
वेद माथुर
आर्थिक मामलों के जानकार और पूर्व बैंकर
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फ्रांस, स्विट्जरलैंड, इटली और कुछ अन्य देशों की यात्रा करते हुए पर्यटकों की भीड़ देखकर जाने कितनी ही बार मन में यह विचार आया कि भारत की विरासत, विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य बेजोड़ है तब भी जीडीपी में पर्यटन के योगदान की दृष्टि से विश्व के 9.1त्न और यूरोप के 10त्न की तुलना में भारत महज 6त्न पर ही क्यों रुका हुआ है। एक अनुमान के अनुसार, विश्व में 32 करोड़, भारत में 4 करोड़, यूरोप में १.२ करोड़ और चीन में 6.3 करोड़ लोगों को (लगभग) पर्यटन से रोजगार प्राप्त हो रहा है। जाहिर है कि भारत में पर्यटन क्षेत्र में अभी भी रोजगार की विपुल संभावनाएं हैं।
इसमें कोई संदेह नहीं कि फ्रांस, स्पेन, इटली, स्विट्जरलैंड और नीदरलैंड्स जैसे यूरोपीय देश अपने समृद्ध इतिहास, संस्कृति, विविध सुंदर प्राकृतिक दृश्यों और प्रसिद्ध स्थलों के कारण विदेशी पर्यटकों के लिए लोकप्रिय गंतव्य हैं। फ्रांस एफिल टॉवर और लूव्र संग्रहालय जैसे प्रतिष्ठित आकर्षणों के लिए जाना जाता है तो स्पेन मंत्रमुग्ध कर देने वालों समुद्र तटों, स्वादिष्ट भोजन और जीवंत त्योहारों से आकर्षित करता है। इटली की खासियत प्राचीन धरोहर और वास्तुकला है तो स्विट्जरलैंड लुभावने पहाड़ी दृश्यों और पर्यटकों के लिए विशेष रेल यात्रा के लिए प्रसिद्ध है। यूरोपीय देशों के पुराने शहर, कस्बे और गांव भी पर्यटकों का मन मोह लेते हैं, तो नीदरलैंड्स का आकर्षण हैं वहां के ट्यूलिप गार्डन व अनूठी साइकिल संस्कृति। यही बातें दुनिया भर के पर्यटकों के बीच यूरोप को शीर्ष विकल्प के रूप में पेश करती हैं। लेकिन पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत की दृष्टि से जितनी विविधता भारत में है, संभवत: उतनी दुनिया के किसी अन्य देश में नहीं।
भारत में एक ओर मरुधरा है, रेत के धोरे हैं, जैसलमेर और उसकी हवेलियां हैं, तो दूसरी ओर गोवा और लक्षद्वीप के समुद्र तट। खजुराहो से लेकर मदुरै तक सैकड़ों साल पुरानी स्थापत्य कला और मूर्तियां सहेजे विशाल मंदिर हैं, तो दर्जनों ऐसे अभयारण्य जहां शेर, चीते और अन्य जानवर पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यह मानना ही होगा कि यूरोपीय देशों ने अपने देश की सांस्कृतिक धरोहर को अत्यंत सावधानी से सहेज कर रखा है। यूरोप और अनेक देशों ने अपनी झीलों और जलस्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखा है। प्रकृति की देन को विकास की प्रक्रिया के दौरान उन देशों ने नष्ट नहीं होने दिया है। स्विट्जरलैंड के सबसे ऊंचे पर्यटन स्थल जुंगफ्राउ तक पहुंचने के लिए एयर ट्रॉली और पगडंडी है, पर पहाड़ों पर घूमने के लिए लगभग 9.34 किलोमीटर लंबी रेलगाड़ी इसलिए खास है क्योंकि इसके लिए पहाड़ों को जगह-जगह से नुकसान नहीं पहुंचाया गया है।
हमारे देश में पर्यटन के विकास में क्या बाधाएं हैं? अनेक देशों की यात्रा तथा विदेशियों से बातचीत के बाद सामने आया कि अभी भी भारत के पर्यटन स्थलों के बारे में विश्व के दूसरे देशों के लोगों को बहुत अधिक जानकारी नहीं है तथा जिन्हें जानकारी है उनका भी एक बड़ा भाग यह मानकर चलता है कि भारत में कानून व्यवस्था की स्थिति ऐसी नहीं है कि वे अपनी यात्रा के दौरान यहां सुरक्षित रहेंगे। घनी आबादी, सफाई व्यवस्था का अभाव और प्रदूषण भी उन्हें आशंकित करते हैं। इसी का दुष्परिणाम है कि 42 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (इटली में सर्वाधिक 59) होने पर भी पर्याप्त विदेशी पर्यटक नहीं आ रहे हैं।
हमें पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से उन्नति कर रहे देशों से बहुत कुछ सीखना होगा। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के प्रयास इस क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं को देखते हुए पर्याप्त नहीं कहे जा सकते हैं। अपने देश को विदेशी पर्यटकों के लिए सुरक्षित बनाकर, विदेशों में भारतीय पर्यटन स्थलों की जानकारी देने के लिए मेले-प्रदर्शनियां आयोजित कर तथा विदेशी फिल्मकारों को यहां शूटिंग के लिए प्रोत्साहित करके हम अगले दस सालों में पर्यटन से आय को तीन गुना कर सकते हैं। पर्यटन बढ़ाने में थीम पार्कों का भी विशेष महत्त्व है। भारतीय संस्कृति से रूबरू कराते कुछ नए व्यवस्थित गांव भी बसाए जा सकते हैं। बड़े पैमाने पर स्वच्छता अभियान भी जरूरी है। घरों में बनाए गए अतिथि गृहों तथा होम स्टे को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि पर्यटन का लाभ एयरलाइंस और होटल इंडस्ट्री के साथ आम आदमी को भी मिले।
(हाल ही में यूरोप यात्रा के दौरान जैसा अनुभव किया।)
Published on:
18 Jul 2024 09:58 pm
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