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भुखमरी खत्म करने के लिए ग्रामीण समुदायों में निवेश जरूरी

अगर किसान को भरोसा हो कि जमीन पर उनका अधिकार लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा, तो खेती को बेहतर बनाने में पैसा और मेहनत लगाने के लिए अधिक तैयार होगा।
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जयपुर

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Opinion Desk

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एस्थर न्गुंबी

Sep 09, 2026

starvation

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संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही दुनिया में खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में कुछ उत्साहजनक बातें सामने आई हैं। वर्ष 2025 में करीब 64.5 करोड़ लोग भूख से जूझ रहे थे, लेकिन यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1.4 करोड़ कम थी। एक दशक में पहली बार अफ्रीका में भी भूख से जूझने वाले लोगों की संख्या घटी है।यह खबर सकारात्मक है, लेकिन दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में स्थिति अब भी बहुत असमान है। रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण इलाकों में पर्याप्त और पौष्टिक भोजन की गंभीर कमी है और इसका असर महिलाओं पर ज्यादा है। ऐसे में सरकारों और विकास संगठनों के सामने यह बड़ा सवाल है कि ग्रामीण समुदायों में लोगों को पर्याप्त भोजन मुहैया कराकर भुखमरी खत्म करने के लक्ष्य की ओर तेजी से कैसे बढ़ा जाए? इस दिशा में चार प्राथमिकताएं महत्वपूर्ण हैं।

पहली प्राथमिकता है- मौजूदा कृषि भूमि से ही अधिक और टिकाऊ उत्पादन हासिल करना। उपज बढ़ाने का यह काम प्रकृति और पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचाते हुए होना चाहिए। बढ़ती आबादी के साथ खेती की जमीन पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में खेती का क्षेत्र लगातार बढ़ाने के लिए जंगलों की कटाई से पर्यावरण को और अधिक नुकसान पहुंचेगा। इसलिए जरूरी यही है कि नई जमीन को खेती में लाने के बजाय मौजूदा खेतों से ही अधिक उपज हासिल की जाए। उपज बढ़ाने के लिए हमें सबसे पहले मिट्टी की सेहत जांचनी और सुधारनी होगी। दुर्भाग्य से, मिट्टी की सेहत सुधारने की कोशिशों के बावजूद भुखमरी प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी का बड़े पैमाने पर क्षरण आज भी कृषि उत्पादकता को कम कर रहा है। खराब मिट्टी खाद्य और पोषण सुरक्षा, ग्रामीण लोगों की आजीविका और पर्यावरणीय स्थिरता- तीनों के लिए खतरा है।

इसी को ध्यान में रखते हुए अफ्रीकी नेताओं ने 2024 में खाद और मिट्टी को सुधारने की दस वर्षीय कार्ययोजना को मंजूरी दी। मिट्टी की सेहत का हाल पता चल जाने के बाद उसे स्वस्थ बनाने के कई तरीके हैं- जैसे खेत को ढककर रखने वाली फसलें उगाना, एक ही खेत में अलग-अलग फसलें साथ उगाना, फसल चक्र अपनाना, पशुओं को अलग-अलग चरागाहों में बारी-बारी से चराना और गोबर एवं जैविक खादों का इस्तेमाल करना। इसके अलावा मिट्टी की जुताई कम करना, मिट्टी को अधिक समय तक ढका रखना, जैव विविधता बढ़ाना और मिट्टी में जीवित जड़ों की मौजूदगी बनाए रखना मिट्टी की सेहत के लिए अच्छा है।दूसरी प्राथमिकता है- ग्रामीण समुदायों में निवेश। मिट्टी को बेहतर करने के साथ-साथ किसानों को बेहतर बीज, जैव-उर्वरक, पानी और प्रिसिसन एग्रीकल्चर जैसी आधुनिक तकनीकों तक पहुंच भी मिलनी चाहिए। इन सभी क्षेत्रों में एक साथ निवेश से कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को काफी मजबूत किया जा सकता है।

तीसरी प्राथमिकता है- जमीन पर किसानों का अधिकार मजबूत करना। यह कृषि उत्पादन, ग्रामीण विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव की बुनियादी शर्त है। अगर किसान को भरोसा हो कि जमीन पर उनका अधिकार लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा, तो खेती को बेहतर बनाने में पैसा और मेहनत लगाने के लिए अधिक तैयार होगा।जमीन पर मजबूत अधिकार और बेहतर कृषि उपज के बीच संबंध महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। महिलाएं खेती में बड़ा योगदान देने के बावजूद जमीन के मालिकाना हक और जमीन पर सुरक्षित अधिकार के मामले में अब भी पीछे हैं। महिलाओं के जमीन पर मालिकाना हक सुनिश्चित करने से लैंगिक समानता बढ़ सकती है। उपज में सुधार हो सकता है। ग्रामीण परिवारों की आमदनी बेहतर हो सकती है और खाद्य सुरक्षा में सुधार आ सकता है। अंतिम प्राथमिकता है- किसानों को बाजारों से जोडऩे वाले बुनियादी ढांचे में निवेश। सरकारों को बिजली, रेफ्रिजरेटेड परिवहन और सड़क सुविधाओं को बेहतर बनाना होगा। बाजारों तक किसानों की पहुंच आसान होने से वे अपनी अधिकाधिक उपज बेचकर अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे। बेहतर बुनियादी ढांचे से किसानों का खर्च भी घटेगा। अवशेष रकम से वे खेती के बेहतर साधन और नई तकनीक खरीद सकेंगे। इससे फसल कटने के बाद होने वाला नुकसान कम होगा और किसान ऐसी कई फसलें भी उगा सकेंगे, जिनसे उन्हें अधिक आमदनी होगी। अगर दुनिया के किसानों को स्वस्थ मिट्टी, कृषि सामग्री और प्रिसिसन एग्रीकल्चर तथा एआइ जैसी तकनीकों तक पहुंच, जमीन पर मजबूत अधिकार और बेहतर बुनियादी ढांचा मिल जाए, तो वे टिकाऊ तरीके से कृषि उत्पादन बढ़ा सकते हैं। ज्यादा उत्पादन से उनकी आजीविका सुरक्षित होगी और ग्रामीण समुदाय भुखमरी से निकलकर बेहतर और समृद्ध जीवन की ओर बढ़ सकेंगे।भुखमरी में कमी की खबर निश्चित रूप से उत्साहजनक है। फिर भी इस प्रगति को बनाए रखने और आगे बढ़ाने के लिए उन ग्रामीण समुदायों में बड़े पैमाने पर निवेश करना होगा जहां खाद्य असुरक्षा सबसे ज्यादा गहरी है- चाहे वे अफ्रीका में हों या दुनिया के किसी और हिस्से में।
(लेखिका यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय में एसो. प्रोफेसर हैं)