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आपकी बात, समाज में आर्थिक विषमता कैसे कम की जा सकती है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Gyan Chand Patni

Feb 05, 2021

आपकी बात, समाज में आर्थिक विषमता कैसे कम की जा सकती है?

आपकी बात, समाज में आर्थिक विषमता कैसे कम की जा सकती है?

घातक है आर्थिक विषमता
किसी भी समाज में आर्थिक विषमता विकट समस्या है। इसे खत्म करने के लिए सामाजिक रुढिय़ोंको तोडऩे की आवश्यकता है। ऐसा होने पर ही आर्थिक समानता वाले सभ्य समाज की नींव रखी जा सकेगी। आर्थिक विषमता हमेशा मानवता के लिए घातक साबित हुई है। समाज में आर्थिक विषमता को कम करने के लिए एक समान कानून व्यवस्था, लोगों में नैतिकता के मूल्यों को बढ़ावा देना तथा अंतर्जातीय विवाह प्रणाली को बढ़ावा देना चाहिए।
- नितेश कुमार सिन्हा, बिहार
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देश की सबसे बड़ी चुनौती
व्यापारी कर चोरी के कई रास्ते ढूंढ लेते हैं । इस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। मजदूरो के लिए न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण होना आर्थिक विषमता की खाई को खत्म करने के लिए संंसाधनों का वितरण भी समानता पर आधारित होना चाहिए।
- राजेन्द्र बांगड़ा, अध्यापक, जायल
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आर्थिक हालात ठीक करने होंगे
समाज में बढ़ती हुई आर्थिक विषमता को दूर करने के लिए गरीब और अमीर की खाई को पाटना आवश्यक है। गरीबों को रोजगार के अवसर मुहैया कराना होगा। ऐसे तबके को समाज की मुख्यधारा से जोडऩा होगा। वंचित समुदाय को भी चाहिए कि वे कुप्रथाओं से दूर रहें।
-बिहारी लाल बालान, लक्ष्मणगढ़, सीकर
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रोजगार के अवसर बढ़ें
आर्थिक विषमता कल्याणकारी समझे जाने वाले देशों की विडम्बना है। विश्व असमानता रिपोर्ट-2018 के अनुसार दुनिया में शीर्ष 0.1 प्रतिशत व्यक्तियों के पास विश्व की 13 प्रतिशत संपत्ति है जबकि भारत में शीर्ष 10 प्रतिशत व्यक्तियों के पास देश की 56 प्रतिशत सम्पत्ति है। आर्थिक विषमता को समाप्त करने के लिए हमें शिक्षा में निवेश बढ़ाते हुए रोजगारोन्मुखी एवं दक्षतापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए। गरीब वर्ग की मूलभूत वस्तुओं पर टैक्स छूट प्रदान कर और अमीर वर्ग पर टैक्स बढ़ाकर भी यह फांसला कुछ कम किया जा सकता है। हमें रोजागार के अवसरों का निरंतर सृजन करते हुए चलना होगा।
-कपिल भावसार, सिरोंज, मध्यप्रदेश
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विकास दर को प्रभावित करती है विषमता
देश आज आर्थिक विषमता से गुजर रहा है। एक तबका जहां जरूरत से अधिक कमाई कर रहा है, वहीं दूसरा तबका न्यूनतम दैनिक जरुरतों को पूरा करने जितना भी नहीं कमा पा रहा। देश में करोड़पतियों और अरबपतियों की संख्या में वृद्धि हो रही है और दूसरी तरफ समान मजदूरी के निर्धारण के अभाव में मजदूर वर्ग भूखे पेट सोने को मजबूर हैं । किसी देश के विकास के लिए आर्थिक विकास महत्त्वपूर्ण है । आर्थिक मजबूती के बिना देश का विकास सम्भव नही है। अत्यधिक विषमता विकास दर को भी प्रभावित करती है।
-डॉ.अजिता शर्मा, उदयपुर
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मिलकर प्रयास करने होंगे
समग्रता से देखें तो साथी हाथ बढ़ाना एक अकेला थक जाएगा मिलकर बोझ उठाना वाली भावना से आर्थिक विषमता दूर की जा सकती है । वसुधैव कुटुंबकम की भावना से ओतप्रोत होकर समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी-अपनी जिम्मेदारी को निष्ठा से निभाता है, तो समाज आर्थिक विषमता से ऊपर उठ सकेगा। समाज के पास कहीं प्रकल्प और कई आयाम हैं जिससे गरीब तबके लोगों को ऊपर उठाया जा सकता है।
-विद्या शंकर पाठक, सरोदा, डूंगरपुर
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धनी वर्ग पर बढें टैक्स
आर्थिक विषमता को दूर करने के लिए आर्थिक रूप से अत्यंत संपन्न व्यक्तियों को पिछड़े और निम्न वर्ग के लोगों को भौतिक रूप से कुछ सहयोग देने पर इनकम टैक्स में रियायत का प्रावधान किया जा सकता है। एक निश्चित सीमा से ऊपर आय प्राप्त करने वाले लोगों के ऊपर आयकर की राशि बढ़ाई जानी चाहिए।
-प्रेम शर्मा रजवास, टोंक
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पुख्ता हो बुनियादी ढांचा
आज हमारे समाज में भारी आर्थिक असमानत है। इसका खमियाजा भी समाज के लोग भुगत रहे हैं। इस असमानता की खाई को भरने के लिए भारतवर्ष को आर्थिक विकास पर ध्यान देना होगा और एक पुख्ता बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा। जिस प्रकार सांसदों के वेतन भत्तों और सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की जाती है, उसी प्रकार मजदूर तथा किसानों के हितों के लिए भी ठोस नीति बनाने की आवश्यकता है।
-नरेंद्र रलिया, भोपालगढ़, जोधपुर