
प्रकृति को बचाने की बात अब पृथ्वी तक ही सीमित नहीं रही, अंतरिक्ष को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। बिगड़ते हालात से भारत भी आंखें नहीं मूंद सकता। हाल ही बेंगलूरु में इसरो सिस्टम फॉर सेफ एंड सस्टेनेबल ऑपरेशन सुविधा का उद्घाटन किया गया है। नवीनतम तकनीक विभिन्न देशों द्वारा लॉन्च किए गए उपग्रहों और रॉकेटों से निकलने वाले मलबे के प्रबंधन में मदद करेगी। इंसान ने ब्रह्मांड को टटोलने के लिए टेलिस्कोप और सैटेलाइट बनाने शुरू किए। शुरुआत में यह मात्र जिज्ञासा थी, लेकिन अब जिस तरह से चंद्रमा और मंगल पर हमारी नजर पड़ रही है, वह जिज्ञासा से आगे है। हमारी दृष्टि सीधे उन संसाधनों पर भी है, जिनका पृथ्वी पर दोहन कर चुके हैं। लालच के चलते मनुष्य ने जहां एक तरफ समुद्र को भेदना शुरू कर दिया, वहीं दूसरी तरफ उसकी नजर आसमान पर भी जा टिकी। शुरुआती दौर में हमने स्पेस क्राफ्ट भेजे, ताकि हम अन्य ग्रहों के प्रति समझ बना सकें। फिर हमने चंद्रमा पर चरण डाल दिए और मंगल पर जाने की कोशिश में हैं।
Updated on:
10 Aug 2022 10:19 pm
Published on:
10 Aug 2022 06:13 pm
बड़ी खबरें
View Allओपिनियन
ट्रेंडिंग
