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आपकी बात, गांवों और कस्बों में रोजगार के अवसर कैसे बढ़ाए जा सकते हैं?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Gyan Chand Patni

Jun 22, 2021

आपकी बात, गांवों और कस्बों में रोजगार के अवसर कैसे बढ़ाए जा सकते हैं?

आपकी बात, गांवों और कस्बों में रोजगार के अवसर कैसे बढ़ाए जा सकते हैं?

कृषि उत्पादों पर आधारित उद्योग लगाए जाएं
गांवों और कस्बों में रोजगार की कमी के कारण वहां से लोगों का पलायन शहरों की ओर हो रहा है। गांव और कस्बों में लोगों के रोजगार का प्रमुख साधन कृषि है। कृषि उत्पादों का कच्चे माल के रूप में उपयोग करने के लिए कृषि पर आधारित उद्योगों एवं कारखानों को गांवों और कस्बों में स्थापित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कृषि में उपयोग होने वाले औजार एवं संसाधनों का निर्माण भी गांव एवं कस्बों में ही किया जाना चाहिए। इससे वहां रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी तथा स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति भी होगी।
-मल्ली कुमार मेहता, इंदौर
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भ्रष्टाचार पर लगाम जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार योजनाएं तो लागू करती हैं, लेकिन ये योजनाएं भ्रष्टाचार का शिकार हो जाती हैं। इस वजह से इन योजनाओं का पूरा लाभ जनता को नहीं मिल पाता है। इन योजनाओं की निगरानी के लिए व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे ग्रामीणों में विश्वास पैदा हो। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक आय प्रदान करने वाली खेती को प्रोत्साहन दिया जाए, जिससे किसानों के साथ-साथ सीमांत किसानों और मजदूरों को भी ज्यादा से ज्यादा लाभ हो सके। सिंचाई सुविधा, जल प्रबंधन इत्यादि के माध्यम से कृषि भूमि क्षेत्र का विस्तार किया जाए, जिससे न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी साथ ही आय में भी वृद्धि होगी।
-डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर
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शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावना
कोरोना महामारी ने कई लोगों को गांवों में लौटने के लिए मजबूर किया है। इसलिए, जल्द से जल्द ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के भरपूर अवसर पैदा करने की जरूरत है। भविष्य की महामारियों की तैयारी में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन भी एक महत्त्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था बच सकती है। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर सकते हैं। सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम जैसे ग्रामीण आजीविका मिशन बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर सकते है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा उद्योग रोजगार के भरपूर अवसर पैदा कर सकते है।
-वेदान्त गांवशिंदे, बड़वानी, मप्र
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कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए
वर्तमान समय में ग्रामीण इलाकों एवं कस्बों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए कुटीर उद्योगों को बढ़ावा मिलना चाहिए। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी इसके पक्षधर थे। सरकार स्वयं सहायता समूहों का निर्माण कर ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार के साधन उपलब्ध करवा सकती है। सरकार उन्हें सब्सिडी प्रदान कर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने मे मदद भी कर सकती है।
-विनायक गोयल, रतलाम
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मार्गदर्शन और जागरूकता जरूरी
गांवों में संभावनाओं की कमी नहीं है, बस जरूरत है सही मार्गदर्शन और जागरूक होने की। गांवों में कृषि व पशुपालन में नवाचार लाकर युवाओं को उसकी तरफ आकर्षित किया जाए, जिससे लोग परिवार कि साथ मिलकर काम कर सकें। साथ ही लघु उद्योगों को प्रोत्साहित किया जाए। सरकारी व निजी औद्योगिक इकाइयां ग्रामीण क्षेत्रों में लगाई जाएं, जिससे गांवों के लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें। कस्बों में डेयरी व सब्जी और फल उत्पादन की ओर ध्यान दिया जाए। साथ ही तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। गांवों और कस्बों में बिजली, पानी और सड़क की व्यवस्था ठीक की जाए, जिससे लोगों का शहरों की तरफ पलायन कम से हो सके ।
-सुनीता सिंह, जयपुर
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आधुनिक कृषि को बढ़ावा दिया जाए
गांवों में परम्परागत कृषि के स्थान पर आधुनिक कृषि को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही फूड प्रोसेसिंग, टैक्सटाइल डिजाइनिंग, मत्स्य पालन , डेयरी, पशुपालन जैसे लघु व कुटीर उद्योगों को विकसित किया जाना चाहिए। शिक्षा प्रणाली को कौशल व व्यावसायिक आधारित बनाया जाए, ताकि युवाओं को नौकरी के लिए भटकना ना पड़े। युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करके उन्हें आसान व कम ब्याज पर ऋण दिया जाए।
-कमलेश कुमार कुमावत, चौमूं, जयपुर
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लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए
गांव और कस्बों में रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार को लघु उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए। इससे गांव में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। जो लोग यहां पर उद्योग लगाएं, उन्हें जमीन, बिजली और पानी रियायती दर पर दी जाए। इससे शहरों पर बढ़ता दबाव भी कम होगा।
-समीर कुमार माहेश्वरी, दही खेड़ा, झालावाड़
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रोजगार मूलक शिक्षा को बढ़ावा
वर्तमान दौर में बेरोजगारी प्रमुख समस्या है। गांव एवं कस्बों में भी पढ़े-लिखे युवा बेरोजगारों की बड़ी संख्या है। इसका मुख्य कारण तकनीकी एवं रोजगार मूलक शिक्षा का नहीं होना है। यदि रोजगार मूलक शिक्षा देने पर ध्यान दिया जाए, तो गांव-कस्बों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
-गजेन्द्र सिंह राठौर, मंदसौर, मप्र
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कुटीर उद्योग को बढ़ावा दिया जाए
गांवों और कस्बों में भी शिक्षा का प्रसार हो गया है। अब जो समस्या है वह रोजगार की है। बेरोजगारी के कारण युवा कुंठा ग्रस्त हो रहे हैं। ऐसे में सरकार का दायित्व बनता है कि उनको उचित रोजगार उपलब्ध करवाए। इसके के लिए सरकारी बैंकों से युवाओं को कम ब्याज पर ऋण प्रदान किया जाए। गांवों से जुड़े छोटे-छोटे कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाए।
-अरुण भट्ट, रावतभाटा
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गांवों को बनाया जाए आत्मनिर्भर
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। गांधीजी के 'ग्राम स्वराजÓ के विचार को अपनाकर गांवों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। कोरोना महामारी के बाद रोजगार की समस्या को दूर करने के लिए खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, फल - सब्जी, अचार पापड़, चटाई, बांस की वस्तु जैसे छोटे उद्योगों को ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोत्साहित कर न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं, बल्कि इनसे महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारकर उन्हें सशक्त भी किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्र में ही रोजगार उपलब्ध हो जाने से शहरों की ओर पलायन भी कम होगा तथा शहरी क्षेत्र में संसाधनों पर दबाव भी कम होगा ।
-अभिजीत मूंड, झुंझुनूं
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कृषि से जुड़े उद्योगों को दिया जाए बढ़ावा
आज के समय में रोजगार एक बड़ी समस्या है। ग्रामीण क्षेत्र में भी रोजगार को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। हमारा देश कृषि प्रधान देश है। इसलिए कृषि से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देकर रोजगार बढ़ाया जा सकता है। गांवों में सरकारी योजनाओ को जमीनी स्तर पर लागू करना होगा।
-मंगल जाल, रायपुर, छत्तीसगढ़
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स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जाए
सम्पूर्ण देश आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। देश की वर्तमान स्थिति अत्यंत ही चिंताजनक है। कौशल शिक्षा को बढ़ाने देने का प्रयास किया जाए, जिससे युवाओं को रोजगार सृजित करने के अधिक अवसर प्राप्त हो सकें। हर पंचायत मुख्यालय पर फैक्ट्री खोली जाए। गांवों और कस्बों में रोजगार बढ़ाने का एकमात्र तरीका है बेरोजगारों को ऋण दिया जाए। लघु व कुटीर उद्योगों को प्राथमिकता दी जाए, जिससे व्यापक रूप से बेरोजगारी की समस्या को दूर कर सकते हैं।
-डॉ. सरला बैरवा, सांगानेर, जयपुर
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कृषि को बढ़ावा दिया जाए
गांवों में होने वाली स्थानीय उपज, वन औषधियां की उपलब्धता के आधार पर लघु उद्योगों पर जोर दिया जाना चाहिए। कृषि को बढ़ावा देने के लिए गांव और कस्बों में बजट का प्रावधान हो। युवाओं को रोजगार देने के लिए उनकी दक्षता, क्षमता के आधार पर उनको जीविकोपार्जन के लिए विभिन्न दस्तकारी कौशल का प्रशिक्षण देकर रोजगार से आसानी से जोड़ा जा सकता है। कृषि, शिक्षा एवं स्थानीय दक्षता कौशल के लिए पर्याप्त रणनीति बनाकर गांव और कस्बों में रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।
-सतीश उपाध्याय, मनेंद्रगढ़ कोरिया, छत्तीसगढ़
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जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत
भारत में बढ़ती बेरोजगारी का प्रमुख कारण बढ़ती जनसंख्या है। जनसंख्या जिस गति से बढ़ रही है, रोजगार के अवसर उसी गति से कम हो रहे हैं। बड़े-बड़े उद्योगों के कारण लघु एव कुटीर उद्योग-धन्धे समाप्त हो गए हैं, जिसके कारण गांवों के लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं। सरकारी उदासीनता के कारण खेती की हालत अत्यंत दयनीय है। खेतीहर मजदूर और किसान अब बेरोजगार होकर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। निजीकरण को प्रोत्साहन देने के कारण सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर समाप्त हो रहे हैं। निजी कंपनियां कम्प्यूटर को बढ़ावा देकर लोगों की छंटनी कर रही हैं। व्यापक भ्रष्टाचार के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ सम्बन्धित व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा है। बढ़ती बेरोजगारी पर नियंत्रण के लिए जनसंख्या के दबाव को कम करने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता है।
-सुरेश चन्द्र, कोटा
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बेरोजगारों को ऋण दिया जाए
गांवों और कस्बों में स्थानीय वस्तुओं से निर्मित उत्पादों को बढ़ावा दिया जाए। सभी सरकारी कार्यालयों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करना चाहिए। बेरोजगारों को शून्य ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराया जाए, जिससे वे अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकें।
-आलोक वालिम्बे, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
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कृषि पर ध्यान देना होगा
गांवों में आज भी कृषि आय का मुख्य साधन है। इसलिए जरूरी है कृषि पर विशेष ध्यान देने की। कृषि पर आधारित उद्योग लगाने से रोजगार बढ़ेगा। लघु और कुटीर उद्योग रोजगार के सबसे अच्छे साधन माने जा सकते हैं। ये सबसे ज्यादा रोजगार सृजन करते हैं।
-साजिद अली, चंदन नगर, इंदौर
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हथकरघा को प्रोत्साहन दिया जाए
हथकरघा को बढ़ावा देना चाहिए। इस समय असंगठित क्षेत्र की महिलाएं भी प्रभावित हुई हंै। उनको प्रशिक्षण देकर काम लायक बनाया जा सकता है। घर पर ही महिलाएं मसाले बना सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भंडारण केंद्र, वेयरहाउस और खाद्य प्रसंस्करण केंद्र खोले जाएं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जो रोजगार का भार पड़ा है उसके लिए दीर्घकालीन योजनाएं बनाने की आवश्यकता है। हमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना होगा।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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ऑर्गेनिक उत्पादों की बढ़ी मांग
कोरोना के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की संभावना बढ़ गई है। लोग प्राकृतिक उत्पादों के महत्व को जानने के साथ अपनाने भी लगे हैं। ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग बढ़ रही है। इस क्षेत्र में रोजगार की संभावना बढ़ रही है।
-शुभम् दुबे, इंदौर, मप्र