
pakistan is ready to open kartarpur sahib corridor for india
- कौशल मिश्र, टिप्पणीकार
पाकिस्तान की अवाम ने चुनाव में आतंकी हाफिज सईद की पार्टी को पूरी तरह खारिज कर यह साबित कर दिया कि वहां जनता आतंक, भय और मारकाट के माहौल से आजिज आ गई है। पाक में भी लोग अब अमन-चैन की जिंदगी जीना चाहती है। यह बात पाकिस्तान की सत्ता संभालने जा रहे क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान को भी समझ में आ ही गई होगी। इमरान खान के लिए यह मौका होगा कि वह पाक अवाम की भावनाओं को समझते हुए दुनिया में अपने देश की आतंकी छवि को दूर करने की पहल करे। इससे पाकिस्तान की आर्थिक सेहत भी सुधरेगी इसमें दो राय नहीं।
चुनाव नतीजे घोषित होने के तत्काल बाद इमरान खान ने कहा भी है कि यदि भारत हमारी तरफ एक कदम आगे बढ़ाता है तो हम अमन-चैन के लिए दो कदम आगे बढ़ाएंगे। इमरान ने यह भी कहा था कि यह हमारे लिए बेहतर होगा कि भारत के साथ बेहतर रिश्ते बनें। हमारे बीच व्यापारिक संबंध होने चाहिए। दोनों देशों के बीच जितना व्यापार होगा उतना ही आपस में फायदा होगा। इमरान के बयान के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह से इमरान खान को टेलीफोन पर जीत की बधाई दी वह भी उनकी सदाशयता का परिचायक है।
देखा जाए तो आतंकवाद अकेले भारत की ही समस्या नहीं है। पाकिस्तान भी आतंकी घटनाओं से दो-चार होता रहता है। ऐसे में दोनों पक्षों को बैठ कर आपसी समस्याओं का समाधान करना ही होगा। आशंका यह भी व्यक्त की जा रही है कि इमरान खान यदि पाक फौज के दबाव में रहे तो बातचीत की रहा तलाशना इतना आसान नहीं होगा।
दरअसल, इमरान खान और पाकिस्तानी फौज दोनों को ही समझना होगा कि कश्मीर में लंबे समय से अस्थिरता फैलाने के प्रयासों से हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच विश्वास कम होता जा रहा है। अलगाववादियों का आर्थिक मदद कर और सीमा पार से घुसपैठ कराने में पाक फौज का सहयोग जब तक बना रहेगा किसी भी तरह की बातचीत में सफलता मिल पाएगी, इसकी उम्मीद कम ही हैै। पिछले सालों में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पाकिस्तान की छवि धूमिल ही हुई है।
मोटे तौर पर यही कहा जा सकता है कि कि ११ अगस्त को प्रधानमंत्री की शपथ लेने वाले इमरान के लिए यह मौका होगा जब वे दोनों देशों के बीच नए रिश्ते की शुरुआत कर सकेंगे। देखना है कि वे इसमें कितना सफल होते हैं?

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