
आपकी बातः क्या देश की अर्थव्यवस्था समावेशी विकास के पहियों पर आगे बढ़ रही है?
समावेशी विकास के नारे अवश्य बुलंद हैं...
देश की अर्थव्यवस्था आज भी 'सर्वजन सुखाय, सर्वजन हिताय' नहीं है। अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा भाग आज भी बहुत कम लोगों के हाथ में है। गरीबों का तो घरेलू बजट भी अनाज, तेल, सब्जी, गैस, शिक्षा आदि की बढ़ती कीमतों से लड़खड़ा जाता है, जिनका आर्थिक विकास संभव ही नहीं है। पिछले दशकों की तुलना में प्रत्येक नागरिक की क्रयशक्ति में कुछ न कुछ अवश्य बढ़ोतरी हुई है किंतु रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की निरंतर बढ़ती कीमतें क्रयशक्ति को भी कमजोर करती रही हैं। कुल मिलाकर देश की अर्थव्यवस्था नाम मात्र का समावेशी विकास कर पाई है।
- मुकेश भटनागर, वैशालीनगर, भिलाई
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मुफ्त की रेवड़ी बड़े संकट की जड़
देश की अर्थव्यवस्था में जीडीपी का बढ़ना यह दिखाता है कि देश समावेशी विकास कर रहा है, लेकिन सत्ता में वर्चस्व बनाए रखने हेतु सत्ताधारी वर्ग जो मुफ्त की रेवड़ी बांट रहा है, उससे समग्र विकास की धुरी माना जाने वाला 'श्रम' का एक बड़ा वर्ग नाकारा, निकम्मा व अकर्मक होता जा रहा है। अनियोजित समावेशी विकास के गंभीर दुष्परिणाम कालांतर में दिखाई देंगे! वेनेजुएला, श्रीलंका एवं पाकिस्तान को देख हमें सबक लेना होगा और एक नियोजित समावेशी विकास की योजना बनाकर हर वर्ग के निजी हित को दृष्टिगत रखते हुए उन्हें विकास की इस योजना में शामिल करना होगा तभी हमारा देश समावेशी विकास कर पाएगा।
- शिवराज सिंह मुवेल, थांदला, झाबुआ (मप्र)
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राजस्व और खर्च में बेहतर संतुलन जरूरी
अर्थव्यवस्था को अच्छी तरह चलाने के लिए सरकार को राजस्व और खर्च के संतुलन को ठीक करना चाहिए। भारतीय अर्थव्यवस्था देश में मजबूत विकास, समग्र दृष्टिकोण में सुधार और निवेश के संकेत के साथ आशावादी रूप से आगे बढ़ रही है। सरकार के नए-नए प्रयासों से निर्माण क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। मेक इन इंडिया की पहल से देश और विदेशों से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। मेक इन इंडिया का उद्देश्य देश में उद्यमशीलता को बढ़ावा देना भी है।
- लहर सनाढ्य, उदयपुर राजस्थान
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समावेशी विकास एक अधूरा सत्य
समावेशी विकास प्रत्यक्ष रूप से सभी वर्गों के लिए समानता का व्यवहार करने वाली नियोजित परिकल्पना होती है। पर भारत में वोट बैंक की मानसिकता से सभी योजनाएं प्रत्यक्ष रूप से तो गरीब लक्षित दिखाई जाती हैं लेकिन प्रभावी वर्ग द्वारा अपने हितों के पोषण के लिए उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से अपने लिए लाभकारी बना लिया जाता है। परिणामस्वरूप मध्यम आय वर्ग का बड़ा असंगठित तबका विकास योजनाओं के प्रत्यक्ष लाभ से वंचित रह जाता है। यदि भारतीय अर्थव्यवस्था का समावेशी विकास के पहियों पर आगे बढ़ना माना जाता है तो यह अधूरा सत्य है।
- बाल कृष्ण जाजू, जयपुर
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दूर करना होगा भेदभाव
निश्चित रूप से भारत की अर्थव्यवस्था समावेशी विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। समावेशी विकास के लिए मुख्य आधारभूत बुनियादी संरचना की खामियों, सामाजिक असमानता और भेदभाव को दूर करना होगा। इसके अलावा केंद्र को समावेशी विकास के एजेंडे को मुख्यधारा में शामिल करके इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास पर ध्यान देना होगा ताकि अमीरी और गरीबी की खाई को पाटा जा सके।
- महेश आचार्य, नागौर
Published on:
30 Jul 2023 04:08 pm
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