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तेल, ताकत और ट्रंप: अंतरराष्ट्रीय नियमों का अंत?

अमरीका दुनिया को यह ट्यूशन देने की कोशिश कर रहा है कि कार्रवाई उसकी आत्मरक्षा का विस्तारित रूप है और कुछ नहीं। हालांकि इसके पक्ष में उसके पास कोई साक्ष्य नहीं है।

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जयपुर

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Opinion Desk

Jan 06, 2026

-डॉ. रहीस सिंह, अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार

एक संप्रभु देश के चुने हुए राष्ट्रपति की किसी दूसरे देश द्वारा गिरफ्तारी और फिर उस देश के राष्ट्रपति का यह घोषणा करना कि उस देश पर शासन हम करेंगे, इस कार्रवाई को किस श्रेणी में रखा जाए? यह न संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुच्छेदों के अधीन सही ठहराई जा सकती है और न ही किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय कानून की परिधि में आती है। डॉनल्ड ट्रंप की ओर से 'ऑपरेशन एबसॉल्यूट रिजाल्व' के तहत वेनेजुएला पर कार्रवाई करना, उनके कमांडोज द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को घसीटते हुए बाहर लाना और फिर ट्रंप का सोशल मीडिया पर हथकड़ी में मादुरो की फोटो पोस्ट करना, यह किस तरह का संदेश है? क्या वेनेजुएला में हुई कार्रवाई अपवाद तक सीमित रहेगी या फिर यह एक नजीर की तरह सामने आएगी, जिसे अमरीका सेट कर रहा है?

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस यह मान रहे हैं कि 'अमरीका की कार्रवाई खतरनाक नजीर बन सकती है।' यह सच है लेकिन इसके आगे क्या? क्या यह 21वीं सदी की सच्चाई बनने जा रही है? हालांकि अमरीका के अंदर से भी इस कार्रवाई के खिलाफ आवाज आ रही है। यही कि बिना युद्ध की औपचारिक घोषणा या बिना कांग्रेस की अनुमति की गई सैन्य कार्रवाई संवैधानिक रूप से गलत है, लेकिन प्रश्न यह उठता है यदि यह गलत है तो क्या डॉनल्ड ट्रंप के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी? नहीं। कार्रवाई तो तब भी नहीं हुई थी जब जॉर्ज बुश जूनियर ने रासायनिक हथियारों का बहाना बनाकर बगदाद (इराक) का ध्वंस किया था और सद्दाम हुसैन का खात्मा। परंतु क्या वहां से कोई रासायनिक हथियार मिला था? नहीं। फिर भी दुनिया चुप रही। यदि ऐसा न होता तो पूरी दुनिया बार-बार गुलाम बनने की प्रक्रिया से न गुजरी होती और साम्राज्यवादी ताकतों ने उसे बार-बार रौंदा न होता।

खैर, इतिहास तो ऐसे ही स्वयं को दोहराता है। तो क्या ट्रंप यह संदेश देने की कोशिश तो नहीं कर रहे हैं कि यही उनका 'मागा' (मेक अमरीका ग्रेट अगेन) प्लान है और यही 'अमरीका फस्र्ट' की राह? ट्रंप दावा कर रहे हैं कि वेनेजुएला सरकार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी। वहां से उनके देश के खिलाफ साजिशें रची जा रही थीं। वे यह भी आरोप लगाते हैं कि वेनेजुएला सरकार नार्को आतंकवादी नेटवर्क का समर्थन कर रही थी और अमरीका में ड्रग्स भेज रही थी। उनकी नजर मे वेनेजुएला में लोकतंत्र खत्म हो चुका है और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो रहा था लेकिन मानवाधिकारों का उल्लंघन तो उनके पाकिस्तानी मित्र असीम मुनीर के यहां भी हो रहा है। क्या किया उन्होंने? उसे तो वाइट हाउस में बैठाकर लंच और डिनर कराया गया। वेनेजुएला… और अमरीका के खिलाफ साजिश, यह दावा मजाक सा नहीं लगता। वे यह भी दावा करते हैं कि राष्ट्रपति मादुरो अवैध गतिविधियों और हिंसा को बढ़ावा दे रहे थे। संभव है ऐसा हो, लेकिन इसके लिए आपको कार्रवाई के लिए किसने अधिकृत किया? संयुक्त राष्ट्र ने? सुरक्षा परिषद में हुए निर्णय ने? अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने? अमरीकी कांग्रेस ने? इनमें से किसी ने नहीं। फिर किसने? ट्रंप की अंतररात्मा ने या फिर अमरीका के इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेस ने।

दरअसल अमरीका दुनिया को यह ट्यूशन देने की कोशिश कर रहा है कि कार्रवाई उसकी आत्मरक्षा का विस्तारित रूप है और कुछ नहीं। हालांकि इसके पक्ष में उसके पास कोई साक्ष्य नहीं है। संयुक्त राष्ट्र का चार्टर स्पष्ट रूप से आर्टिकल 2(4) में कहता है कि किसी अन्य राज्य पर बल प्रयोग तभी किया जा सकता है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अनुमति दी हो या जब आत्मरक्षा का स्पष्ट प्रमाण मौजूद हो। यहां तो दोनों ही नहीं थे। तो क्या ट्रंप विश्व व्यवस्था को अपनी मुट्ठी में करने के लिए गेम खेल रहे हैं? दरअसल वेनेजुएला पर डॉनल्ड ट्रंप की गिद्ध दृष्टि काफी पहले से लगी हुई है। वेनेजुएला ही नहीं, उनकी नजर हर उस देश या द्वीप पर है जहां तेल, गैस या रेयर अर्थ जैसे बहुमूल्य खनिज हैं। वे हर उस देश को इसी तरह से धमका रहे हैं जहां से उन्हें प्राकृतिक संपदा हासिल हो सकती है। अमरीका के अधिकारी तो खुलेआम यह ऐलान करते हुए देखे गए हैं कि वेनेजुएला का तेल वाशिंगटन का है। यही इस खेल के केंद्र में है। दुनिया जानती है कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। थोड़ा पीछे जाकर देखें तो 1999 में वेनेजुएला में ह्यूगो शावेज सत्ता में आए और उन्होंने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इससे अमरीकी कंपनियों का खेल बिगड़ गया। ह्यूगो शावेज के खिलाफ अब षड्यंत्र होना था, 2002 में उनके तख्तापलट की विफल कोशिश हुई। 2013 में शावेज की मृत्यु के बाद निकोलस मादुरो वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने। उनका पैटर्न वही रहा, जिसे शावेज ने सेट किया था। अब अमरीका के असल सत्ताधारी अर्थात इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स का सब्र टूटने लगा क्योंकि वह तो यही मान रहा था कि वेनेजुएलाई तेल वाशिंगटन का है। ट्रंप स्वयं कारोबारी हैं इसलिए जब वे सत्ता में आए तो उन्हें औरों की अपेक्षा इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स की आवाज अधिक सुनाई दी। फलत: उन्होंने 2017 में वेनेजुएला के तेल पर प्रतिबंध लगा दिए। 2019 में इन्हें और कठोर बनाया ताकि वेनेजुएला अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने कच्चे तेल को न बेच पाए। उसे दिक्कतें हुई भी लेकिन वह झुका नहीं।

जब ट्रंप दूसरी बार सत्ता में आए तो उन्होंने मादुरो का गेम ओवर करने का निर्णय ले लिया। फिलहाल वेनेजुएला में आपात स्थिति लागू है। आगे क्या होगा, यह वक्त तय करेगा, लेकिन इसने दुनिया के सामने कुछ प्रश्न तो छोड़ ही दिए हैं? यही कि ट्रंप का यह कृत्य क्या कुछ देशों की निंदा तक ही सीमित रहेगा या फिर यह किम जोंग के उन शब्दों की परिधि तक जाएगा जहां वे कहते हुए दिख रहे हैं कि मेरे दोस्त को छोड़ो वरना विश्व युद्ध होगा।