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आपकी बातः ‘सभी धर्मों का सम्मान’ संदेश देने के लिए पार्टी प्रवक्ताओं का निलंबन क्या पर्याप्त होगा?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

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Patrika Desk

Jun 06, 2022

भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा

भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा

निलम्बन ही काफी नहीं
"सभी धर्मों का सम्मान" संदेश देने के लिए पार्टी प्रवक्ताओं का निलंबन ही पर्याप्त नहीं है। पार्टी और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्त धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले ऐसे लोगों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। भविष्य में ऐसे लोगों को पार्टी में वापस नहीं लिया जाना चाहिए। क्योंकि ऐसे लोग देश व पार्टी के लिए खतरा हैं।
- आलोक वालिम्बे, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
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धर्म निरपेक्ष है देश का स्वरूप
हमारे देश का संविधान किसी भी धर्म के मानने वालों को यह अधिकार नहीं देता है कि वह दूसरे के धर्म का अपमान करें। हमारा देश धर्म निरपेक्ष है। यहां सभी धर्मों के लोगों को अपने-अपने धर्म का प्रचार-प्रसार करने का अधिकार है। सभी धर्म मानवता का पाठ पढ़ाते हैं। इसलिए एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए। जब एक दूसरे के धर्म के बारे मे गलत प्रचार प्रसार किया जाता है तो स्वाभाविक है उसे ठेस पहुंचेगी। प्रवक्ता अति उत्साह में आकर ऐसे कार्य करते हैं, उन्हें सस्पेंड नहीं बल्कि हमेशा के लिए निष्कासित कर देना चाहिए।
- महेश सक्सेना, साकेतनगर भोपाल
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कठोर कार्यवाही जरूरी
किसी भी पार्टी के प्रवक्ता द्वारा भड़काऊ बयानबाजी करने पर व्यक्तिगत स्तर पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। जरूरी हो तो इस संबंध में कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए। इस तरह के बयानों से बडे़ स्तर पर हिंसा भड़क सकती है।
- लोकेश ,जयपुर
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गाइडलाइन तय करें पार्टियां
भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत है। संविधान के अनुसार सभी धर्मों के प्रति समानता का भाव रखकर उनका आदर किया जाना अपेक्षित है। दूसरे धर्मों की आलोचना करने से उस धार्मिक समुदाय से जुड़े लोगों को ठेस पहुंचती है। ऐसी स्थिति में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने के साथ-साथ कानून व्यवस्था भी प्रभावित होती है। इसलिए राजनीतिक दलों को एक सुनिश्चित गाइडलाइन बनानी चाहिए। इसके अनुरूप ही प्रवक्ताओं को अपनी बात रखनी चाहिए। टीवी डिबेट पर बोलते समय जब अपनी राय रखें तो हर किसी को संयमित रहना चाहिए। साथ ही मर्यादा के खिलाफ आचरण करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। तभी माहौल बिगड़ने की आशंका से बचा जा सकता है।
- अर्जुनसिंह राव, भीनमाल
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विविधता में एकता
भारत की संस्कृति विविधता में एकता है। सभी धर्मों के लोग आपसी भाईचारे व प्रेम से रहते है। इसी एकता को भंग करने के लिए राजनेता दूसरे के धर्म पर अवांछनीय टिप्पणियां कर, शांति भंग करने के प्रयास करते रहते हैं। बीजेपी प्रवक्ताओं का निलंबन सभी धर्मों के सम्मान का संदेश देता है। यदि सभी राजनीतिक दल एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करते हुए बिना किसी बैर-भाव के राजनीति करें, तो देश में धार्मिक सहिष्णुता में वृद्धि के साथ एकता और मजबूती आएगी ही आएगी।
- नरेश कानूनगो, देवास, मध्यप्रदेश
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सजा मिलनी चाहिए
भड़काऊ भाषण, विवादित बयान और हेट स्पीच देकर लोगों के बीच धार्मिक हिंसा कराना और देश में अशांति फैलाना एक अपराध है। हमारे कुछ नेताओं ने अपनी पब्लिसिटी के लिए इसे अपना हथियार बना लिया है जो कतई स्वीकार्य नहीं है। भारत में सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है। संविधान में भी स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि किसी भी धर्म का अपमान करना अथवा अपशब्द बोलना-लिखना अपराध है।
- विभा गुप्ता, बेंगलूरु
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समानता की शपथ भी जरूरी
'सभी धर्मों का सम्मान' संदेश देने के लिए पार्टी प्रवक्ताओं का सिर्फ निलंबन ही पर्याप्त नहीं होगा बल्कि सभी लोगों को यह शपथ लेनी होगी कि सभी धर्मों का सम्मान समान भाव से करेंगे। एक-दूसरे के धर्म के प्रति कटाक्ष नहीं करेंगे और देश में अमन-चैन व भाईचारे का माहौल कायम करने का प्रयास करेंगे।
- खेमू पाराशर, भरतपुर
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जाति व धर्म की राजनीति अनुचित
राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए सभी दलों ने धर्म के नाम पर लोगों को आपस में लड़ाया है। जाति और धर्म की राजनीति करने की अनुमति हमारा संविधान नहीं देता। हालांकि आजादी के बाद से सभी दल जाति और धर्म की राजनीति करके ही सत्ता में आते रहे हैं। हमारे देश की एकता-अखण्डता को दांव पर लगाकर जो सत्ता हासिल कर रहे हैं वे हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग की अवहेलना कर रहे हैं।
- रणजीत सिंह भाटी, राजाखेड़ी, मंदसौर (म.प्र.)
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अपराध के लिए सख्त हो सजा
जनप्रतिनिधियों एवं राजनीतिक दलों के द्वारा साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाले विचार प्रकट करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। किसी भी धर्म के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने, द्वेष भाव फैलाने और दूसरे धर्म के खिलाफ टिप्पणी करने किसी धर्म या प्रतीकों के खिलाफ टिप्पणी करने से परहेज करना ही उचित है। सभी धर्मों का सम्मान ही धार्मिक सहिष्णुता है।
- खुशवन्त कुमार हिण्डोनिया, चित्तौड़गढ़
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समस्या का यह समाधान नहीं
पार्टी के प्रवक्ताओं को निलंबित करने से ही समस्या का निदान नहीं होने वाला। देश में जहर घोल रहे प्रवक्ताओं के खिलाफ पुलिस में एफआइआर भी दर्ज कराई जानी चाहिए। चाहे वह किसी भी पार्टी का नेता या प्रवक्ता हो। फिलहाल तो यह हो रहा है कि जो नेता या प्रवक्ता जितना समाज में जहर घोलने का काम करेगा वह उतने बड़े सम्मान का हकदार होने लगा है। हर धर्म को सम्मान देना चाहिए चाहे वह किसी का भी धर्म हो। ऐसे मामलों में सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
- अब्दुल रहीम, राजनांदगांव, छग
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धार्मिक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं
देश में धार्मिक टिप्पणियों से माहौल गरमाया हुआ है। हमारे देश में सभी धर्मों और मतों का सम्मान किया जाता रहा है। धर्म को टारगेट करती हुई टिप्पणियां लोगों की भावनाएं आहत तो करती ही हैं, आपसी सद्भाव का माहौल भी खत्म कर सकती हैं। ऐसे में धार्मिक टिप्पणी चाहे कोई भी करे वह बर्दाश्त करने योग्य नहीं है। ऐसा करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
-सुदेश बिश्नोई, श्रीगंगानगर
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उचित है कार्रवाई
सभी राजनीतिक दलों को सबसे पहले पूरी तरह से धर्मनिरपेक्षता का पालन करना चहिए। किसी भी सदस्य के मन में अगर किसी एक धर्म को लेकर भेदभाव की भावना होगी तो पार्टी धर्मनिरपेक्ष तरीके से कार्य नहीं कर पाएगी। इसलिए अगर कोई भी कार्यकर्ता किसी धर्म का सम्मान नहीं करता है या उसके खिलाफ गलत सोच रखता है तो उसके निलंबन में कोई बुराई नहीं है।
- सारिका सिंह, रायपुर, छत्तीसगढ़