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Patrika Opinion: ई-कॉमर्स के तेजी से कसते शिकंजे पर वाजिब चिंता

भारत में तेजी से बढ़ रहे ई-कॉमर्स को लेकर केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की इस चिंता को भी इसी संदर्भ में देखना चाहिए जिसमें उन्होंने कहा है कि ऑनलाइन कारोबार छोटे विक्रेताओं के ऊंचे मार्जिन व ऊंची कीमतों वाले उत्पादों को खा रहा है। ये ऐसे उत्पाद हैं जिनसे छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी चलती है।

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ऑनलाइन खरीद-बिक्री यानी ई-कामर्स ने पिछले सालों में कारोबार के तौर-तरीकों में काफी बदलाव ला दिया है। यह भी कहा जाने लगा है कि इंटरनेट की घर-घर पहुंच रखने वाले भारत में अब ऑनलाइन शॉपिंग विलासिता नहीं, बल्कि जरूरत बन गई है। एक तथ्य यह भी है कि ई-कॉमर्स कंपनियों के इस फैलते कारोबार ने खुदरा कारोबार के लिए कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। भारत में तेजी से बढ़ रहे ई-कॉमर्स को लेकर केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की इस चिंता को भी इसी संदर्भ में देखना चाहिए जिसमें उन्होंने कहा है कि ऑनलाइन कारोबार छोटे विक्रेताओं के ऊंचे मार्जिन व ऊंची कीमतों वाले उत्पादों को खा रहा है। ये ऐसे उत्पाद हैं जिनसे छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी चलती है।

देश में ऑनलाइन खरीद-बिक्री का दौर शुरू होने के साथ ही छोटे विक्रेताओं ने अपने ऊपर आए संकट की बात कहनी शुरू कर दी थी। एक हद तक उनके कारोबार पर इसका असर भी हुआ। अब केन्द्रीय मंत्री ने उनकी बात पर मुहर लगाने का ही काम किया है। मंत्री ने ई-कॉमर्स से जुड़ी एक रिपोर्ट को जारी करने के मौके पर यह भी कहा कि वर्ष 2019 में ई-कॉमर्स की भारतीय बाजार में हिस्सेदारी महज 4.7 प्रतिशत थी जो इस साल 10.7 प्रतिशत हो जाएगी। सब जानते हैं कि ई-कॉमर्स कंपनियां उत्पादों की खरीद-परोख्त जिन कीमतों पर करती हैं उन पर छोटे व्यवसायियों के लिए स्पर्धा करना और बाजार में टिके रहना मुश्किल हो जाता है। ये कंपनियां एक बार ऐसा करने के बाद कब कीमतें बढ़ा देें, कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे में कोई न कोई नियामक व्यवस्था तो लागू करने की आवश्यकता सदैव ही रहने वाली है। यह संतोष का विषय है कि अब भी आम भारतीय सब्जियां व छोटे-मोटे घरेलू सामान अपने आसपास के फुटकर विक्रेताओं से ही खरीदता है। लेकिन ई-कॉमर्स कंपनियां धीरे-धीरे इन पर भी कारोबारी शिकंजा कसती जा रही हैं। इस कारोबार का बड़ा मुनाफा कुछ नामी-गिरामी कंपनियों के पास ही पहुंच रहा है। यह तर्क दिया जा रहा है कि ई-कॉमर्स कंपनियों ने बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का काम किया है। लेकिन यह चिंता भी किसी से छिपी नहीं है कि लाखों गिग श्रमिक रोजगार से संबंधित बिना किसी कानूनी सुरक्षा के काम कर रहे हैं।

केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री ने यह भी कहा है कि वे नहीं चाहते कि ई-कॉमर्स कंपनियां खत्म हो जाएं लेकिन उनकी भूमिका को व्यवस्थित करने की जरूरत है। जाहिर है यह भूमिका ऐसी होनी चाहिए जिसमें हमारे खुदरा विक्रेताओं को कारोबारी नुकसान नहीं झेलना पड़े।