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नहीं बरती सावधानी तो बढ़ेगी मुश्किल

दस महीने तक भय के माहौल में रहने के बाद जनवरी से कोरोना के मामले कम होना शुरू हुए थे।

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नहीं बरती सावधानी तो बढ़ेगी मुश्किल

नहीं बरती सावधानी तो बढ़ेगी मुश्किल

सवधानी हटी, दुर्घटना घटी' वाली कहावत सुनी तो सभी ने है, लेकिन शायद मानता कोई नहीं है। न सरकार और न आम जनता। इसे मानते होते, तो कोरोना दूसरी लहर के रूप में फिर हमलावर नहीं होता। दस महीने तक भय के माहौल में रहने के बाद जनवरी से कोरोना के मामले कम होना शुरू हुए थे। फरवरी में एक दौर तो ऐसा आया जब देशभर में कोरोना के मामलों की संख्या 7 हजार प्रतिदिन तक सिमट गई थी, लेकिन रविवार को करीब 47 हजार मामले एक ही दिन में फिर सामने आ गए। ये सीधा-सीधा लापरवाही से जुड़ा मामला है। थोड़ी ढील मिली, तो सब हो गए बेपरवाह। सरकार भी और जनता भी। न सोशल डिस्टेंसिंग रह गई और न मास्क जरूरी रहा। शादी-समारोह हो या होटल-रेस्टोरेंट, पहले जैसी गहमागहमी। फिर दूसरी लहर तो आनी ही थी। कोरोना के मामले कम होने लगे, तो सरकार भी दिशा-निर्देश जारी करने तक सीमित रह गई। सब कुछ छोड़ दिया जनता के भरोसे। केंद्र से लेकर राज्यों में मंत्री और अधिकारी सार्वजनिक स्थलों पर बिना मास्क नजर आने लगे। क्रिकेट मैच देखने के लिए आई हजारों की भीड़ में कुछ ही लोग मास्क में नजर आए। यहां सवाल किसी सरकार को कठघरे में खड़े करने का नहीं है, लेकिन महामारी जितनी भयावह है, उतनी सतर्कता पिछले दिनों नहीं दिखाई दी। राज्य सरकारों ने दस महीने तक अच्छा काम जरूर किया, लेकन फिर सब कुछ दिखावे तक सिमट गया।

अब भी संभला जा सकता है। सात हजार मामले 47 हजार तक पहुंच गए, लेकिन अधिकतम सीमा कोई नहीं जानता। देश में एक दिन में सर्वाधिक एक लाख के आसपास मामले सामने आ चुके हैं। लापरवाही का दौर यूं ही चलता रहा, तो आंकड़ा कुछ भी हो सकता है। ये बताने की जरूरत नहीं है कि कोरोना ने देश को कितना दर्द दिया है। हजारों लोग मौत के मुंह में समा गए, तो लाखों लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई। अर्थव्यवस्था भी बदहाल हुई और आम आदमी की जिंदगी भी। दूसरी लहर ने जोर पकड़ा, तो देश को फिर नुकसान झेलना पड़ेगा। वैक्सीन और दवाई अपनी जगह है, लेकिन कोरोना को मात सावधानी रखकर ही दी जा सकती है। संक्रमण का शिकार होने से बेहतर है सावधानी बरतना। अपनी सावधानी हम नहीं रखेंगे तो कौन रखेगा? सरकार का काम सावधान करना था। सतर्क हमको स्वयं रहना होगा। दूसरों को भी करना होगा। वह भी पहले से अधिक। भारत ने दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में अच्छा काम किया है। इसकी सराहना भी हुई है। कोरोना की शुरुआत में जैसी सावधानी बरती, उससे अधिक सावधानी अब जरूरी है। इसलिए कोरोना गाइडलाइन का हर हाल में पालन किया जाना चाहिए।