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कुलिश जी के आर्थिक चिंतन का मूल सरोकार व्यवस्था की जटिलताओं को सरल बनाकर जनहित का रास्ता तलाशना रहा। कालाधन और कर चोरी को वे केवल वित्तीय समस्या नहीं बल्कि व्यवस्था की विकृति मानते थे। आयकर समाप्त करने का उनका प्रस्ताव किसी सनसनी या तात्कालिक राहत का विचार नहीं, बल्कि एक प्रयोगात्मक सोच थी- जिससे ईमानदार कमाई को प्रोत्साहन मिले, उत्पादनशील निवेश बढ़े और कर चोरी की मानसिकता स्वत: कमजोर पड़े। उनके मन में यह विश्वास था कि नागरिक पर भरोसा और आर्थिक स्वतंत्रता से समाज शिक्षा, स्वास्थ्य व सृजनात्मक क्षेत्रों में स्वैच्छिक भागीदारी बढ़ाएगा और राष्ट्र की आर्थिक ऊर्जा मुक्त होगी।
Published on:
09 Mar 2026 01:28 pm
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