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Patrika Opinion: मानसून ने जगाई उम्मीद, अब सरकार से आस

मानसून के कम या ज्यादा होने से कृषि के साथ इससे जुड़े दूसरे क्षेत्र भी प्रभावित होते हैं। देश की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान 14 प्रतिशत है, वहीं रोजगार में 42 प्रतिशत।

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Patrika Desk

May 26, 2023

Patrika Opinion: मानसून ने जगाई उम्मीद, अब सरकार से आस

Patrika Opinion: मानसून ने जगाई उम्मीद, अब सरकार से आस

देश के किसानों को ही नहीं, हर वर्ग को मानसून का इंतजार रहता है। पेड़-पौधे ही नहीं, पूरा जीव जगत प्रकृति के इस वरदान की वजह से ही फल-फूल रहा है। इस लिहाज से भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) की शुक्रवार को जारी भविष्यवाणी महत्त्वपूर्ण है। आइएमडी ने दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य रहने का पूर्वानुमान जताया है, लेकिन कहा है कि जून माह के दौरान सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। संपूर्ण अवधि में सामान्य मानसून का पूर्वानुमान सभी को राहत देने वाला है।

आइएमडी ने अप्रेल में भी मानसून को लेकर जो पूर्वानुमान जारी किया था, उसमें इस वर्ष सामान्य मानसून रहने की संभावना व्यक्त की थी। अब फिर आइएमडी ने दूसरी बार मानसून सामान्य रहने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है, जिससे आशा की जानी चाहिए कि मानसून में ज्यादा उलट-फेर नहीं होगा। इससे किसानों को खेती के लिए भरपूर पानी तो मिलेगा ही, जल स्रोतों में फिर से पानी आएगा और धरती की प्यास बुझने के साथ भूमिगत जल स्रोतों तक भी पानी जाएगा। सबको पता है कि पानी पृथ्वी पर जीवन का मूल है। इसके बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। फिर भारत में तो 55 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि बारिश पर ही निर्भर है। मानसून के कम या ज्यादा होने से कृषि के साथ इससे जुड़े दूसरे क्षेत्र भी प्रभावित होते हैं। देश की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान 14 प्रतिशत है, वहीं रोजगार में 42 प्रतिशत। यही वजह है कि कृषि का मोर्चा डगमगाने के साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होती है। कृषि का महत्त्व इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि कोरोनाकाल में जब दूसरे क्षेत्रों की स्थिति खराब थी, तो भारतीय कृषि ने ही देश की अर्थव्यवस्था को संभाला था। जिन देशों ने कृषि की उपेक्षा की, वे कोरोनाकाल में बड़ी मुश्किल में फंस गए थे। कृषि की बजाय पर्यटन पर भरोसा करने वाले श्रीलंका की क्या स्थिति हुई, यह सभी को पता है। इसलिए अनिश्चितता के बावजूद सामान्य मानसून का पूर्वानुमान पूरी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है, बशर्ते हम इसका सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएं।

अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह मानसून के इस वरदान का सही उपयोग करने की जमीन तैयार करे। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि किसानों को समय रहते गुणवत्तापूर्ण बीज और खाद मिल जाए। अक्सर लोग खाद-बीज के लिए भी भटकते नजर आते हैं। बारिश के पानी की बर्बादी को रोकने के लिए सरकारी स्तर पर भी कई योजनाएं बनाई गई हैं। मानसून में एक बार फिर सरकार की इन योजनाओं की परीक्षा होने वाली है।