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कविता- हिन्दी का भी सम्मान करो

डॉ. एनएम सिंघवी द्वारा लिखी गई कविता-'हिंदी का भी सम्मान करो'

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आपसी झगड़ों से गुलाम रहे, अपनी भाषा से प्रेम करो पर
पर राष्ट्रभाषा को भी सीख कर, हिन्दी का भी सम्मान करो।
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?

एक सप्ताह वर्ष में देकर, ​इतिश्री कार्य की मत समझो,
लम्बी यात्रा पर निकले हो, तैयारी घर से कर निकलो।
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?

सात दशक से सब स्वतंत्र हो, अब गुलामी की जंजीरें तोड़ो
मानसिकता अब बदल के, एकता के सूत्र में बंधो।
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?


आपसी झगड़ों से गुलाम रहे, अपनी भाषा से प्रेम करो पर, हिन्दी दिवस को मनाकर, हिन्दी सीखने का भाव जगा।
सब लालायित हुए सीखने, मन हिन्दी की सेवा में लगा।
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?

अंग्रेजी पूरी सीख न पाये, टूटी-फूटी से काम चलाया,
फालतू का रौब झाड़ कर, पूरे जीवन मन इठलाया।

एक सप्ताह महीने को छोड़ो, एक साल एक साथ लगा लो,
बार-बार की जिद को छोड़ो, एक साल में सीख ही डालो।
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?

सात दशक से सीख रहे हो, कब तक सीखते रहोगे भाषा,
सीखने का काम खत्म कर, नए कार्य का श्रीगणेश करो।
गांव गांव में हिंग्लिश स्कूल, कुकुरमुत्ता से हैं पनप रहे।

अंग्रेजी के नाम पर गांव में, भोली जनता को ठग रहे।
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?
अंग्रेज गए, अंग्रेजी रह गई, गुलामी दिमाग में समा गई

अंग्रेजी के नाम पर देखो, लूट सबने मचा रखी।
छोड़ कर हम देवनागरी, आंग्ल लिपि में लिखते क्यों?
ब्राह्मी का लोप हुआ धरा से, देवनागरी का हो ना वैसे!

हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?
हिन्दी से सब दूरी बना रहे, 'प्राइवेट स्कूल हैं छा रहे।
अंग्रेजी का ढोंग रचा कर, भोली जनता को लूट रहे।


राजनीति करने के लिये ही, सही बात समझना न चाहें।
विरोध करना है हिन्दी का, इसलिए विरोध करते जायें।
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?

गांधी तो थे गुजराती, पर क्यों बहुसंख्यक भाषा स्वीकारी
एकता के सूत्र में बांधने
हिन्दी भाषा पूर्ण वैज्ञानिक, जैसे बोलें वैसे ही लिखें।

उच्चारण को ध्यान में रख, अक्षर से ही शब्द बनायें।
केमेस्ट्री को केमेस्ट्री कहें, ना कहें हम चेमेस्ट्री
चतुर्वेदी को चतुर्वेदी ही कहें, न पुकारें कतुर्वेदी

हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?
न लाज करो न शर्म करो, अपनी भाषा पर गर्व करो

विदेशी भाषा सीखने से पूर्व, हिन्दी को स्वीकार करो।
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?
नये नये विद्यालय खुलते, दुकानें अपनी चलाने हेतु

हिन्दी में उत्साह घटाकर, विदेशी भाषाएं हैं सिखाते
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?
निरंतरता है जरूरी, सुनने और बोलने में

बिना किये अभ्यास, भूलते हैं जल्दी से
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?

हिंग्लिश शिक्षक रखकर बोलें, '​इंग्लिश स्कूल' चलाते हम।
हिन्दी में हाथ खुला नहीं, अंग्रेजी में हाथ रह गया तंग।

हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?

चीन में बोलते हैं चीनी, रसियन बोलते रूस में
बिना अंग्रेजी बोले, वे पाठ पूरा पढ़ा रहे
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?

हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?
यस, नो, वेरी गुड और थैंक्यू बोल कर सब काम चलाया,
जीवन पूरा बीतने आया, मन से अंग्रेजी बोल न पाया।

हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?
एकता के सूत्र में बांधने बापू ने ताकत ​हिन्दी की मानी
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?

देवनागरी जीवन से जुड़ी रही, आधार समाज का बनी रही
देवनागरी अब दूर हो रही, इसको कैसे बचायें हम?
हिंग्लिश बोल इठलाएं हम, क्यों हिन्दी बोल लजाएं हम?

-डॉ. एनएम सिंघवी ( पूर्व अध्यक्ष, प्रशासनिक सुधार, मानव शक्ति विकास व जनशक्ति आयोजन समिति, राजस्थान)