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खूबसूरती का पर्याय पौराणिक चौमासी-केदारनाथ ट्रैक

इस ट्रैक की प्रासंगिकता केदारनाथ त्रासदी के बाद अचानक उस वक्त बढ़ी, जब सारे रास्ते बंद हो गए और घाटी में फंसे लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो गया।

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Gyan Chand Patni

Mar 15, 2022

खूबसूरती का पर्याय पौराणिक चौमासी-केदारनाथ ट्रैक

खूबसूरती का पर्याय पौराणिक चौमासी-केदारनाथ ट्रैक

संजय शेफर्ड
ट्रैवल राइटर और ब्लॉगर

पौराणिक महत्त्व की होते हुए भी वर्तमान में कुछ जगहें उतनी चर्चित नहीं रह पाईं, जितनी कभी थीं। ऐसी ही एक जगह है चौमासी, जिसे उखीमठ प्रखंड का आखिरी गांव कहा जाता है। यह वह गांव है, जहां पर जाकर सड़क समाप्त हो जाती है। इसी गांव से होकर केदारनाथ धाम के लिए एक वैकल्पिक पैदल मार्ग निकलता है, जिसे पौराणिक चौमासी-केदारनाथ ट्रैक के नाम से जाना जाता है।
इस ट्रैक की प्रासंगिकता केदारनाथ त्रासदी के बाद अचानक उस वक्त बढ़ी, जब सारे रास्ते बंद हो गए और घाटी में फंसे लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो गया। अंतत: गांव के चरवाहों की मदद ली गई और इसी ट्रैक से होकर आर्मी के जवान इस मंदिर तक पहुंचे और सैकड़ों लोगों को सुरक्षित बचाया जा सका। तभी से लोगों को इस जगह के बारे में पता चला और आवाजाही शुरू हुई। पिछले कुछ दिनों से मेरा भी इसी घाटी में रहना हो रहा है। उत्तराखंड के दूरदराज इलाके में स्थित इस गांव में पर्यटन तो न के बराबर है, पर पर्यटन स्थल बहुत सारे हैं। स्पष्टतौर पर कहा जाए, तो यह एक ऐसा गांव है जो अपने लिए हर दिन पर्यटन की संभावनाएं तलाश रहा है और इसी क्रम में हर दिन कुछ न कुछ नया करने की कोशिश में हैं। स्थानीय स्तर पर ट्रैक डवलपमेंट और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिहाज से कई महत्त्वपूर्ण कार्य हुए और गांव के लोगों ने 500 पेड़ लगाकर सेब का एक बागान भी विकसित किया है। यहां के युवाओं का मानना है कि पौराणिक चौमासी-केदारनाथ पैदल ट्रैक के विकसित होने से सैलानी उनके गांव तक आएंगे और रोजगार की तलाश में उन्हें अपना गांव छोड़कर बाहर नहीं जाना पड़ेगा। इसीलिए अपने स्तर पर इस जगह को विकसित करने का हर कोई प्रयास कर रहा है, जिसका असर सूक्ष्म रूप से ही सही दिखाई देने लगा है।
पिछले दो साल के प्रयास के बदौलत तकरीबन 450 से ज्यादा लोग सुरक्षित तरीके से ट्रैक कर चुके हैं और इसे विकसित करने की दिशा में इंडिया हाइक जैसी बड़ी कंपनियां भी दिलचस्पी दिखा रही हैं। पिछले साल इन्होंने तकरीबन 18 लोगों को ट्रैकिंग के लिए भेजा है और एनआइएम से प्रशिक्षण लेकर काम कर रहे सत्येन्द्र तिंदोरी ने सभी की सुरक्षित ट्रैकिंग कराई है। बस्तापैक एडवेंचर नामक एक संस्था भी इस घाटी को विकसित करने की दिशा में काफी दिलचस्पी दिखा रही है। इस जगह पर हाल में ही एक टूरिस्ट सेंटर भी स्थापित किया गया है, ताकि यहां आने वाले सैलानियों को घाटी के बारे में सही जानकारी मिल सके। लोग बताते हैं कि पहले चौमासी गांव से खाम बुग्याल व लिनचोली होते हुए ही केदारनाथ पहुंचा जाता था। बड़ी संख्या में ट्रैकर आज भी इस ट्रैक से केदारनाथ पहुंचते हैं। घाटी के लोग भी केदारनाथ जाने के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं।