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PATRIKA OPINION टेस्ट क्रिकेट को हरा-भरा रखने की सार्थक पहल

आइपीएल में ज्यादा धन मिलता है, इसलिए नेशनल टीम का हिस्सा बनने के बजाय कुछ खिलाड़ी इसे ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। यह नहीं भूलना चाहिए कि राष्ट्र ने ही क्रिकेट में उनके सितारे बुलंद किए हैं।

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Gyan Chand Patni

Mar 10, 2024

टेस्ट क्रिकेट को हरा-भरा रखने की सार्थक पहल

टेस्ट क्रिकेट को हरा-भरा रखने की सार्थक पहल

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) ने ऐसे खिलाडिय़ों की मैच फीस 15 लाख रुपए से बढ़ाकर 45 लाख रुपए करने का फैसला किया है, जो हर सीजन में कम से कम सात टेस्ट मैच खेलेंगे। इन्हें 4.5 करोड़ रुपए की मोटी रकम मिलेगी जो एक सीजन में 10 टेस्ट मैचों में हिस्सा लेंगे। भारत में टेस्ट क्रिकेट को प्रोत्साहन के लिए यह सार्थक पहल है। ज्यादातर क्रिकेट विशेषज्ञ इस खेल के तीनों प्रारूपों (टेस्ट, 50-50, टी-20) में टेस्ट को असली क्रिकेट मानते हैं। उनके मुताबिक क्रिकेट की तमाम तकनीकी खूबियां टेस्ट मैच में ही देखने को मिलती हैं। पांच दिन का यह प्रारूप खिलाडिय़ों का धैर्य, एकाग्रता से लेकर मैदान में लंबे समय तक जूझने के जज्बे तक, सब कुछ 'टेस्ट' करता है। पहले वनडे (50-50) और उसके बाद टी-20 के रूप में रंग-बिरंगे फटाफट क्रिकेट की शुरुआत ने 147 वर्ष से खेले जा रहे टेस्ट क्रिकेट की लोकप्रियता पर आई आंच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) के माथे पर भी बल पड़े हुए हैं। क्रिकेट की यह ऐतिहासिक विरासत अब इसके ज्यादातर शेयरधारकों के लिए घाटे का खेल साबित हो रही है। वनडे और टी-20 के मुकाबले मैदान में इसके दर्शक भी घट रहे हैं और प्रायोजक भी। टेस्ट मैचों के शेयरधारक घाटे की भरपाई के लिए वल्र्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट्स से जुड़ रहे हैं।

भारत में भी टेस्ट मैचों की कमोबेश यही हालत है। तेज रफ्तार जीवन शैली के कारण क्रिकेट प्रेमियों को वनडे और टी-20 ज्यादा रोमांचित कर रहे हैं, जहां कुछ ही घंटों में फैसला हो जाता है। पिछले दिनों चिंताजनक पहलू यह उभरा कि कुछ भारतीय खिलाड़ी सिर्फ इसलिए भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज का हिस्सा नहीं बने, क्योंकि उन्हें आइपीएल की तैयारी करनी थी। अपने देश के लिए खेलना हर खिलाड़ी का कत्र्तव्य है। कोई भी फ्रेंचाइजी क्रिकेट, भले वह आइपीएल हो, इससे ऊपर नहीं हो सकता।

आइपीएल में ज्यादा धन मिलता है, इसलिए नेशनल टीम का हिस्सा बनने के बजाय कुछ खिलाड़ी इसे ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। यह नहीं भूलना चाहिए कि राष्ट्र ने ही क्रिकेट में उनके सितारे बुलंद किए हैं। टेस्ट मैच खेलने से इनकार करने वाले दो खिलाडिय़ों का नाम सालाना रिटेनर्स की लिस्ट में शामिल नहीं कर बीसीसीआइ पहले ही संदेश दे चुका है कि राष्ट्रीय कत्र्तव्य के मोर्चे पर आनाकानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब रेड बॉल (टेस्ट) और फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बीच धन के अंतर को कम कर उसने स्पष्ट कर दिया है कि वह पांच दिन के क्रिकेट को हरा-भरा रखने के प्रति गंभीर है। मुमकिन है इसके लिए कुछ और कदम उठाए जाएं।