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Patrika Opinion: हिंदी में मेडिकल शिक्षा को लेकर चुनौतियां कम नहीं

देशभर में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से मान्यता प्राप्त स्नातक स्तर का पाठ्यक्रम अंग्रेजी में है। सवाल यह है कि क्या हर राज्य इसका हिंदी में अलग अनुवाद करेगा? नीट-पीजी अंग्रेजी में होती है। क्या इस परीक्षा में बहुभाषी विकल्प दिया जाएगा?

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जयपुर

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Nitin Kumar

Sep 15, 2024

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राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा

हिंदी दिवस पर राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में भी शुरू करने की घोषणा हुई है। दो साल पहले मध्यप्रदेश इस दिशा में पहल करने वाला पहला राज्य बना था। बिहार में भी ऐसी ही तैयारियां चल रही हैं। शिक्षाशास्त्रियों का एक वर्ग भी लंबे समय से हिंदी या क्षेत्रीय भाषाओं में चिकित्सा शिक्षा पर जोर दे रहा है। इस वर्ग का मानना है मातृभाषा में चिकित्सा की पढ़ाई करने वालों में मरीजों के साथ संवाद में आत्मविश्वास ज्यादा होता है। चीन, रूस, जापान, जर्मनी आदि देशों का हवाला भी दिया जाता है, जहां स्थानीय भाषाओं में चिकित्सा की पढ़ाई होती है।

अच्छी बात है कि भारत के राज्यों में सरकारी स्तर पर मेडिकल कॉलेज हिंदी में पाठ्यक्रम शुरू कर रहे हैं। लेकिन इस सवाल का जवाब भी तलाशना जरूरी है कि हिंदी में पढ़ाई, मेडिकल के विद्यार्थियों में ज्यादा रुचि क्यों नहीं जगा पाई है? हालत यह है कि मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में आज भी 70 फीसदी विद्यार्थी अंग्रेजी में पढ़ाई कर रहे हैं। मेडिकल शिक्षा में अंग्रेजी भाषा के समर्थकों के इस तर्क से पूरी तरह से सहमत नहीं हुआ जा सकता कि हिंदी में पढ़ाई से वैश्विक वैज्ञानिक क्षेत्र में भारतीय स्वास्थ्य पेशेवरों की प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। वैश्विक वैज्ञानिक क्षेत्र में कई काम स्थानीय भाषाओं में भी हो रहे हैं। जब चीन और जर्मनी स्थानीय भाषाओं में मेडिकल शिक्षा देकर विज्ञान में दबदबा कायम रख सकते हैं तो हिंदी के सहारे भारत भी उसी रास्ते पर आगे बढ़ सकता है। मध्यप्रदेश सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई का मकसद ग्रामीण इलाकों और हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए राह आसान बनाना है। क्या यह राह सिर्फ स्नातक स्तर के लिए आसान बनाई गई है? क्योंकि पीजी मेडिकल पाठ्यक्रम (एमडी/एमएस/डीएनबी) फिलहाल सिर्फ अंग्रेजी में हैं। देशभर में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से मान्यता प्राप्त स्नातक स्तर का पाठ्यक्रम अंग्रेजी में है। सवाल यह है कि क्या हर राज्य इसका हिंदी में अलग अनुवाद करेगा? नीट-पीजी अंग्रेजी में होती है। क्या इस परीक्षा में बहुभाषी विकल्प दिया जाएगा? क्या हिंदी में पढ़ाई डॉक्टरों को विशेष राज्य तक सीमित करेगी और अंतर-राज्यीय नौकरियों में उनके अवसर घटाएगी? राज्यों में हिंदी या स्थानीय भाषाओं में चिकित्सा शिक्षा देने की नीति पर अमल के साथ ऐसे कई सवालों और चुनौतियों के तर्कसंगत जवाबों की जरूरत है।

अपनी भाषा में मेडिकल शिक्षा हमारे लिए गर्व की बात है, लेकिन अंग्रेजी को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। खास तौर से तब, जब ग्लोबल विलेज की प्रबल होती अवधारणा में अंग्रेजी सबसे स्वीकार्य भाषा है।