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आपकी बात, पशु-पक्षियों के प्रति क्रूरता को कैसे रोका जा सकता है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Gyan Chand Patni

Jan 17, 2021

आपकी बात, पशु-पक्षियों के प्रति क्रूरता को कैसे रोका जा सकता है?

आपकी बात, पशु-पक्षियों के प्रति क्रूरता को कैसे रोका जा सकता है?

सामूहिक पहल की जरूरत
आजकल बहुतायत में पशु-पक्षियों के प्रति हिंसात्मक व्यवहार देखने में आ रहा है। नकारात्मक मनोरंजन, स्वाद लोलुपता के साथ ही धर्म के नाम पर भी पशु-पक्षियों की जान ले ली जाती है। इस तरह के कृत्यों को सामूहिक प्रयासों से रोका जा सकता है। समाज में जीवों के प्रति संवेदना जगाकर क्रूरतापूर्ण व्यवहार को कम किया जा सकता है। पशु-पक्षियों के प्रति क्रूरता रोकने के लिए कानून का अपना महत्त्व है, लेकिन सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना एवं सामूहिक पहल भी जरूरी है।
-डॉ.अमित कुमार दवे, खडग़दा, डूंगरपुर
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कथनी और करनी में अंतर
भारत में गाय को गौमाता के रूप में पूजा जाता है। जहां दया नहीं, वहां धर्म नहीं। जियो और जीने दो, अहिंसा परमो धर्म जैसे विचार देने वाले देश में पशु-पक्षियों के प्रति क्रूरता थमती दिखाई नहीं दे रही है। इससे यह स्पष्ट है कि हमारी कथनी और करनी में बहुत अंतर है। जहां भी निरीह प्राणियों को यातना देते हुए देखें , तो वहां समझा-बुझाकर तथा अंतिम हथियार के रूप में मामले की शिकायत कर इसको रोकने की पहल करें। नियम, कानून और दंड का प्रावधान तो है ही। कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है। दृढ़ इच्छा शक्ति एवं त्वरित कड़ी कार्रवाई भी आवश्यक है।
-भारती जैन, महारानी फार्म, जयपुर
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दया भावना की जरूरत
सर्वप्रथम आमजन को अपने मन में पशु-पक्षियों के प्रति दया की भावना जगानी चाहिए। पशु-पक्षियों के साथ क्रूरता करने पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। साथ ही आमजन भी ऐसे कृत्य करने वाले लोगो को रोके या प्रशासन से उनकी शिकायत करे।
-आशीष श्रीमाली, बीकानेर
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संवेदनशीलता की जरूरत
पशु-पक्षियों के प्रति क्रूरता कम करने का एक मात्र उपाय है, लोगों के मन में जीव दया का भाव पैदा करना। जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जीवों के प्रति संवेदनशील करने की महती आवश्यकता है। आमजन को पशु-पक्षियों का महत्त्व समझाना होगा।
-प्रवीण सैन, जोधपुर
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जरूरी है जन जागरूकता
पशु-पक्षी जैव विविधता के प्रमुख घटक है। इसके बाजवूद पशु-पक्षी इंसान की क्रूरता के शिकार हो जाते हैं। इसे रोकने के लिए कड़े कानून की जरूरत है। जन जागरूकता भी आवश्यक है। पशु-पक्षियों की पर्यावरण संरक्षण में उपयोगिता बताते हुए जगह-जगह पोस्टर लगाए जाएं। पशु-पक्षियों के प्रति क्रूरता बरतने वालों को दंडित किया जाए।
-सतीश उपाध्याय, मनेंद्रगढ़ कोरिया, छत्तीसगढ़
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करुणा भाव जरूरी
पशु पक्षियों के प्रति क्रूरता को मनुष्य अपनी करुणा और दया भावना से ही रोक सकते है। फिर भी यदि कोई क्रूरता दिखाता है, तो कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। पशु पक्षियों के महत्व को भी लोगों को समझाना चाहिए।
-रजनी शर्मा, सिविल लाइन्स, कोटा
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कानूनों का कठोरता से पालन करवाया जाए
पशु-पक्षियों के प्रति क्रूरता रोकने के लिए संबंधित कानूनों का कठोरता से पालन करवाना चाहिए। बढ़ती पशु हिंसा पर रोक लगाई जाए। चारागाह का संरक्षण किया जाए। आमजन में उनके प्रति दया पनपे। प्रशासन की निष्क्रियता से भी पशु-पक्षियों के प्रति कू्रता नहीं रुक रही।
-जे. डी. विश्नोई, बीकानेर
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कठोर सजा का हो प्रावधान
समाज में पशु-पक्षियों के प्रति क्रूरता बढ़ती जा रही है। अभी कुछ दिन पहले ही हथिनी को विस्फोटक पदार्थ खिलाकर मार देना जैसी घटनाएं समाज को कलंकित करने वाली है। अच्छा तो यह है कि इन बेजुबान पशु-पक्षियों को इनके प्राकृतिक आवास में ही रहने दिया जाए। आवश्यकता इस बात की है कि जो भी इन बेजुबानों के साथ क्रूरता करता है, उसे कठोर सजा दिलाने के प्रयास किया जाएं।
-धर्मचन्द भगत, कुचामन सिटी
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कानूनों के बारे में जानकारी नहीं
पशु-पक्षियों के संरक्षण के लिए बने कानूनों का प्रचार ना होने और जागरूकता के अभाव में उनके प्रति क्रूरता नहीं रुक पा रही। लोगों में पशु-पक्षियों के प्रति दया का भाव विकसित करना चाहिए। पशु-पक्षियों के साथ कू्र बर्ताव करने वालों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है।
-अर्विना, नोएडा
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सक्रियता दिखाए सरकार
पशु-पक्षियों का उत्पीडऩ कोई नई समस्या नहीं है। मानव अपने स्वार्थ के लिए पशु-पक्षियों का उपयोग सदियों से करता आ रहा है। उपयोगी होने के बावजूद भी मानव पशुओं के प्रति क्रूर व्यवहार करता है। ऐसे मामलों में सरकार एवं प्रशासन को सक्रियता दिखानी चाहिए।
-अमृतलाल आचार्य, नागौर
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क्षमता से अधिक बोझ न लादें
लोगों को पशु-पक्षियों के प्रति दया भाव रखने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। किसी भी पशु पर क्षमता से अधिक बोझा लादने वालों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है। मूक प्राणियों के वध को रोका जाना भी आवश्यक है। साथ ही जख्मी जानवरों के इलाज की भी व्यवस्था जरूरी है।
-डॉ. राजेंद्र कुमावत, चिराना, झुंझुनूं
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बच्चों को प्रकृति से जोड़े
बच्चों को बचपन से ही प्रकृति और जानवरों के प्रति वात्सल्यपूर्ण संस्कार दिए जाएं। उन्हें प्रकृति के साथ जीना सिखाया जाए, ताकि बच्चों में पशु-पक्षियों के प्रति स्नेह की भावना उत्पन्न हो। इससे निश्चित रूप से पशुओं के प्रति क्रूरता पर अंकुश लगेगा।
-नरेश नाथ ,लूनकरनसर, बीकानेर