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सवाल कैसे रुकें छेड़छाड़ की घटनाएं, जवाब जरूरी है विरोध

पत्रिकायन पर पूछे गए सवाल पर लोगों ने दी अपनी राय, पेश हैं चुनिंदा राय

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पडोसी जंगल में युवती से करने लगा गन्दी हरकत, मां ने देखा तो उड़ गए उसके होश...

पडोसी जंगल में युवती से करने लगा गन्दी हरकत, मां ने देखा तो उड़ गए उसके होश...

बदलनी होगी मानसिकता
देश में नारी जाति के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं आम हो गई हैं। ऐसा काम बीमार मानसिकता के लोग करते हैं। यह समाज छेड़छाड़ मुक्त हो, इसके लिए हम सब को मिल कर इस मानसिकता से लडऩा होगा। ऐसी बीमार मानसिकता वाले लोगों को पहले तो समझाना होगा। उनकी मानसिकता बदलने पर जोर देना होगा। उन्हें समझाना होगा कि नारी के बिना समाज का अस्तित्व नहीं है। उन्हें नारी का सम्मान करना सिखाना होगा। नारी मां है, नारी बहन है। जिस प्रकार हम अपनी मां-बहनों का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार दूसरों की मां-बहनों का भी सम्मान करना आवश्यक है। मानसिकता में बदलाव से छेड़छाड़ के मामलों में कमी लाई जा सकती है।
-निखिल गुप्ता, गढ़, रीवा, मध्यप्रदेश

जरूरी है विरोध
छेड़छाड़ जैसी घटनाओं को सामान्य मान लेने की सोच भविष्य में काफी खतरनाक साबित हो सकती है। ये घटनाएं लड़कियों और महिलाओं की सार्वजनिक मौजूदगी को कम करती है। लोगों को व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर गलत चीजों का विरोध करना चाहिए। छेड़छाड़ कर रहे लोगों को टोकना चाहिए। इससे काफी हद तक इन घटनाओं पर अंकुश लग सकता है। गाया जा सकता है।
-मोहित कुमावत, सुरधना चौहान, बीकानेर

चुस्त और भड़कीले परिधान न पहनें।
चुस्त और भड़कीले परिधान छेड़छाड़ को बढ़ावा देते हैं। महिलाओं को सुंदर दिखने का प्रयास करना चाहिए, सेक्सी दिेखने का नहीं। नारी आज भी अपने को अबला समझती है। नारी की दुर्बलता भी छेड़छाड़ को प्रोत्साहित करती है। नारी को छेड़छाड़ की घटनाओं का डटकर मुकाबला करना चाहिए।
-श्रीमती सुभाषिणी शुक्ला, सोहागपुर, होशंगाबाद, मध्यप्रदेश

आात्म रक्षा के गुर सीखें
कई बार छेड़छाड़ और शोषण का शिकार महिला वर्ग को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। बेहतर तो यह है कि इस तरह के मामलों में समाज, परिवार व प्रशासन को लड़कियों का साथ देना चाहिए, ताकि इन घटनाओं को कम किया जा सके। लड़कियां निडर व स्वाभिमानी बनने का प्रयास करें। लड़कियों को आत्मरक्षा के गुर सीखने चाहिए, ताकि समय आने पर अपनी रक्षा कर सके।
-रुप सिंह, रेणी, अलवर

घर से करें शुरुआत
लड़कियों को लड़कों से कमतर न समझें। इसके लिए पितृसत्तात्मकता युक्त सोच को बदलने की जरूरत है। इसकी बेहतर शुरुआत घर से ही हो सकती है। घर में लड़के-लड़की में भेदभाव न करें।
-रेयांश अग्रवाल, भरतपुर

सीसीटीवी हैं मददगार
नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देकर छेड़छाड़ के मामलों को कम किया जा सकता है। अगर फिर भी कुछ समाजकंटक नहीं मानते हैं, तो उनको कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमारे लगाएं जाएं।
-राकेश राजस्थानी, श्री गंगानगर

ज्यादा से ज्यादा लड़कियां बाहर निकलें
छेड़छाड़ की घटनाएं रोकने के लिए कई स्तरों पर काम करना होगा। घर की बेटियों के साथ-साथ बेटों को भी संस्कार दिए जाएं। बहन-बेटियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया जाए, जिससे वह हर परिस्थिति में लड़ सके। घर वालों को चाहिए कि बाजार के काम बेटों के साथ-साथ बेटियों को भी करने दें। इससे उनका मनोबल बढ़ेगा।
-डॉ. मीनू पूनिया, वैशाली नगर, जयपुर

अश्लील सामग्री पर अंकुश लगे
देश के विभिन्न भागों में छेड़छाड़ की घटनाओं के आंकड़े ही बढ़ते जा रहे हैं । इन सब पर प्रभावी नियंत्रण करने के लिए प्राथमिक आवश्यकता यही है कि पुरुष वर्ग को अपनी कुत्सित, अमानवीय और घटिया मानसिकता का त्याग करना होगा। टीवी, मोबाइल और इंटरनेट पर अश्लील सामग्री पर अंकुश लगाया जाना चाहिए।
-प्रभु दयाल, रायसिंहनगर, श्री गंगानगर
परिवार है जिम्मेदार
ऐसी हिंसक घटनाओं के लिए घर परिवार के संस्कार ज्यादा जिम्मेदार है। यदि प्रत्येक अभिभावक प्रारंभ से ही अपने बेटों को महिलाओ के सम्मान की शिक्षा दे, तो छेड़छाड़ की घटनाएं कम हो सकती हैं।
-सत्या पांडेय,बिलासपुर, छत्तीसगढ़


मानसिक विकार
आए दिन हो रही छेड़छाड़ की घटनाओं पर रोक लगाना अति आवश्यक है। इन घटनाओं की शिकायत दर्ज होने पर पुलिस त्वरित कार्रवाई करे। आरोपियों की जमानत न हों। अभिभावकों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को नैतिक मूल्यों से अवगत कराएं। अपने बच्चों के उचित-अनुचित व्यवहार पर ध्यान दें। किसी को भी अकारण परेशान करना एक मानसिक विकार है। अत: आवश्यक हो तो मनोवैज्ञानिक सलाह लेने में देर नहीं करना चाहिए।
-विभा गुप्ता, बैंगलुरु

नैतिक मूल्यों पर ध्यान देने का समय
हर दिन छेड़छाड़ की घटनाएं हो रही है। इसका अर्थ है कि अपराधी बेखौफ हैं। सजा के प्रावधान सख्त करने के साथ-साथ विद्यालयों में नैतिक मूल्यों के प्रति आस्थावान पीढ़ी तैयार की जाए, तो छेड़छाड़ की घटनाओं में कमी आ सकती है। लड़कियों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए आत्मरक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा। बेटियों को इतना मजबूत तो बनाया ही जाना चाहिए कि वह गलत का सामना मजबूती के साथ कर सकें। अपराध के खिलाफ लड़ सकें। लोग लड़कियों के प्रति अपनी मानसिकता भी बदलें। आखिर, लड़कियां वस्तु नहीं, इंसान हैं। नारी को देवी और शक्ति के रूप में पूजने वाले देश में छेड़छाड़ की घटनाएं रुकनी ही चाहिए।
-डॉ. राजेंद्र कुमावत, जयपुर

सभी महिलाओं को सम्मान दें
लोग यदि दूसरों की मां-बहनों का सम्मान भी अपनी मां-बहन की तरह ही करें, तो हालात बदल सकते हैं। इसके साथ ही कुछ दूसरे पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा। हमारे देश की महिलाएं पश्चिमी पहनावे का अनुकरण करने लगी हैं, जो देश में छेड़छाड़ के कारणों में से एक है। इसलिए महिलाओं को अपने पहनावे पर भी ध्यान देना चाहिए। कहीं न कहीं महिलाओं का विनयशील व्यवहार भी उनके लिए मुश्किल पैदा करता है। इसलिए समय आने पर कठोर व्यवहार भी आवश्यक है। नारी को आत्मनिर्भर भी बनना होगा।
-सुधांशु कुमार पाण्डेय,सीधी मध्यप्रदेश।

दोषियों को कठोर सजा मिले
हमारा देश भारत जैसे-जैसे विकसित देश की दिशा में बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यहां छेड़छाड़ की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिस पर प्रभावी नियंत्रण अत्यंत आवश्यक हो गया है। लड़कियों एवं महिलाओं को अकेला आने-जाने से बचना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे। छेड़छाड़ के दोषियों को कठोर सजा देना भी आवश्यक है।
सुरेश दीवान, रायपुर,छत्तीसगढ़


गलत संगत का प्रभाव
छेड़छाड़ की समस्या नई नहीं है। इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। गलत संगत का प्रभाव, माता पिता द्वारा उचित संस्कार नहीं देना और इंटरनेट पर परोसे जाने वाली अश्लीलता ने युवाओं की मानसिकता विकृत कर दी है। जब कोई बात ढक कर रखी जाती है, तो उसे जानने की सबको लालसा रहती है। सेक्स का ज्ञान भी छिपा कर रखा गया। इससे नवयुवकों में दूषित मानसिकता घर कर जाती है, जिससे छेड़छाड़ और नारी उत्पीडऩ की गंभीर घटनाएं सामने आती हैं।
-अरुण भट्ट, रावतभाटा, राजस्थान

महिलाओं का सम्मान करना सिखाएं
छेड़छाड़ पूर्णतया तभी रुक सकती है जब हम अपने बच्चों को खासतौर पर लड़कों को बचपन से ही महिलाओं का सम्मान करना सिखाएं।् हर नेक काम की शुरआत घर से ही की जानी चाहिए। ् साथ ही हमारे कानून में भी छेड़छाड़ जैसी घटनाओ में सख्त सजा के प्रावधान जोड़े जाने चाहिए।
-संदीप कुमावत, जयपुर

बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार भी दें
छेड़छाड़ की घटनाओं पर अंकुश सरकार नहीं लगा सकती। यह काम तो संस्कार ही कर सकते हैं। इसलिए अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा जरूर दें, साथ-साथ नैतिक शिक्षा का भी ज्ञान दें।
-विशाल मीणा, श्योपुर मध्यप्रदेश

तेजी से हो सुनवाई
महिलाओं के विरूद्ध होने वाले विभिन्न अपराधों के मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। वर्तमान कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। महिलाओं से सम्बधित मामलों की रिपोर्ट, जांच एव न्यायालयी सुनवाई जहां तक सम्भव हो महिला पुलिस अधिकारी, महिला डॉक्टर एवं महिला न्यायाधीशो द्वारा ही की जानी चाहिए। पुलिस एवं प्रशासनिक मशीनरी को मजबूत बनाने आवश्यकता है। शासन के सभी स्तरो पर उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। महिलाओं का यौन उत्पीडऩ रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर ज्यादा कार्य करने आवश्यकता है।
-एडवोकेट मांगीलाल विश्नोई, फलोदी,जोधपुर

घटती नैतिकता और विकृत मानसिकता
छेड़छाड़ की मुख्य वजहों में से एक है पुरुषों में घटती नैतिकता और विकृत मानसिकता। हमें इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए कानून को और भी ज्यादा सख्त बनाने की जरूरत है। साथ ही साथ हमें इस प्रकार की सोच को विकसित करने की जरूरत है कि लड़कियों को कमजोर ना समझें।
-शशि कांत कुम्भज,भरतपुर

शोषण सहन न करें महिलाएं
देश में आए दिन महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा, छेड़छाड़ व दुष्कर्म की घटनाएं समाज के लिए चिंताजनक हैं। ऐसी घटनाओं को घटिया मानिसकता वाले व हवस के भूखे लोग अंजाम देते हैं। इन लोगों को ऐसी हरकतें करने से पूर्व अपनी मां, बहन, पत्नी और बेटी के बारे में सोचना चाहिए। अगर वे सम्मानीय हैं, तो दूसरी महिलाएं भी अपना सम्मान व आजादी चाहती हैं। उनके साथ भी अच्छा व्यवहार किया जाना चाहिए। ऐसा भाव अगर तनिक भी हमारे मन में आए, तो छेड़छाड़ के मामलों पर लगाम लग सकती है। साथ ही महिलाओं का भी कर्तव्य है कि वे अपने शोषण को सहन ना करें। समाजकंटकों का निडर होकर मुकाबला करें।
-तेजपाल गुर्जर, हाथीदेह, श्रीमाधोपुर

लड़के का परिवार भी दोषी
छेड़छाड़ की घटनाओं को लड़कों के परिजन और निकटतम रिश्तेदार रोक सकते हंै। छेड़छाड़ की शिक्षा आखिर लड़कों को कहां से मिलती है? माता- पिता का अत्यधिक लाड़- प्यार भी, इसके लिए जिम्मेदार है। आखिर ऐसी घटनाओं को अंजाम देकर कोई लड़का कैसे परिवार वालों से नजरें मिला सकता है? छेड़छाड़ की घटना के लिए केवल लड़का ही नहीं उसका पूरा परिवार दोषी माना जाना चाहिए। ऐसे परिवार का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।
-रणजीत सिंह भाटी, राजाखेड़ी, मंदसौर, मध्यप्रदेश

सख्त कानून जरूरी
बिना कड़े कानून के अपराधों पर अंकुश नहीं लग सकता। यदि सरकार को छेड़छाड़ की घटनाएं रोकनी हैं तो सख्त कानून बनाना होगा और उस पर अमल भी करना होगा।
-अजय गर्ग, बाड़ी, धौलपुर

सतर्क रहें लड़कियां
हर वक्त लड़की अपने साथ बॉडीगार्ड नहीं रख सकती। इसलिए उसे अपनी सुरक्षा के गुर तो सीखने ही होंगे। इसके लिए प्रशिक्षण लिया जा सकता है। साथ ही इमरजेंसी नंबर ध्यान रखने चाहिए। मिर्च का स्प्रे और कैमरा पेन साथ रखा जा सकता है। पुलिसकर्मी और जन जागरूक संगठन जागरूकता फैलाएंगे, सुरक्षा भी करेंगे, लेकिन लड़कियों को खुद भी सतर्क रहना होगा
-गुंजन व्यास, जोधपुर

दोषी को सार्वजनिक रूप से दंड मिले
आजकल छेड़छाड़ की घटनाएं बहुत ज्यादा हो रही हैं। इन पर अंकुश जरूरी है। क़ुछ सावधानियां बरतने से काफी अंकुश सम्भव है। बालिकाओं के पहनावे का विशेष ध्यान रखें। टीवी और इंटरनेट पर अश्लीलता का प्रसार रोकें। बालकों की दिनचर्या पर नजर रखें। घर का वातावरण सुसंस्कारित हो। दोषी को सार्वजनिक स्थल पर दंडित करे।
-छगनलाल व्यास, खंडप, बाड़मेर