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Patrika Opinion: जाली नोटों की बढ़ती संख्या चिंताजनक

किसी देश की आर्थिक व्यवस्था को चौपट करने के जो बड़े कारक हैं, नकली नोट उन सबमें ज्यादा खतरनाक है। देश में आतंकी गतिविधियों को पनपाने में भी जाली मुद्रा विनाशकारी भूमिका अदा करती रही है।

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Patrika Desk

Jun 05, 2022

प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से देश में प्रचलित नकली नोटों को लेकर पेश की गई ताजा रिपोर्ट अत्यंत चिंताजनक है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2021-22 में देश में पांच सौ के नकली नोटों की संख्या दोगुने से ज्यादा (लगभग 102 प्रतिशत) हो गई थी। इस अवधि में 2000 रुपए के जाली नोट 54 प्रतिशत तक बढ़ चुके थे। पचास, सौ और दो सौ रुपए के नकली नोट भी इस अवधि में बड़ी संख्या में देश में मुद्रा प्रचलन में आ चुके थे।

किसी देश की आर्थिक व्यवस्था को चौपट करने के जो बड़े कारक हैं, नकली नोट उन सबमें ज्यादा खतरनाक है। देश में आतंकी गतिविधियों को पनपाने में भी जाली मुद्रा विनाशकारी भूमिका अदा करती रही है। यही कारण है कि 8 नवम्बर 2016 को जब देश में नोटबंदी लागू कर 500 रुपए और 1000 रुपए के उस समय प्रचलित नोट बंद कर दिए गए थे, तब दावा किया गया था कि देश के इस कदम से सारे जाली नोट प्रचलन से बाहर हो जाएंगे। इससे आतंक फैलाने के मंसूबे पालने वालों की कमर टूट जाएगी और फिर कभी वे खड़े होने की स्थिति में नहीं आ पाएंगे। नकली नोटों की ताजा रिपोर्ट ने सरकार के दावों को गलत साबित कर दिया है। यह चिंता की बात इसलिए भी है क्योंकि नकली नोटों के कारण उपजे सारे के सारे सवाल वहीं के वहीं हैं। स्वाभाविक तौर पर इनसे जुड़े सारे जोखिम भी कायम हैं। ऐसा नहीं है कि सरकार और रिजर्व बैंक नकली नोटों को रोकने के लिए कुछ नहीं कर रहे, लेकिन इसके बावजूद यदि समस्या है और वह पहले से भी विकराल रूप में है, तो इसका अर्थ है कि कहीं न कहीं कमी जरूर है। अलग-अलग सालों में हमारी एनआइए, सीमा सुरक्षा बल और दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल इसमें पाकिस्तान का हाथ बता चुके हैं। वे साबित कर चुके हैं कि जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने के अलावा पाकिस्तान भारत के खिलाफ जाली मुद्रा के इस्तेमाल का छद्म युद्ध व्यापक स्तर पर खेल रहा है।

पाक अपनी मुद्रा का कुछ करे न करे, भारतीय मुद्रा की हू-ब-हू छपाई के लिए वह हाईटेक मशीनों का इंतजाम कर चुका है, जो नोटों के सभी छह बुनियादी पहलुओं को उसी रूप में कागज पर उतार कर रख देती है। इसलिए जाली नोट रोकने के लिए सबसे पहले हमारी सुरक्षा एजेंसियों को अपनी चौकसी बढ़ानी होगी और उन खामियों को पहचान कर उन्हें दूर करना होगा जिनका फायदा उठाकर पाकिस्तान नकली मुद्रा के साथ घुसपैठ करवाता है। एक मजबूत तंत्र इसे रोकने के लिए विकसित करना होगा।