22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

उल्लू उवाच:

मैया जानती थी कलियुग में रुपए का खेल अंधेरे में चलेगा। सो उन्होंने मुझे वाहन बनाया जो रात में इधर-उधर उड़ लेता है

2 min read
Google source verification

image

Shankar Sharma

Nov 10, 2015

Opinion news

Opinion news

उल्लू बोला- भैयाजी! इस दुनिया में रुपया कमाने के दो ही तरीके हैं- या तो खुद उल्लू बन जाओ या किसी को उल्लू बनाओ। हमने कहा- भाई उल्लू । तुम्हारे तो मजे हैं। लक्ष्मी मैया के खास हो। जब चाहा माल मांग लिया। मैया तो बड़ी उदार है। जिस पर पसीज जाए उसके वारे-न्यारे कर देती हैं। उल्लू ने थोड़ा उदास होकर कहा- दूर के ढोल सुहावने लगते हैं। बैंक मैनेजर के पास तो तिजोरी की चाबी रहती है। करोड़ों रुपए उसके हाथों से इधर-उधर होते हैं पर इसका मतलब यह तो नहीं कि वह जब मन हो तिजोरी से रुपए निकाल ले। भैया रुपया चीज ही ऐसी है। चाहे मुनीम हो या सेठ।

उल्लू हो या मैया, धेलेे का भी हिसाब रखना पड़ता है। हमने बात टालते हुए पूछा- भाई पैसा कमाने वाली बात को जरा खोल कर समझाओ।वह बोला- देखो प्यारेलाल। अब वो जमाना नहीं रहा जब व्यापारी, कारखानेदार शुभ-लाभ के लिए काम करते थे। शुभ-लाभ का मतलब समझते हो या नहीं। हमने कहा- उल्लू भाई।

हमने सेठजी की गद्दियों पर शुभ-लाभ लिखा तो बहुत देखा है पर कभी इन लफ्जों पर गौर नहीं किया। उल्लू बोला- पहले व्यवसायियों के दिलों में तसल्ली समाई थी। वह उतना ही मुनाफा कमाते थे जितना शुभ हो लेकिन आजकल तसल्ली खत्म हो गई। अब चाहे सरकार हो या व्यापारी, उद्योगपति हो या कारखानेदार सबके सब चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी माल कूट कर अमीर बन जाए। इसके लिए वे हेराफेरी, मिलावट, बेईमानी, कम तौलना सब धंधे करते हैं। इससे जनता का विश्वास खत्म हो गया। जनता समझ नहीं पाती कि किस पर विश्वास करे किस पर ना करे।

हमने कहा- भाई समझ गए यह तो हुआ उल्लू बनाना और खुद उल्लू बन कर रुपया कैसे कमाया जा सकता है। उल्लू बोला- यह धंधा भी खूब चल रहा है। लोग पहले एक व्यवसाय खोलते हैं। इसमें लोगों का पैसा लगवाते हैं और एक दिन खुद को दिवालिया घोषित कर देते हैं यानी सिद्ध कर देते हैं कि कारोबार के मामले में वे उल्लू निकले। हमने एक और सवाल किया- उल्लू भाई। ज्यादातर देवताओं के वाहन पशु-पक्षी हैं जैसे इन्द्र का हाथी, रामदेव का घोड़ा, शीतला माता का गधा, गणपति का चूहा लेकिन लक्ष्मी मैया ने उल्लू क्यों चुना?

जो निशाचर है। उल्लू बोला- भैयाजी! मैया जानती थी कि कलियुग में रुपए का खेल अंधेरे में चलेगा। सो उन्होंने मुझे अपना वाहन बनाया जो रात में बड़े आराम से इधर-उधर उड़ लेता है। अंत में हम बोले- उल्लू भाई। कभी लक्ष्मी मैया को लेकर हमारे घर भी आओ। उल्लू ने कहा- भाई मैया को नेता, अफसर, ठेकेदार, दलाल चैन लेने दें तो तुम्हारे जैसे भुक् कड़ लोगों के घर भी आए। अभी तो यही ससुरे चैन नहीं लेने दे रहे।
राही