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सेवा परमो धर्म: है बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत का संदेश

हम में से प्रत्येक के भीतर असीम क्षमता है, उसी क्षमता को सही दिशा देकर एक नया भविष्य गढ़ा जा सकता है, समाज के कई वर्ग आज ऐसे भी हैं जो आर्थिक, सामाजिक अथवा शारीरिक दृष्टि से चुनौतियों का सामना करते हैं। एक ऐसा विश्व जहां सभी को समान अवसर प्राप्त हो, ताकि सर्वे भवन्तु सुखिन: की भावना सच हो सके। यही तो भारत की सुंदरता है, यही तो उसका सनातन संदेश है, युग-युगांतर से प्रचलित वाणी सेवा परमो धर्म: को आत्मसात कर चरितार्थ करने वालों को ही भविष्य याद रखता है।

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Gyan Chand Patni

Oct 16, 2023

सेवा परमो धर्म है बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत का संदेश

सेवा परमो धर्म है बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत का संदेश

सेवा परमो धर्म है बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत का संदेश

डॉ. सुभाष शर्मा

(लेखक बैंकिंग क्षेत्र में कार्य करने के साथ युवाओं में उद्यमिता कौशल हेतु गैर सामाजिक संगठन चलाते हैं)

पिछले माह नई दिल्ली के भारत मण्डपम में जी-20 शिखर सम्मेलन अपनी पूरी भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए भारत ने आदर्श वाक्य 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' को केंद्र में रख, अधिक समावेशी वैश्विक व्यवस्था का एक विकल्प विश्व के सामने प्रस्तुत किया है। इस वर्ष की शुरुआत में तुर्की और सीरिया में आए भूकंप के बाद, भारत इजरायल के साथ उन कुछ चुनिंदा देशों में शामिल था जिन्होंने सहायता के लिए किसी आधिकारिक अनुरोध की प्रतीक्षा नहीं की, बल्कि मानवीय आधार पर त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए अपने संसाधन जुटाकर राहत टीमों को तुर्की भेज दिया। भारत के भेजे हुए बचाव एवं चिकित्सा दल, तुर्की पहुंच कर तेजी से जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए जुट गए। यह भारत की वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत एवं वैश्विक कल्याण के लिए उसकी अटूट प्रतिबद्धता का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। इस तात्कालिक प्रतिक्रिया ने न केवल आपदा राहत को लेकर भारत की तैयारियों का प्रदर्शन किया, बल्कि संकट के समय में एक विश्वसनीय सहयोगी के रूप में अपनी पहचान को पुन: विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया। भारत को एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में देखा जाने लगा है।

भारत आज विभिन्न क्षेत्रों में अपनी नई पहचान बना रहा है। चाहे फिनटेक क्षेत्र की बात करें, जहां भारत की अपूर्व प्रगति देख पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआइ) ने न केवल लोगों के रोजमर्रा के लेन-देन को सुगम बना दिया है, दिन प्रतिदिन विश्व के अलग-अलग देश भी इस बेहतर भुगतान प्रणाली को अपनाने को लेकर उत्साहित दिखते हैं, इस परिवर्तन ने कहीं न कहीं नए दौर की इस वैश्विक वित्तीय क्रांति को भी प्रेरित किया है। इससे न केवल भारत के डिजिटल भुगतान परिदृश्य को नई दिशा मिली है, बल्कि कुशल, सुरक्षित और समावेशी वित्तीय प्रणालियों को लोकप्रिय बनाने की दृष्टि से यह दुनिया के लिए भी एक उदाहरण है। वहीं अगर इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) की बात करें तो, अपने कौशल के माध्यम से भारत के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में भी भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियों को रचने का काम किया है। इस बदलाव ने भारत को एक वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में मजबूती से स्थापित किया है। हाल के सफल मिशन, जैसे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला राष्ट्र बनना और सूर्य का अध्ययन करने के लिए सौर मिशन शुरू करना, वैज्ञानिक अन्वेषण और स्थिरता की सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए भारत के समर्पण को रेखांकित करता है, जिससे वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के भविष्य को नया आकार दिया जा सके। संदेश स्पष्ट है कि इस नए युग में आपसी सहयोग केवल एक आदर्श ही नहीं, बल्कि अनिवार्यता भी है। जी-20 शिखर सम्मेलन ने समावेशिता और एकजुटता के लिए एक मिसाल कायम की है, इस जी-20 के डिक्लेरेशन ने राष्ट्रों के बीच चली आ रही पुरानी शत्रुता को भी चुनौती दी है। साथ ही एक नए, उज्ज्वल, भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त किया है।

हम में से प्रत्येक के भीतर असीम क्षमता है, उसी क्षमता को सही दिशा देकर एक नया भविष्य गढ़ा जा सकता है, समाज के कई वर्ग आज ऐसे भी हैं जो आर्थिक, सामाजिक अथवा शारीरिक दृष्टि से चुनौतियों का सामना करते हैं। एक ऐसा विश्व जहां सभी को समान अवसर प्राप्त हो, ताकि सर्वे भवन्तु सुखिन: की भावना सच हो सके। यही तो भारत की सुंदरता है, यही तो उसका सनातन संदेश है, युग-युगांतर से प्रचलित वाणी सेवा परमो धर्म को आत्मसात कर चरितार्थ करने वालों को ही भविष्य याद रखता है।