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मुस्लिम महिलाओं के लिए सुकून भरे फैसले

इस नई नीति से एकल महिला, विधवा, तलाकशुदा, अविवाहित महिला को हज यात्रा (खुदा की इबादत) का अधिकार मिलेगा।

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Sunil Sharma

Jan 09, 2018

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- नजमा खातून, स्वतंत्र टिप्पणीकार

मुस्लिम कानून में विवाह, तलाक, मेहर, जायदाद सम्बंधी विस्तृत जानकारी एवं महिलाओं को पुरुषों के समकक्ष सम्मानजनक अधिकार दिए गए हैं। तलाक को ***** माना गया है और विषम परिस्थितियों में विशेष प्रक्रिया के चलते तलाक जायज बताया है। परंतु समाज के अशिक्षित वर्ग द्वारा अर्थ को जाने बिना मनमाने तरीके से दुरुपयोग करने के कारण सम्पूर्ण समुदाय पर प्रश्नचिह्न लगता है। खासतौर पर महिला के न्याय मांगने पर उनका व्यक्तिगत मामला मानकर रिपोर्ट दर्ज न कर टरका दिया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को अमान्य घोषित कर मुस्लिम महिलाओं को राहत दी है। उम्मीद है कि इससे कम से कम चंद मिनटों में व्हाट्सअप, फोन या किसी भी प्रकार मौखिक रूप से तीन तलाक कहकर महिला को विषम परिस्थितियों में छोडऩे जैसी घटनाओं पर रोक लगेगी। विधेयक के अनुसार तुरंत कार्रवाई व सजा के भय से कई परिवार टूटने से बचेंगे एवं बच्चों का भविष्य भी अंधकारमय होने से बचेगा। सर्वाधिक बुरा प्रभाव परिवार के टूटने से बच्चों पर पड़ता है। विघटित परिवारों के बच्चे कुंठित होकर समाज में सामंजस्य नहीं बैठा पाते। अधिकतर लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है, वहीं समाज के एक वर्ग को आपत्ति है कि इस नए प्रावधान में मुस्लिम पुरुष के अधिकारों का हनन होगा।

इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि प्रस्तावित विधेयक के प्रावधानों का दुरुपयोग नहीं होगा? और जब तीन तलाक अमान्य ही है तो फिर तीन साल की सजा किस बात की? पुरुष यदि जेल जाता है तो बाकी के परिवार की देखभाल व हर्जाना कैसे दे पाएगा? पारिवारिक व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो जाएगी। इसमें पारिवारिक सुलह-समझाइश की व्यवस्था जरूरी है। बहरहाल राजनीतिकरण की आड़ में ही सही मुस्लिम महिलाओं के लिए मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 सुकून भरा है।

इसके अलावा नई हज नीति में ४५ वर्ष या इससे ऊपर की महिला अब बिना महरम के हज कर सकेंगी। हज यात्रा में महरम की पाबंदी हटा दी गई है। पहले महिला आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद बिना महरम के हजयात्रा से वंचित रह जाती थीं। इस नई नीति से एकल महिला, विधवा, तलाकशुदा, अविवाहित महिला को हज यात्रा (खुदा की इबादत) का अधिकार मिलेगा। वे भी अब समूह में बिना किसी परेशानी या पाबंदी के पूरे आत्मविश्वास के साथ हजयात्रा कर सकेंगी। यकीनन ये प्रावधान महिला सशक्तीकरण को मजबूती प्रदान करेंगे।