
hawa mahal
- गोविन्द चतुर्वेदी
प्रिय कटारिया जी,
सादर नमस्कार
कल के अखबार में प्रकाशित एक खबर ‘खासाकोठी से कलेक्ट्रेट तक बने एलिवेटेड रोड’ पढ़ी। उस खबर से पता चला कि, आप जयपुर के प्रभारी मंत्री हैं। वर्ना तो पहले-पहले जयपुर में कई बड़े हादसे हो गए, कहीं आपका जिक्र तक नहीं आया। हाल ही में रामगंज में हुए फसाद, जिसमें दो लोग मारे गए, के वक्त भी कहीं आपका दौरा पढऩे को नहीं मिला। न प्रभावित क्षेत्र में और ना ही पीडि़तों के घरों पर। खैर इस बात के लिए आपका आभार कि आपने शहर के विकास की चिन्ता की। यहां के जनप्रतिनिधियों की बैठक बुलाई। वर्ना बिना उस बैठक के भी जयपुर में विकास के गाने तो खूब बज रहे हैं। शहर की सडक़ों पर चलने वाले वाहनों और उन्हें चलाने वालों के ‘श्री मुख’ से इन तरानों को खूब सुना जा सकता है। आपने जिन जन प्रतिनिधियों को इस बैठक में बुलाया वे शायद यही सुर-आलाप लगाकर आपको नहीं सुना पाए हों। सुनना हो तो शहर के तमाम वार्ड मेम्बरों की एक बैठक बुला लीजिए। शायद वे बता सकें कि जयपुर कितना स्मार्ट बन रहा है, बन गया है?
कटारिया साहब, उदयपुर को क्या चाहिए, यह आपसे ज्यादा कौन बता सकता है? जयपुर में अब गिरधारी लाल भार्गव, उजला अरोड़ा और श्रीराम गोटेवाला तो नहीं हैं लेकिन उनकी उम्र के बहुत से लोग अभी होंगे जो यह बता सकते हैं कि, इस शहर को कहां-क्या चाहिए? जब कलक्ट्री से आकाशवाणी तक फ्लाईओवर बनाने की बात थी तब तो लाख विरोध के बावजूद आपकी ही सरकार ने रेलवे स्टेशन से पोलो विक्ट्री तक फ्लाईओवर बना दिया। अब जब उस पर कव्वे भी नहीं उड़ रहे हैं तब बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों को एलिवेटेड रोड याद आ रही है। कम से कम आप तो इस शहर पर महरबानी करिए। एलिवेटेड रोड बनाने में किसी बड़ी कम्पनी को काम मिल सकता है, जाने-अनजाने लोगों में बड़ा लेन-देन हो सकता है लेकिन इस सडक़ पर चलने वालों को कितनी राहत मिलेगी? बेहतर होगा कि, आप एलिवेटेड रोड का ठेका देने के बजाय किसी बड़े अफसर को तीन जिम्मेदारियां दें। पहली सीकर रोड के ही पाईंट से गवर्नमेंट हॉस्टल तक इस सडक़ पर एक भी छोटा-बड़ा वाहन पार्क नहीं होगा। आप दिन में कभी इस सडक़ पर जाकर देखिए। आपको सरकारी, गैर सरकारी, रोडवेज से लेकर प्राइवेट बसें तक पार्क हुई नजर आएंगी।
आप चल नहीं पाएंगे सडक़ पर। फिर दूसरे खासाकोठी फ्लाईओवर के नीचे एक अण्डर पास बनवा दीजिए। रेलवे स्टेशन से सिंधी कैम्प की तरफ आने-जाने के लिए। अभी आधा मिनिट भी ट्रेफिक चल नहीं पाता। पैदल वालों की आवा-जाही से। और तीसरे अण्डरपास बनाने के बाद, इस क्रासिंग पर ६ फीट ऊंची दीवार बनवा दीजिए। दस दिन में आपको लग जाएगा कि यहां किसी एलिवेटेड रोड की जरूरत नहीं है। शहर के बुजुर्गों को बुलाकर आप सीधे बात करेंगे तो वे उतने से खर्च में पूरे जयपुर के लिए ऐसे सुझाव दे देंगे जितने में आपका नगर निगम एक पावर पाईंट प्रजेंटेशन या डीपीआर बनवाता है। और यह सब करने से पहले आप पूरे जयपुर का एक दौरा जरूर कर लीजिए। गृहमंत्री की तरह नहीं, एक आम आदमी की तरह। फिर शायद ही कोई अफसर आपको चला पाए! यदि आप ऐसा कर पाए तो सवाई जयसिंह के बसाए २९० साल पुराने इस शहर पर आपका बड़ा उपकार होगा। बड़े-बड़े ठेकेदार भले आपको भूल जाएं पर शहर की जनता आपको सालों याद रखेगी। नहीं तो उल्टे-सीधे कामों के ठेके उठते रहेंगे, स्मार्ट सिटी का पैसा ठिकाने लगता रहेगा और कभी भारत का पेरिस यह खूबसूरत शहर अपनी विरासत खो देगा।
सादर

Updated on:
22 Sept 2017 01:48 pm
Published on:
22 Sept 2017 01:44 pm
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