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फार्मा कंपनियों को बदलना होगा व्यवसाय मॉडल

आइटी में भारी निवेश करने की आवश्यकता ।कोविड काल में यह बात समझ में आ जानी चाहिए कि अब पारंपरिक व्यापार मॉडल काम नहीं करेगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ध्यान देना होगा।

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फार्मा कंपनियों को बदलना होगा व्यवसाय मॉडल

फार्मा कंपनियों को बदलना होगा व्यवसाय मॉडल

डॉ. संदीप नरूला

एक साल से अधिक समय से हम कोविड-19 के खतरे में जी रहे हैं। व्यापार भी सामान्य नहीं रह गया है। नवंबर-दिसंबर 2020 के आस-पास पहली बार थोड़ी राहत के बाद हेल्थकेयर और फार्मा व्यवसाय खुद को संभालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने इसे और अधिक चुनौतियों में धकेल दिया। दूसरी लहर ने तबाही मचाई है और संपूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को ध्वस्त करते हुए भारत में प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 180 मौत का आंकड़ा पार कर दिया है। विशेषज्ञ, तीसरी लहर का भी दावा कर रहे हैं और अगर ऐसा होता है, तो सवाल यह है कि व्यापार, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन कैसा होगा? क्या हम वास्तव में नए सामाजिक और व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए तैयार हैं? क्या सरकार व्यापारिक संगठनों को भारी नुकसान से निपटने में मदद करेगी? क्या रोजगार से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा? विशेष रूप से कैसे फार्मा कंपनियां मौजूदा व्यवसाय मॉडल से नए डिजिटल व्यवसाय मॉडल को अपना पाएंगी? एमएनसी फार्मा दिग्गजों को छोड़कर क्या दूसरी फार्मा कंपनियों का शीर्ष नेतृत्व डिजिटल चुनौतियों से निपटने में सक्षम है?

आज फार्मास्युटिकल कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती उनकी अपनी डोमेन कंपनियां भी हैं। साथ ही पहले से ही तकनीक से संचालित कंपनियां मौजूद हैं। इन कंपनियों के पास पहले से ही मजबूत ग्राहक डेटा (जनसांख्यिकीय और मनोवैज्ञानिक) और विवरण के साथ एक रेडीमेड नेटवर्क है, जिसमें चिकित्सक और रोगी दोनों शामिल हैं। इसलिए उनके लिए वांछित समाधान प्रदान करना बहुत आसान है। इन तकनीक-संचालित कंपनियों ने पहले ही 'बीमारीÓ से 'कल्याणÓ की ओर बदलाव किया है। फार्मास्युटिकल कंपनियां आज तक बीमारी पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं और एक बीमार व्यक्ति को अपना ग्राहक मान रही हैं, लेकिन ये टेक संचालित कंपनियां किसी भी बीमारी के बारे में बात नहीं करती हैं, लेकिन वे फिटनेस और स्वस्थ रहने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। इस लिहाज से संपूर्ण मानव समाज अब उनका ग्राहक है। अब इसे परिवर्तन के रूप में जाना जाता है, जहां एक छोटे प्रतिशत या आबादी के एक अंश से, आप एक बड़े वर्ग को लक्षित करना शुरू करते हैं, तो इसे ट्रांसफॉर्मेशन के रूप में जाना जाता है। जब आप बड़े वर्ग तक पहुंचना चाहते हैं, तो पारंपरिक व्यापार मॉडल काम नहीं करेगा। इसके लिए आपको एक ऐसे मॉडल की आवश्यकता होगी, जो लाखों और करोड़ों ग्राहकों तक पहुंचने का माध्यम बन सके और यह अवसर डिजिटल प्लेटफॉर्म ही देता है।

चिकित्सकों तक पहुंचने के लिए भी फार्मा कंपनियों को डिजिटल मार्ग अपनाना होगा, क्योंकि चिकित्सक डिजिटल प्लेटफॉर्म को एक बेहतर विकल्प मान रहे हैं। वर्तमान में, कुछ बड़ी फार्मा कंपनियों को छोड़कर ज्यादातर दवा कंपनियां, डिजिटल परिवर्तन से बाहर हैं। डिजिटल परिवर्तन के लिए कंपनियों को क्लाउड कंप्यूटिंग शुरू करने के लिए आइटी में भारी निवेश करने की आवश्यकता है। क्लाउड कंप्यूटिंग में निवेश करने से उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। यह निवेश उन्हें अपनी व्यावसायिक रणनीतियों को संचालित करने के लिए उपयुक्त मंच प्रदान करेगा। कहने की जरूरत नहीं है कि पारंपरिक आइटी प्रबंधक के स्थान पर, कंपनी को सीआइओ या सीटीओ को नियुक्त करने की आवश्यकता है। फार्मास्युटिकल कंपनियों को न केवल सीडीओ (चीफ डेटा ऑफिसर) को नियुक्त करने की आवश्यकता है, बल्कि बाजार में बार-बार होने वाली रुकावटों को ध्यान में रखते हुए अपने ऑपरेटिंग मॉडल को भी बदलना होगा। इसलिए, यह निश्चित है कि मामूली परिवर्तन वांछित प्रतिक्रिया नहीं देगा, बल्कि आमूलचूल परिवर्तन करना होगा।

(लेखक आइआइएचएमआर यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर हैं)