
वीआइपी संस्कृति का मोह छोड़ें जनप्रतिनिधि
सत्ता के साथ विशिष्टता का जुड़ाव नई बात नहीं है। हालांकि, संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता ही जनार्दन होती है मगर सत्ता से शक्ति के साथ ही विशिष्ट सुविधाएं भी जुड़ जाती हैं। समय-समय पर वीआइपी संस्कृति के खिलाफ आवाजें उठती रही हैं और इसमें बदलाव के प्रयास भी होते रहे हैं। पिछले एक सप्ताह के दौरान कर्नाटक में दो ऐसे आदेश जारी हुए हैं जो वीआइपी संस्कृति को कम करने की दिशा में अच्छी पहल है।
नए आदेश के मुताबिक अब राज्य में मुख्यमंत्री के काफिले के लिए जीरो ट्रैफिक की व्यवस्था नहीं होगी। इसकी जगह मुख्यमंत्री के काफिले को सिग्नल फ्री यातायात उपलब्ध कराया जाएगा। अक्सर विशिष्ट व्यक्तियों की सुविधा और सुगम सफर के लिए उनकी आवाजाही के दौरान यातायात रोक दिया जाता है या मार्ग में बदलाव किया जाता है। इससे लोगों को असुविधा होती है। यातायात पुलिस को भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है। खासकर, बेंगलूरु जैसे अधिक यातायात दबाव वाले शहर में व्यस्ततम समय के दौरान। नए आदेश से लोगों के साथ ही यातायात पुलिस को भी राहत मिलेगी।
दूसरे विशिष्ट लोगों को भी इसका अनुकरण करना चाहिए। जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को आम लोगों की सुविधाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। अगर सुरक्षा कारणों से यातायात रोकना जरूरी हो तो भी इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि किसी को असुविधा नहीं हो। ऐसी स्थिति में एम्बलुेंस और आपात जरूरतों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होना चाहिए। हर किसी को जीने का अधिकार समान रूप से है। दूसरा आदेश, सलामी गारद को लेकर है। अक्सर मुख्यमंत्री या दूसरे वीआइपी दौरों के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। कई बार रेलवे स्टेशन या हवाई अड्डे पर वीआइपी के आगमन पर गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने के कारण लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। दौरे के दौरान वीआइपी को दिन में अलग-अलग कार्यक्रमों में कई बार भी गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है।
यह काफी पुरानी परंपरा है और निर्देशों के बावजूद रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे अथवा अतिथिगृहों में महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों को गार्ड ऑफ ऑनर देने की व्यवस्था जारी है। मेंगलूरु हवाई अड्डे पर गार्ड ऑफ ऑनर के निरीक्षण के बाद ही मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने इस व्यवस्था को खत्म करने को लेकर आदेश जारी करने की बात कही थी। अब सार्वजनिक स्थलों पर गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया जाएगा और यह सिर्फ सरकारी भवनों में दिन में एक बार तक सीमित होगा। हालांकि, कुछ महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों के मामले में यह आदेश लागू नहीं होगा, मगर फिर भी यह अच्छी पहल है।
Published on:
16 Aug 2021 12:52 pm
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