
आपकी बात, भारत में खेल प्रतिभाओं को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है?
कुशल कोच से ही परिणाम आएंगे
हमारे देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं, पर वे प्रतिभाएं अपने शहरों में ही अपने इर्द-गिर्द के लोगों से खेलकर ही समाप्त हो जाती हैं। केवल प्रतिभा होने मात्र से ही विश्व की प्रतियोगिताओं में मेडल नहीं जीते जा सकते। खेल में तकनीक, सही व्यायाम, सही खान-पान, सही समय पर सही फैसले लेना आदि अनेक कारक हैं, जो एक खिलाड़ी को प्रतियोगिता में विजयी बनाते हंै। यह सब एक कुशल कोच ही सिखा सकता है। हर खेल के लिए खेल अकादमी बनाकर उसमें बेहतरीन व योग्य कोचों की नियुक्ति कर देश के हर शहर में उन्हें नियुक्त किया जाए। ये कोच देश की हर प्रतिभा को इतना निखार देंगे कि वे आसानी से दुनिया की प्रतियोगिताएं जीत सकेंगे। मीडिया भी देश के बेहतरीन कोचों व बेहतरीन खिलाड़ियों को प्रचारित करे, ताकि वे ब्रांड नेम बन सकें और उन्हें प्रायोजक भी मिल सकें। प्रायोजक मिलेंगे तो ये कोच भी अपने स्तर पर देश में बेहतरीन खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करने लगेंगे, जिसमें भाग लेकर खिलाड़ी दुनिया की प्रतियोगिताएं जीतने के लिए तैयार हो जाएंगे। इसके अलावा स्कूलों में भी विभिन्न खेलों के कोच नियुक्त किए जाने चाहिए।
-संजय पाटोदी, कोटा
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क्रिकेट की तरह हर खेल का विकास हो
भारत मे खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए दीर्घकालीन नीतियां बनाने पर ध्यान देना चाहिए। देश में जिस प्रकार क्रिकेट का विकास हुआ है, वैसे ही अन्य खेलों को भी प्रोत्साहन देने की जरूरत है। प्रत्येक गांव और शहर में स्थानीय निकायों को विभिन्न खेलों के मैदान की व्यवस्था करनी चाहिए। सरकारों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों और पूंजीपति वर्गों को भी स्पोर्ट्स क्लब बनाकर खेलों को आगे बढ़ाना चाहिए। सरकार को बजट का एक हिस्सा खेलों के लिए भी रखना चाहिए। क्रिकेट में आइपीएल के जैसे अन्य खेलों के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा टूर्नामेंट आयोजित करना चाहिए। सरकार को खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स किट उपलब्ध कराकर और ग्रामीण स्तर से ही प्रोत्साहन पुरस्कार देकर विभिन्न तरह से खिलाडिय़ो की आर्थिक मदद करनी चाहिए। टोक्यो ओलम्पिक में भारत के इतिहास में अब तक की सबसे शानदार प्रदर्शन ने जता दिया है कि भारत जैसे विशाल देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, कमी है तो बस दृढ़ इच्छाशक्ति की। ओलंपिक में भारत से कई गुना छोटे देश पदक तालिका में शीर्ष पर हैं, तो भारत जैसा विभिन्नताओं से भरा देश पदक तालिका में शीर्ष पर क्यों नहीं आ सकता है।
-जितेन्द्र लक्षकार, बोरुंदा, जोधपुर
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लैंगिक भेदभाव भी दूर करें
भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। साहस, संयम, एकाग्रता और दृढ़ निश्चय से भरे हुए युवा खिलाड़ियों को थोड़े से प्रोत्साहन और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करनी होगी। इस दिशा में कुछ प्रयास कर हम उन्हें प्रोत्साहित कर खेलों में देश की दिशा और दशा बदल सकते हैं। साथ ही खेलों में लैंगिक भेदभाव को दूर करना भी बहुत जरूरी है। महिला कोचों का अभाव तथा ग्रामीण स्तर पर खेलों से संबंधित आधारभूत ढांचे की कमी आज भी साफ दिखाई दे रही है। पंचायतों तथा ग्राम पंचायत को इस दिशा में प्रयत्न करना चाहिए। इस दिशा में समाज के समृद्धि प्रबुद्ध जनों को भी आगे आना चाहिए।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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हर स्तर ध्यान दिया जाए
भारत देश की प्रत्येक तहसील में समस्त खेलों के स्थाई प्रशिक्षक नियुक्त किए जाएं। प्रत्येक तहसील में स्टेडियम निर्माण पर ध्यान दिया जाए। खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाए। प्रत्येक ग्राम पंचायत में समस्त खेलों के अस्थाई प्रशिक्षक लगाए जाएं एवं समस्त प्रशिक्षकों के लिए परिणामों के आधार पर इनाम राशि तय की जाए। देश में समस्त खेलों में प्रतिभा खोज कार्यक्रम निरंतर चलाया जाए। प्रत्येक जिले में समस्त खेलों के जिला खेल संघ एवं प्रत्येक राज्य में राज्य खेल संघ के गठन की अनिवार्यता कर दी जाए। समस्त खेल संघों एवं समस्त खेल अकादमियों के बीच सामंजस्य भी जरूरी है।
-महेन्द्र लूणीवाल, सीकर
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प्रतिभाओं को उभारने की आवश्यकता
भारत में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। अगर हम थोड़ी सी और मेहनत का प्रयास करें तो भारत में खेल प्रतिभाओं को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के साथ उन्हें उचित कोच और एक मजबूत प्रशिक्षण की आवश्यकता है। जिस प्रकार देश में क्रिकेट का विकास हुआ है, वैसे ही सरकार को अन्य खेलों के प्रति ध्यान देना होगा। सरकार को प्रतिभाओं को उभारने के लिए दीर्घकालीन नीति पर विचार करना चाहिए, अगले ओलंपिक में हमारे खिलाड़ी और बेहतर प्रदर्शन करके देश का मान बढ़ाएं। बहुत से खिलाड़ी आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण खेल के प्रति ध्यान नहीं दे पाते हैं। ऐसे में सरकार को इन प्रतिभाओं आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए।
-नीलिमा जैन, उदयपुर
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गांवों में प्रशिक्षण केन्द्र खोले जाएं
गांवों में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन योग्य प्रशिक्षक, स्टेडियम और सुविधापूर्ण प्रशिक्षण केन्द्रों के अभाव में कई खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को सामने लाने में असमर्थ रह जाते हैं। शहर के प्रशिक्षण केन्द्रों तक प्रतिदिन जाना उन खिलाड़ियों के लिए संभव नहीं होता है, क्योंकि इससे उनका काफी समय बर्बाद होता है। शहर के प्रशिक्षण केन्द्रों की फीस भी अधिक होती है, जिसकी वजह से गांव में रहने वाले खिलाड़ी वहां नियमित रूप से रह नहीं पाते हैं। अत: गांवों में भी संबंधित खेलों के प्रशिक्षण केन्द्र खोले जाएं, ताकि उनके समय की बचत हो सके और वे अपना पूरा ध्यान अभ्यास दे सकें।
-विभा गुप्ता, बैंगलुरु
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स्कूली शिक्षा में खेल हो अनिवार्य
स्कूली शिक्षा के साथ खेल अनिवार्य कर देना चाहिए। अच्छा प्रदर्शन करने पर स्कूली स्तर से लेकर आगे तक पुरस्कारों का वितरण हो, जिससे खिलाड़ियों का प्रोत्साहन मिले। सरकार को समय-समय पर ग्रामीण, जिला एवं राज्य स्तर पर बड़ी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाना चाहिए।
-अजय सिंह सिरसला, चुरू
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प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाए
हमारे देश में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए एक व्यापक अभियान चलाना होगा। गांवों, कस्बों और शहरों से खेल प्रतिभाओं को छांटा जाए। फिर इन खिलाडिय़ों को कुशल कोच से ट्रेनिंग दिलानी होगी। खिलाड़ियों के लिए रहने-खाने की अच्छी व्यवस्था करनी होगी।
-महेश सक्सेना, भोपाल, मप्र
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खेल संघों पर मठाधीशों का कब्जा
भारत में खेल प्रतिभाओं को आगे ले जाने का एक ही मार्ग है खेल संघ के पदों से राजनीति से जुड़े लोगों को हटाएं। ऐसे लोगों को पद पर बैठाया जाए, जिन्होंनेे कभी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय खेलों में भाग लिया हो, लेकिन यहां तो नेताओं के चमचों की भरमार है। खिलाड़ियों ने अपने दम पर मेडल जीते हैं। इसमें सरकारों का खास योगदान नहीं है। अगर खेलों में सुधार चाहिए, तो खेल संघों पर बैठे मठाधीशों बाहर का रास्ता दिखाना होगा।?
-अब्दुल रहीम, राजनांदगांव, छत्तीसगढ़
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किसे बनाएं खेल मंत्री
भारतीय खेलों को सुधारने के लिए सरकार को उसी नेता को खेल मंत्री बनाना चाहिए, जिसने राष्ट्रीय स्तर या अंतरराष्ट्रीय स्तर की किसी खेल प्रतियोगिता मेें भाग लिया हो। इस तरह का कोई नेता नहीं जीत कर आए, तो पहले संबंधित नेता को खेल के बारे मे जानकारी देनी चाहिए। भ्रष्ट नेताओं को खेल मंत्री न बनाएं
-सोनू गुर्जर , अजमेर
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विद्यार्थियों को खेलने के लिए प्रेरित करें
खेल से शारीरिक ताकत के साथ-साथ मानसिक मजबूती भी मिलती है। खेल से बच्चों को आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद भी मदद मिलती है। खेलों के माध्यम से ही छात्र अधिक सकारात्मक बनते हंै और चुनौतियों का सामना करना भी सीख जाते है। इसलिए विद्यार्थियों को खेलने के लिए प्रोत्साहित करें और अच्छा प्रदर्शन करने पर पुरस्कृत भी करें ।
-प्रिया राजावत, जयपुर
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खेल को बनाएं पाठ्यक्रम का हिस्सा
खेल से शारीरिक और मानसिक दोनों ही प्रकार का विकास होता है। इसीलिए खेलों के प्रति बच्चों में रुचि जागृत करना चाहिए। विद्यालय पाठ्यक्रम में भी खेल को शामिल किया जाना चाहिए, जिससे बच्चे पढाई के साथ-साथ खेल को भी जान सकें। इसका असर यह होगा कि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे।
-रेवत सिंह वापा, सांचोर
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खिलाड़ियों को मिले अतिरिक्त अंक
भारतीय खेल प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए खेल से नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। जो सच में खिलाड़ी रहे हों या खेलों के विकास में रुचि रखते हों, उन्हें खेल संघों में जगह दी जानी चाहिए। साथ ही प्राथमिक स्तर से ही प्रत्येक विद्यालय में खेल अनिवार्य हो तथा सरकार की तरफ से खेल में इनाम जीतने वाले विद्यार्थी को परीक्षा मे अतिरिक्त अंक दिए जाएं।
-अजयेन्द्र सिंह सुवाणा, भीलवाड़ा
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भ्रष्ट चयनकर्ताओं पर अंकुश की जरूरत
भारत में खेल प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया से भ्रष्ट चयनकर्ताओं को दूर करना चाहिए। खिलाड़ियों का ईमानदारी से चयन हो। यह सुनिश्चित करना होगा कि सिफारिश के आधार पर चयन नहीं होगा, ताकि असली प्रतिभाएं आगे जाकर सम्पूर्ण देश का गौरव बढ़ाए।
-जेठाराम भादु(बावड़ी), जोधपुर
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स्कूली स्तर पर खेल सुविधाएं बढ़ाई जाएं
भारत में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए हमें स्कूली स्तर से ही खेल सुविधाओं पर ध्यान देना होगा। अभाव के कारण कई ऐसी विलक्षण प्रतिभाएं कुछ नहीं कर पातीं। विद्यालय स्तर से ही उनकी क्षमता को पहचान कर उन्हें हर वह सुविधा मिले, जो एक अच्छे खिलाड़ी के लिए आवश्यक होती है।
-गजेन्द्र नाथ चौहान, राजसमंद
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न हो भेदभाव
भारत में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए समय-समय पर राज्य स्तर और जिला स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन होना चाहिए। इससे नए खिलाड़ी भी आगे बढ़ सकेंगे। खेल प्रतियोगिताओं के लिए चयन मेें भेदभाव नहीं होना चाहिए।
-निरमा खोजा, अजमेर
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बच्चों को खेलने के लिए प्रेरित किया जाए
वर्तमान समय में हर अभिभावक अपने बच्चों को केवल पढ़ाई में ही अव्वल देखना चाहते हैं। अभिभावक भी अपने बच्चों को खेलने के लिए भी प्रेरित करें। सरकार भी खेलों के प्रति बच्चों को जागरूक करे और उनको प्रशिक्षण दे।
-सुरेंद्र बिंदल, जयपुर
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मोबाइल गेमिंग कम करें
भारत में खेल प्रतिभाओं को बढ़ाने के लिए सबसे पहले तो ये मोबाइल गेमिंग कम कर, फिजिकल गेमिंग को बढ़ावा देना होगा। स्कूलों व समाज में भी बच्चों के लिए खेलो का आयोजन होना चाहिए।
-मयंक सिंगारिया, बीकानेर
Published on:
09 Aug 2021 05:25 pm
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