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पेपर लीक कांड: संदेह के घेरे में ‘सीबीएसई’ सिस्टम

सीबीएसई से पहले एसएससी के पेपर लीक हुए, फिर भी सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं के पेपर्स को बचाने के लिए कोई चाक चौबंद व्यवस्था नहीं की...
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Urukram Sharma

•

Mar 30, 2018

cbse

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केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई)की प्रतिष्ठा पेपर लीक होने के साथ ही कठघरे में खड़ी हो गई। लाख ढिंढोरा पीट लिया जाए कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन सवाल यह है कि बच्चों को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा? 10वीं में 16.38 लाख और 12वीं में 11.86 लाख बच्चों ने परीक्षा दी। 10वीं का गणित और 12वीं का अर्थशास्त्र का पेपर 200 से 30 हजार रुपए तक बाजार में बिक गया। परीक्षा से पहले पर्चा बाहर आ गया। बच्चों ने साल भर किस तरह से रात दिन एक करके तैयारी की। गणित का पेपर 10वीं का अंतिम पेपर था और बच्चों ने आगे के हिसाब से पूरा प्लान तैयार कर रखा था। 12वीं के बच्चों के लिए मई मध्य तक कई प्रतियोगी परीक्षाएं पूर्व निर्धारित हंै, जिनके जरिए बच्चों को अपना कॅरियर बनाना है। इनमें जेईई मेंस, नीट, सीपीटी, जेईई एडवांस, क्लेट आदि शामिल हैं। सीबीएसई के इन पेपर्स के लीक होने से बच्चों को जो आघात दिया है, उसे न तो सीबीएसई, ना ही मानव संसाधान मंत्रालय कभी भरपाई कर पाएगा।

प्रश्न यह है कि आखिर इतनी सुरक्षा के बाद पेपर लीक कैसे हो गया? कोई न कोई जयचंद तो सीबीएसई में ही है। उसे तलाशने की जरूरत है। जब बाहरी किसी व्यक्ति को पेपर की कोई जानकारी ही नहीं थी, तो साफ है कि सीबीएसई के ही किसी व्यक्ति ने ही चंद रुपयों के लालच में सारी परीक्षा प्रणाली और बोर्ड की साख को धू्मिल कर दिया? वैसे पेपर लीक की संभावना जिला स्टोरेज सेंटर से भी संभव है, क्योंकि यहां सात दिन पहले ही सील बंद पेपर भेज दिए जाते हैं। ऐसे में पुलिस द्वारा कोचिंग संचालकों और छात्रों से पूछताछ करना व उन्हें हिरासत में लेना एकदम सही कदम है, परंतु असली गुनहगार भी तो सामने आए। सीबीएसई से पहले एसएससी के पेपर लीक हुए, फिर भी सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं के पेपर्स को बचाने के लिए कोई चाक चौबंद व्यवस्था नहीं की। प्रश्न यह भी खड़ा होता है कि क्या गणित और अर्थशास्त्र का ही पेपर लीक हुआ या इससे पहले के सारे पेपर्स भी बाजार में आ गए थे? छात्रों और अभिभावकों को अंदेशा है कि पेपर्स तो सारे ही लीक हुए हैं। यदि यह अंदेशा सच निकला, तो करीब साढ़े 28 लाख बच्चों के लिए बहुत बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। ईमानदारी से सारे साल तैयारी करने वालों से ज्यादा नकलची बाजी मार जाएंगे। इससे घोर अन्याय और पाप कुछ नहीं होगा।

अवसाद में बच्चे किसी भी तरह का कोई अप्रिय कदम उठाने से नहीं चूकेंगे, उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? जब रिजल्ट आएगा, तब हमेशा अच्छे नंबर प्राप्त करने वाले छात्र से अधिक नकलची के नंबर आएंगे, तो क्या होगा? आखिर सरकार ने अब तक किसी अधिकारी को जिम्मेदार ठहराकर कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का यह कहना पर्याप्त है कि मैं भी अभिभावक हूं, दर्द समझता हूं , लेकिन दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। सीबीएसई की एक अलग वैल्यू है और इस तरह से बच्चों के साथ अन्याय होगा, तो देश के लिए बहुत बड़ी मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी।