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आत्म-दर्शन : अच्छा स्वास्थ्य है सुख का आधार

शरीर ही सभी धर्मों (कर्तव्यों) को पूरा करने का साधन है। अर्थात्, शरीर को स्वस्थ बनाए रखना जरूरी है। इसी के होने से सभी का होना है। शरीर की रक्षा और उसे निरोगी रखना मनुष्य का सर्वप्रथम कर्तव्य है।

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Patrika Desk

Apr 10, 2022

life lessons

आत्म-दर्शन : अच्छा स्वास्थ्य है सुख का आधार

मानवीय देह ईश्वरीय उपहार है। अत: शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक स्वास्थ्य रक्षण मनुष्य की प्राथमिकता होनी चाहिए। स्वस्थ तन और पवित्र मन जीवन की बड़ी उपलब्धि है। शरीर ही सभी धर्मों (कर्तव्यों) को पूरा करने का साधन है। अर्थात्, शरीर को स्वस्थ बनाए रखना जरूरी है। इसी के होने से सभी का होना है। शरीर की रक्षा और उसे निरोगी रखना मनुष्य का सर्वप्रथम कर्तव्य है। स्वस्थ रहने पर ही कोई अपना और दूसरों का भला कर सकता है। महर्षि चरक ने लिखा है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों का मूल आधार स्वास्थ्य ही है। यह बात सत्य है। मानव जीवन की सफलता धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्त करने में ही निहित है, परंतु सबकी आधारशिला मनुष्य का स्वास्थ्य है। रोगी और अस्वस्थ मनुष्य न धर्म-चिन्तन कर सकता है, न अर्थोपार्जन कर सकता है, न काम प्राप्ति कर सकता है और न ही मानव-जीवन के सबसे बड़े लक्ष्य मोक्ष की ही उपलब्धि कर सकता है, क्योंकि इन सबका मूल आधार शरीर है। यह शरीर भगवान का मंदिर है। देह को मंदिर ही रहने दें, पवित्र रखें। समय से, सात्विक, संतुलित व सम्पूर्ण आहार का सेवन कर शरीर को स्वस्थ बनाएं। अच्छा स्वास्थ्य जीवन के समस्त सुखों का आधार है। वर्तमान युग मे भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में हुए विकास से हमने बहुत से सुविधाजनक साधन (उपकरण) खोज लिए हैं। इनके उपयोग से हमें अधिक समय मिलना चाहिए था, लेकिन इन सुविधाओं में हम इतने अधिक उलझ गए हैं कि समय की कमी पड़ गई है। हमें इतना भी समय नहीं मिलता कि हम अपने अंदर झाँक सकें और अपने जीवन के उद्देश्यों को परख सकें। इस प्रकार हम आध्यात्मिकता से दूर होते जा रहे हैं। क्या हमारे जीवन का उद्देश्य केवल जन्म लेना, बड़ा होना, अपनी जिम्मेदारियों को निभाना और मृत्यु को प्राप्त करना ही है या इसके अतिरिक्त भी कुछ और है? संत-महापुरुष कहते हैं कि मनुष्य जीवन के तीन पहलू हैं - बौद्धिक, शारीरिक और आध्यात्मिक। हमें इन तीनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए स्वयं को आगे बढ़ाना चाहिए। हम बौद्धिक और शारीरिक विकास में तो बहुत प्रगति कर चुके हैं, लेकिन दुर्भाग्य से हम अपने आध्यात्मिक पहलू को भूल गए हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमने मनुष्य जन्म पाया है। इसलिए अपने इस जीवन में यदि हम अपने आध्यात्मिक विकास के लिए समय नहीं निकालेंगे तो हम अपना ध्येय पूरा नहीं कर सकेंगे ...।