20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आपकी बात, पुलिस जनता का विश्वास कैसे जीत सकती है ?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

3 min read
Google source verification

image

Gyan Chand Patni

Feb 12, 2021

आपकी बात, पुलिस जनता का विश्वास कैसे जीत सकती है ?

आपकी बात, पुलिस जनता का विश्वास कैसे जीत सकती है ?

अविश्वास की खाई पाटने के प्रयास जरूरी
आजादी के सात दशक बाद भी देश में आम नागरिकों और पुलिस विभाग के बीच दूरी बनी हुई है। कारण चाहे जो भी हो, लेकिन एक स्वस्थ लोकतंत्र में आम नागरिक और पुलिस के बीच ऐसी दूरी उचित नहीं कही जा सकती। हालांकि अविश्वास की इस खाई को पाटने का प्रयास हुआ है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। पुलिस को सिटिजन फ्रेंडली सिस्टम अपनाना होगा, तब ही पुलिस जनता का विश्वास जीत सकती है।
-अखिलेश कुमार गुप्ता, बाटोदा, सवाई माधोपुर
...........................

पुलिस कर्मियों को मिले आवश्यक साधन
पुलिस को जब भी अपराधियों के बारे में सूचना मिले, तब वह तत्काल उनकी मौके पर जाकर धरपकड़ करे, लेकिन सूचना देने वाले के बारे में किसी को भी जानकारी न दे। एफआइआर आसानी से दर्ज होनी चाहिए। यह भी ध्यान रखना होगा कि पुलिसकर्मी भी हमारी तरह ही इंसान हैं। जब तक उनको पर्याप्त साधन- सुविधाएं नहीं मिलेंगी, वे ठीक तरह से कैसे काम कर पाएंगे। इसलिए पुलिस विभाग की जरूरतों को पूरा करने में बजट की कमी नहीं आनी चाहिए, ताकि पुलिसकर्मी ठीक तरह से काम कर सकें और जनता का विश्वास जीत सकें।
-सुनील कुमार माथुर, जोधपुर
............................................

बिगड़ती कानून व्यवस्था
पुलिस की लचर कार्यप्रणाली के कारण ही आज देश की कानून व्यवस्था नाजुक दौर में है। पुलिस आमजन से ज्यादा मंत्रियों की सेवा में व्यस्त रहती है। आज देश में आपराधिक घटनाओं और भ्रष्टाचार बढऩे का एक कारण पुलिस की गलत कार्यप्रणाली है। इसी वजह से जनता में पुलिस की छवि खराब हुई है। आपराधिक घटनाओं पर लगाम कसने के लिए पुलिस को सबसे पहले अपनी छवि सुधारनी होगी और आमजन के बीच अपनी विश्वसनीयता बढ़ानी होगी।
-राजेश कुमार चौहान, जालंधर
................................

सतत संवाद जरूरी
जनता का विश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी पूंजी है। इस विश्वास को बनाए रखने के लिए विश्वसनीयता एवं पारदर्शिता रूपी मजबूत ढांचागत अवसंरचना विकसित करनी होगी। साथ ही पुलिस को स्थानीय समुदाय से जोडऩे के लिए तकनीकी व्यवस्था पर जोर देना होगा। आम जनता के साथ सतत संवाद तथा समन्वय स्थापित कर विभाग की छवि सकारात्मक बनाई जा सकती है।
- सुभाष जाँगिड़, हरमाड़ा, जयपुर
.............................................

जरूरी है कर्तव्य निष्ठा और ईमानदारी
वर्तमान समय अराजकता, हिंसा और सांप्रदायिकता का बोलबाला है। आम आदमी अपने बचाव के लिए गुहार करे तो किससे करे, क्योंकि पुलिस पर भरोसा नहीं रहा। इसलिए पुलिस को अपनी छवि में सुधार करना ही होगा। पुलिस जनता को विश्वास दिला सकती है कि वह आम जन के साथ है। पुलिसकर्मी कर्तव्य निष्ठा और ईमानदारी से आम जनता का दिल जीत सकते है।
-रेनू गुप्ता, सवाई माधोपुर
....................................

अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जनता के विश्वास को जीतना अति आवश्यक होता है। इस भरोसे को कायम करने के लिए समाज में होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक, सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में पुलिसकर्मियों को भी भाग लेना चाहिए। अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करके पुलिस जनता का विश्वास जीत सकती हैं।
-नरेश सुथार, बीकानेर
.................................

सरकार का अनुचित रवैया
पुलिस समाज में व्याप्त अपराधों और भ्रष्टाचार को नियंत्रित कर हर व्यक्ति की सुरक्षा को सुनिश्चित करे। इससे लोगों में पुलिस के प्रति विश्वास पैदा होगा। जब पुलिस का दुरुपयोग सरकार स्वयं के हित साधन में करती है, तब समस्या बढ़ जाती है। यह प्रवृत्ति बदलनी जरूरी है।
-रक्षित परमार , उदयपुर
.....................................

भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जरूरी है कार्रवाई
चंद पुलिस अधिकारियों के गलत व्यवहार के कारण पुलिस पर से जनता का विश्वास उठ रहा है। जनता का विश्वास जीतने के लिए पुलिस विभाग को भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी। पुलिसकर्मियों को अपने क्रोध पर नियंत्रण करके जनता के साथ नम्रतापूर्ण व्यवहार करना चाहिए, ताकि जनता उनको अपना दोस्त माने। पुलिसकर्मी जनता के बीच अमीर- गरीब का भेदभाव न करें।
-विभा गुप्ता, बेंगलूरु
......................

पीडि़त को शीघ्र मदद दी जाए
जरूरी यह है कि पुलिस निष्पक्ष और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करे। पुलिस का जनता के साथ व्यवहार मधुर हो एवं पीडि़त को समय पर मदद मिले। पुलिस जनता के बीच कार्यक्रम भी आयोजित करे।
-सतीश उपाध्याय मनेंद्रगढ़ कोरिया छत्तीसगढ़
...................

राजनीतिक दखल न हो
पुलिस और जनता का चोली दामन का साथ होता है। यदि दोनों ही जिम्मेदारी से अपने-अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, तो अपराधों में कमी भी आ सकती है। इसके लिए पुलिस को चाहिए कि वह अपराधियों के साथ कठोरता और आम जनता के बीच विनम्रता से पेश आए। सीएलजी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू की जाए तथा पुलिस के काम में राजनीतिक दखल नहीं हो। सेना की तरह पुलिस भी समाजोपयोगी कार्यों में अपनी सहभागिता और साझेदारी बढ़ाए ।
-ईश्वर जैन, उदयपुर