग मेंं इंसान की मानसिकता भी प्रदूषित हो गई है। अब इंसान होड और दिखावे की दिशा हीन शैली के कब्जे मेंं बुरी तरह जकड़ गया है। भ्रष्ट आचार-विचारों ने आज के इंसान को 'स्वान्त: सुखायÓ बना दिया है। इसलिए सादा जीवन उच्च विचार का जीवन दर्शन के प्रति कहीं उत्साह नजर नहीं आता।
-ओमप्रकाश श्रीवास्तवए उदयपुरा मध्यप्रदेश
Published on:
06 Feb 2023 04:43 pm
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