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Patrika Opinion: कश्मीर में नापाक मंसूबों का नया खुलासा ज्यादा गंभीर

पाकिस्तान में जमे आतंकवादी संगठन पहले कश्मीर के युवकों को बहला-फुसला कर अपने साथ कर लेते थे। अब कश्मीरी युवकों का आतंकवाद से मोहभंग हो चुका है। घाटी में इन संगठनों की भर्तियां बंद हो गई हैं। ऐसे में कश्मीर में गड़बड़ी फैलाने के लिए पकिस्तान अपने सेवानिवृत्त फौजियों को झोंक रहा है।

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Nitin Kumar

Nov 26, 2023

Patrika Opinion: कश्मीर में नापाक मंसूबों का नया खुलासा ज्यादा गंभीर

Patrika Opinion: कश्मीर में नापाक मंसूबों का नया खुलासा ज्यादा गंभीर

आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की कथनी और करनी का अंतर फिर उजागर हुआ है। इस बार मामला ज्यादा गंभीर है। भारतीय सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी का दावा है कि जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ जिलों में सक्रिय 20-25 आतंकियों में पाकिस्तान के सेवानिवृत्त फौजी शामिल हैं। पाकिस्तान में जमे आतंकवादी संगठन पहले कश्मीर के युवकों को बहला-फुसला कर अपने साथ कर लेते थे। अब कश्मीरी युवकों का आतंकवाद से मोहभंग हो चुका है। घाटी में इन संगठनों की भर्तियां बंद हो गई हैं। ऐसे में कश्मीर में गड़बड़ी फैलाने के लिए पकिस्तान अपने सेवानिवृत्त फौजियों को झोंक रहा है।

दरअसल, 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर की आबो-हवा काफी बदल चुकी है। भारतीय सेना पर पत्थर फेंकने वाली भीड़ गायब है। शांति बहाली का असर केसर की क्यारियों, डल झील को घेरकर खड़े पहाड़ों से लेकर गुलमर्ग में फैली बर्फ तक महसूस किया जा सकता है। घाटी के पर्यटन उद्योग को नई ऑक्सीजन मिली है। यही तस्वीर पाकिस्तान की आंख की किरकिरी बनी हुई है। जम्मू-कश्मीर में निकट भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनाव ने भी उसकी बेचैनी बढ़ा रखी है। वह घाटी में गड़बड़ी फैलाने की साजिश में जुटा रहता है। भारत के साथ हुए अब तक के चारों सामरिक युद्ध में पाकिस्तान ने मात खाई, पर कश्मीर राग अलापना बंद नहीं किया जोकि अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुना ही नहीं जाता। बौखलाहट में पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में छद्म युद्ध जारी रखना चाहता है। वह पंजाब में भी ड्रोन भेजता रहता है, पर वहां भी उसके नापाक मंसूबों को जमीन नहीं मिल रही है। हमारे लिए चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि कुछ समय से आतंकी जम्मू-कश्मीर के आम लोगों के साथ हमारे सैनिकों को भी निशाना बना रहे हैं। पिछले हफ्ते राजौरी जिले की मुठभेड़ में सेना के दो अफसरों समेत पांच जवानों का शहीद होना बड़ा झटका है। आबादी वाले इलाकों के बजाय आतंकी अब घने जंगलों और गुफाओं में ठिकाने बना रहे हैं। मुठभेड़ के दौरान उन्हें बिलों से निकालना बड़ी चुनौती बन जाता है। यह चुनौती अनंतनाग के कोकेरनाग के जंगलों में हुई मुठभेड़ में भी सामने आई थी, जिसमें सेना के तीन जवान शहीद हुए थे।

आतंकियों के नए पैंतरों को देखते हुए उनकी कमर तोडऩे के लिए सेना को नई रणनीति बनाने पर काम करना होगा। उनके स्थानीय नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना जरूरी है, जो जंगलों या गुफाओं में उन्हें रसद और दूसरा सामान पहुंचाता है। देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले मुट्ठीभर आतंकियों के खतरनाक खेल पर हमेशा के लिए विराम जरूरी है।