सवाल उठता है कि आखिर इन गाड़ियों को फिटनेस सर्टिफिकेट कैसे मिल जाता है? ऐसा नहीं है कि एम्बुलेंस सेवाओं के लिए कोई मानक तय नहीं है, लेकिन इनकी सख्ती से निगरानी नहीं हो रही। जीपीएस ट्रैकिंग, किराए का नियंत्रण, प्रशिक्षित स्टाफ की अनिवार्यता और रीयल-टाइम रिपोर्टिंग जैसी व्यवस्था होनी ही चाहिए। समय-समय पर एम्बुलेंस वाहनों का निरीक्षण भी होना जरूरी है ताकि इनकी खामियों को दूर किया जा सके।