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Patrika Opinion: कनाडा के बहाने पश्चिम को भारत ने दिखाया आईना

जयशंकर ने साफ कहा कि आतंकी हरकतों के मामले में राजनीतिक सहूलियत को देखते हुए कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पश्चिमी देशों के दोहरे बर्ताव को भी कटघरे में खड़ा किया और स्पष्ट शब्दों में बता दिया कि अब पहले वाली स्थिति नहीं है जिसमें कुछ देश मिलकर अपने लिए अलग और दुनिया के लिए अलग मानदंड तय करते रहे।

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Nitin Kumar

Sep 28, 2023

Patrika Opinion: कनाडा के बहाने पश्चिम को भारत ने दिखाया आईना

Patrika Opinion: कनाडा के बहाने पश्चिम को भारत ने दिखाया आईना

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा व काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में जिस तरह कनाडा का जिक्र किए बिना ही खालिस्तानी आतंकियों को प्रश्रय देने के लिए उसे खरी-खरी सुनाई है, उसे भारत के बढ़ते आत्मविश्वास के रूप में देखा जा सकता है। जयशंकर ने साफ कहा कि आतंकी हरकतों के मामले में राजनीतिक सहूलियत को देखते हुए कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पश्चिमी देशों के दोहरे बर्ताव को भी कटघरे में खड़ा किया और स्पष्ट शब्दों में बता दिया कि अब पहले वाली स्थिति नहीं है जिसमें कुछ देश मिलकर अपने लिए अलग और दुनिया के लिए अलग मानदंड तय करते रहे। जाहिर है उनका इशारा अमरीका की तरफ भी था जो अपनी सहूलियत से अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों को परिभाषित करता रहा है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान में घुसकर अपने देश के गुनहगारों को सजा देते समय उसे इन देशों की संप्रभुता का ध्यान नहीं रहता, लेकिन ऐसी ही हरकत कोई और देश करे तो आंखें दिखाने लगता है।

कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने जिस तरह सार्वजनिक बयान देकर भारतीय एजेंसियों पर आरोप लगाए, उसके बाद से दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर तक पहुंच गए हैं। हालांकि जयशंकर ने यह भी साफ किया कि दूसरे देशों में जाकर कार्रवाई करना भारत की नीति नहीं है, फिर भी यदि कनाडा कोई ठोस सबूत उपलब्ध कराता है तो भारत सरकार कार्रवाई करेगी। पर कनाडा ने अब तक ऐसा कोई सबूत नहीं दिया है। जाहिर है कि क्षुद्र राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कनाडाई प्रधानमंत्री भारत पर आरोप मढ़ रहे हैं और विकसित देशों की खुफिया एजेंसियों के संगठन ‘फाइव आइज’ का भी इसी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। अमरीका कभी भारत की तरफ से तो कभी कनाडा की तरफ से बोल रहा है। वह कनाडा के कारण भारत से बढ़ते अपने संबंध खराब नहीं करना चाहता और न ही कनाडा से अपने पुराने संबंधों पर कोई आंच चाहता है।

भारत में जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन ऐतिहासिक रूप से सफल होने के बाद भारत का आत्मविश्वास और बढ़ा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय विदेश मंत्री ने जो सूझबूझ और तेवर दिखाए, वह विदेश मामलों पर उनकी पकड़ और अत्यंत सावधानी के साथ कूटनीतिक शब्दों के चयन के लंबे अनुभव का ही परिणाम है। दूर-दराज के पश्चिमी देश ही नहीं, पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों के बारे में भी भारत की साफगोई से दुनिया हैरान-परेशान जरूर होगी, पर देश का कद बढ़ाने के लिए यह जरूरी भी है।