लोकतंत्र की इस ताकत की कमजोरी का यह चिंताजनक उदाहरण ही कहा जाएगा, जिसमें विधानसभा में पूछे गए माननीयों के सवालों के जवाब अभी तक अनुत्तरित हैं। आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान में सोलहवीं विधानसभा के तीन सत्रों में 19,744 प्रश्न लगे, जिनमें 1,844 प्रश्नों के जवाब का अभी तक इंतजार है। एक तरह से हर दस में से एक सवाल का जवाब नहीं मिल सका है। सीधे तौर पर यह जनप्रतिनिधियों और जनता दोनों की ही अनदेखी समझी जानी चाहिए।