
समझौतों से रणनीतिक मोर्चे पर भारत को मिली मजबूती
समझौतों से रणनीतिक मोर्चे पर भारत को मिली मजबूती
डॉ. एन. के. सोमानी
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यूनान (ग्रीस) का दौरा कई मायने में फलदायी रहा। एक दिन के दौरे में भारत और ग्रीस के बीच जो समझौते हुए हैं, उससे जहां एक ओर भूमध्यसागरीय क्षेत्र में भारत का रणनीतिक मोर्चा मजबूत हुआ है, वहीं तुर्की, पाकिस्तान और अजरबैजान के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। अजरबैजान कश्मीर मुद्दे पर तुर्की की तरह ही पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाता रहा है। हाल के कुछ वर्षों में जिस तरह से तुर्की, पाकिस्तान और अजरबैजान मध्यपूर्व और मध्य एशिया में भारत के बढ़ते हुए प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं। उसे देखते हुए भारत एक ऐसे क्षेत्र की तलाश में था जहां से वह इस कथित तिकड़ी को काउंटर कर सके। ग्रीस के साथ रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाने के फैसले को भारत की इसी नीति का हिस्सा कहा जा रहा है। ग्रीस के अलावा आर्मेनिया के साथ संबंध बढ़ाना भी भारत की इसी नीति का हिस्सा है।
तुर्की सैन्य मोर्चे पर हमेशा पाकिस्तान के साथ खड़ा दिखाई देता है। कश्मीर मुद्दे पर वह पाकिस्तान की भाषा बोलता है। संयुक्त राष्ट्र में भी तुर्की कश्मीर का मुद्दा उठा चुका है। पाकिस्तान के साथ तुर्की के अपने हित हैं। पाक-तुर्की संबंधों में इस्लाम एक बड़ा कारक है। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन लंबे समय से इस्लामिक देशों का खलीफा बनने का सपना देख रहे हैं। उन्हें लगता है पाकिस्तान के सहारे वह अपने सपने को पूरा कर सकते हैं। ग्रीस और तुर्की में पुरानी दुश्मनी है। ग्रीस के कई द्वीपों पर तुर्की का दावा है। एजियन सागर में ग्रीस और तुर्की के बीच तनाव है। नाटो सहयोगी होने के बावजूद एथेंस और अंकारा के बीच एजियन सागर को लेकर विवाद इस कदर गहरा गया था कि भूमध्य सागर में युद्ध के बादल मंडराने लगे थे। ऐसे में पाकिस्तान भूमध्य सागर विवाद में तुर्की का समर्थन कर तुर्की का कृपा पात्र बना रहना चाहता है। यही वजह है कि एर्दोगन पाकिस्तान के हर जायज-नाजायज एजेंडे को समर्थन देते रहे हैं। हाल के कुछ वर्षों में भारत-ग्रीस संबंधों को मजबूत करने का सिलसिला शुरू हुआ है। खासकर, केन्द्र में मोदी सरकार आने के बाद। वर्तमान में दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक रिश्ते भी हैं। 2022-23 में दोनों देशों के बीच 160 अरब रुपए का व्यापार हुआ। हालांकि, व्यापार संतुलन ग्रीस के पक्ष में है। रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। पिछले दिनों यूनान ने भारत के साथ अपना सबसे बड़ा नौसेना का संयुक्त अभ्यास किया था। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय नौसेना के युद्धपोत भूमध्य सागर में रणनीतिक तैनाती के दौरान ग्रीस का दौरा करते रहे हैं।
सामरिक दृष्टि से ग्रीस भारत के लिए काफी अहम है। पिछले कुछ सालों से भारत ग्रीस और साइप्रस के साथ मिलकर तुर्की को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। ग्रीस नाटो का सदस्य है। ग्रीस के साथ अपने संबंधों को मजबूत करके भारत तुर्की के नेतृत्व वाले अनौपचारिक त्रिगुट (पाकिस्तान, अजरबैजान और तुर्की) को कांउटर कर सकता है। इसके अलावा ग्रीस के साथ संबंध विकसित कर भारत अपनी रणनीति साझेदारी को परम्परागत साझेदारी के दायरे से बाहर ले जाना चाहता है। वह रूस और ईरान जैसे परम्परागत सहयोगियों पर अपनी निर्भरता सीमित करना चाहता है। महाशक्तियों की तर्ज पर भारत भी अपनी रणनीति साझेदारी में विविधता पर ध्यान देकर उन देशों के साथ साझेदारी बनाने की कोशिश कर रहा है, जो उसके हितों को साझा करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के हालिया ग्रीस दौरे के दौरान जिस तरह से दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी मजबूत करने, आव्रजन व आवाजाही समझौते पर जल्द काम पूरा करने, भारत-यूनान संवाद योजना विकसित किए जाने, नई और उभरती प्रौद्योगिकियों तथा कृषि के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने एवं रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है, उससे भारत-ग्रीस संबंध और मजबूत होंगे, इसमें संदेह नहीं है।
Published on:
31 Aug 2023 10:04 pm
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