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Leadership: कैसे बढ़ा सकते हैं कार्यस्थल पर आध्यात्मिकता

महत्त्वपूर्ण यह समझना है कि इसकी शुरुआत स्वयं से ही हो सकती है। संगठनात्मक संस्कृति में परिवर्तन लागू करने में समय व प्रयास लगता है। प्रयास और प्रतिबद्धता से निश्चित ही लाभ मिलेगा। इस दिशा में यात्रा शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप खुद के नजरिए और मानसिकता को बदलें और फिर संगठन में आध्यात्मिकता की वृद्धि की ओर कदम बढ़ाएं।

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जयपुर

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Patrika Desk

Feb 12, 2023

Leadership: कैसे बढ़ा सकते हैं कार्यस्थल पर आध्यात्मिकता

Leadership: कैसे बढ़ा सकते हैं कार्यस्थल पर आध्यात्मिकता

प्रो. हिमांशु राय
निदेशक, आइआइएम इंदौर
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आध्यात्मिकता कार्यस्थल पर भी अत्यधिक महत्त्वपूर्ण होती है, यह तो हमने जान ही लिया है। निस्संदेह, आध्यात्मिक कार्यस्थल स्थापित करने में समय और धैर्य लगता है। लक्ष्यों को प्राप्त करने पर पूरा ध्यान लगाने के बजाय काम पर आध्यात्मिकता को बढ़ाने के लिए नियोक्ताओं को काम करने के तरीके में बदलाव करना चाहिए। अपने अध्ययन, ‘कार्यस्थल पर आध्यात्मिकता : एक अवधारणा और उपाय’ (2016) में डोंडे पी. एशमोस और डेनिस ड्युचॉन ने आध्यात्मिकता के तीन प्रमुख तत्वों का प्रस्ताव दिया, जो कार्यस्थल की आध्यात्मिकता को बढ़ाने की प्रक्रिया में एक लीडर का मार्गदर्शन कर सकते हैं - 1. प्रत्येक व्यक्ति के आंतरिक जीवन की स्वीकृति, जिसमें विचार, भावनाएं, दृष्टिकोण आदि शामिल हैं। 2. सभी कर्मचारियों को सार्थक कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए। 3. जिम्मेदारी की भावना और समुदाय के संदर्भ में काम करना।

सही दिशा में शुरुआत के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए -
उद्देश्य पर चिंतन: पहला कदम व्यवसाय के लिए स्पष्ट मिशन और उद्देश्य को परिभाषित और स्थापित करना है। ध्यान दें कि यह आपके उत्पादों और सेवाओं के माध्यम से ग्राहकों के लिए कैसे लाभकारी होगा। यहां लक्ष्य ऐसा उद्देश्य बनाना और संप्रेषित करना है जो समाज की भलाई के लिए हो, न कि केवल व्यक्तियों के लिए।
आत्म-जागरूकता का अभ्यास व प्रोत्साहन: यह दूसरों के साथ-साथ स्वयं को समझने का मूल घटक है। यह किसी भी समय एक व्यक्ति के आंतरिक जीवन के बारे में अधिक जागरूक होना है। ध्यान और माइंडफुलनेस के अभ्यास से यह संभव हो सकता है।
सहानुभूति: कार्यालय संस्कृति में अपने व दूसरों के प्रति सहानुभूति और करुणा के अभ्यास को बढ़ावा दें।
काम की सार्थकता: कर्मचारियों के लिए विकास और प्रगति के अवसरों में निवेश और टीमों के बीच मनोवैज्ञानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने से यह संभव है।
कर्मचारियों के बीच आपसी विश्वास और स्वामित्व की भावना का विकास: कार्यस्थल पर पारिवारिक माहौल, अपनेपन और स्वामित्व की भावना को बढ़ावा देने के लिए ईमानदार प्रतिक्रिया देने और प्राप्त करने, सहायता समूह बनाने, अनौपचारिक वार्तालापों को बढ़ावा देने जैसी प्रथाएं अपनाई जा सकती हैं।

महत्त्वपूर्ण यह समझना है कि इसकी शुरुआत स्वयं से ही हो सकती है। संगठनात्मक संस्कृति में परिवर्तन लागू करने में समय व प्रयास लगता है। प्रयास और प्रतिबद्धता से निश्चित ही लाभ मिलेगा। इस दिशा में यात्रा शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप खुद के नजरिए और मानसिकता को बदलें और फिर संगठन में आध्यात्मिकता की वृद्धि की ओर कदम बढ़ाएं।