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Patrika Opinion: कट्टरता के खिलाफ करें चौतरफा प्रहार

यह समझना होगा कि आर्थिक मदद मिलने पर कोई भी अपने नापाक इरादों को खतरनाक तरीके से अंजाम देने का दु:साहस भी कर सकता है। तालिबानी सोच रखने वाले संगठनों से यह उम्मीद भी नहीं की जा सकती कि वे प्रशिक्षण शिविरों में धार्मिक कट्टरता का पाठ नहीं पढ़ाएंगे।

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Patrika Desk

Sep 23, 2022

प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

देश के विभिन्न हिस्सों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआइ) के ठिकानों पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बाद केन्द्र सरकार ने यह साफ कर दिया है कि टेरर फंडिंग और देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त किसी भी व्यक्ति व संगठन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लगातार ये शिकायतें मिली रही थीं कि पीएफआइ प्रशिक्षण शिविरों के नाम पर धार्मिक कट्टरता फैलाने का काम कर रहा है। यह संगठन मध्य-पूर्व के देशों से मिल रही आर्थिक मदद के बूते समाज व देशविरोधी गतिविधियों को अंजाम देने में लगा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद एनआइए ने 2017 में ही इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की केन्द्रीय गृह मंत्रालय से सिफारिश की थी।

पिछले साल फरवरी में ही ईडी ने पीएफआइ और इसकी छात्र शाखा, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के पांच सदस्यों के खिलाफ मनी-लॉन्ड्रिंग के मामले में चार्जशीट दायर की थी। ईडी की जांच में पता चला था कि पीएफआइ का एक राष्ट्रीय पदाधिकारी खाड़ी देशों में बिजनेस डील की आड़ में पीएफआइ के लिए फंड जुटाता था। इस पर बड़ी रकम आपराधिक तरीकों से हासिल करने की बात भी सामने आई थी। यह भी कहा गया था कि इस संगठन के पास भारत में हवाला के जरिए पैसा आता है। हालांकि पीएफआइ इन आरोपों को आधारहीन बताता रहा है। यह समझना होगा कि आर्थिक मदद मिलने पर कोई भी अपने नापाक इरादों को खतरनाक तरीके से अंजाम देने का दु:साहस भी कर सकता है। तालिबानी सोच रखने वाले संगठनों से यह उम्मीद भी नहीं की जा सकती कि वे प्रशिक्षण शिविरों में धार्मिक कट्टरता का पाठ नहीं पढ़ाएंगे। दरअसल धर्म और विचारधारा के नाम पर अलगाव व आपसी वैमनस्य बढ़ाने में जो भी संगठन लगे हुए हैं उनकी गतिविधियों का खात्मा केवल इस तरह की कार्रवाई से ही संभव नहीं है। विभिन्न धर्म-समुदायों में सद्भाव बना रहे इसके लिए धर्मगुरुओं को ही आगे आना होगा। यह भी संदेश देना जरूरी है कि किसी भी धर्म व समुदाय को लेकर कट्टरता फैलाने वालों व देश की अखण्डता पर प्रहार करने वालों पर सदैव सख्ती की जाएगी।

चिंता तब होती है जब ऐसी कार्रवाई के विरोध में भी आवाज उठने लगती है। एनआइए और ईडी की कार्रवाई के दौरान और इसके बाद के विरोध प्रदर्शन इस बात के संकेत हैं कि ऐसे संगठन की जड़ें भी गहरी होती जा रही हैं। केरल में शुक्रवार को राज्यव्यापी बंद के आह्वान में हिंसा व तोड़फोड़ की घटनाएं तो यही बताती हैं कि समय रहते ऐसी गतिविधियों पर काबू पाना ही होगा।