20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Patrika Opinion: झंझावातों से जूझ रहे पाक के लिए मौका

भारत इस समय एससीओ का अध्यक्ष है। इस साल वह संगठन के कई सम्मेलनों-कार्यक्रमों की मेजबानी कर रहा है। पाकिस्तान के लिए पिछली कड़वाहटों को भुलाकर भारत के प्रति लचीला रुख दिखाने का यह अच्छा मौका है।

2 min read
Google source verification

image

Patrika Desk

Mar 26, 2023

Patrika Opinion: झंझावातों से जूझ रहे पाक के लिए मौका

Patrika Opinion: झंझावातों से जूझ रहे पाक के लिए मौका

नई दिल्ली में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वर्किंग ग्रुप की बैठक में पाकिस्तानी सेना के तीनों अंगों के प्रतिनिधियों का शामिल होना महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम है। पुलवामा हमले और कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के चार साल बाद यह पहला मौका है, जब पाकिस्तान के प्रतिनिधि किसी बैठक में शामिल होने भारत पहुंचे। हालांकि पिछले मंगलवार को दिल्ली में सैन्य चिकित्सा पर हुई एससीओ की बैठक में पाकिस्तान अपने अडिय़ल रुख के चलते शामिल नहीं हुआ था। बैठक से पहले भारत का गलत नक्शा दिखाने की कोशिश पर भारत ने उससे दो टूक कहा था कि या तो वह नक्शा सुधारे या बैठक से दूर रहे। पाकिस्तान के साथ दिक्कत यह है कि वह हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर राग अलापने के बहाने ढूंढता रहता है।

एससीओ का मकसद सदस्य देशों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ रणनीति और ऊर्जा क्षेत्र में परस्पर सहयोग बढ़ाना है। वर्किंग ग्रुप की बैठक में पाकिस्तानी प्रतिनिधियों के कश्मीर मुद्दा न उठाने से उनके देश के नरम पड़ते रुख के संकेत जरूर मिले हैं, पर यह रुख आगे भी कायम रहेगा, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। भारत इस समय एससीओ का अध्यक्ष है। इस साल वह संगठन के कई सम्मेलनों-कार्यक्रमों की मेजबानी कर रहा है। पाकिस्तान के लिए पिछली कड़वाहटों को भुलाकर भारत के प्रति लचीला रुख दिखाने का यह अच्छा मौका है। भारत अप्रेल-मई में होने वाले एससीओ के रक्षा मंत्रियों तथा विदेश मंत्रियों के सम्मेलन के लिए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी को न्योता भेज चुका है और जून में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी न्योता भेजने वाला है। चूंकि एससीओ में पाकिस्तान शामिल है, उसे न्योता भेजकर भारत अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता ही निभा रहा है। यानी अब बारी पाकिस्तान की दुनिया को यह बताने की है कि भारत के साथ रिश्तों को लेकर वह किस दिशा में बढ़ना चाहता है।

एससीओ आयोजनों के दौरान द्विपक्षीय बातचीत की ज्यादा गुंजाइश भले न हो, इसके लिए जमीन तो तैयार हो ही सकती है। आर्थिक संकट के साथ राजनीतिक झंझावात से जूझ रहे पाकिस्तान की जनता भारत के साथ बेहतर रिश्तों के पक्ष में है। वहां के अर्थशास्त्री भी मान रहे हैं कि भारत से कारोबारी रिश्ते तोडक़र पाकिस्तान ने अपना ही अहित किया है। वहां के हुक्मरान अब भी भारत विरोध के झुनझुने से जनता को बहलाना चाहते हैं, जबकि इससे न तो अब तक पाकिस्तान का भला हुआ है, न ही आगे होगा।